आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी का प्रयोग करें: उपराष्ट्रपति

आंध्र प्रदेश
दिसम्बर 24, 2019

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों को नवाचार केन्द्रों में परिवर्तित करना होगा: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने युवा इंजीनियरों से समस्याओं का लीक से हटकर समाधान ढूँढने का आह्वान किया
उपराष्ट्रपति ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया
उपराष्ट्रपति ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, ताडेपल्लीगुडम के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज युवा इंजीनियरों से आम आदमी के जीवन की बेहतरी के लिए नवाचार और तकनीकी प्रगति का प्रयोग करने का आह्वान किया।

नवाचार को 21 वीं शताब्दी का नारा बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों जैसे संस्थानों से स्वयं को नवाचार केंद्र में परिवर्तित करने का आह्वान किया। उन्होंने ऐसे संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों को सतत तौर पर विकसित करने का सुझाव दिया ताकि वे समय के अनुरूप हों और यह भी सुझाव दिया कि ऐसे संस्थान प्रत्येक छात्र को अपना सर्वश्रेष्ठ देने हेतु प्रेरित करें।

आज आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, ताडेपल्लीगुडेम के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह युवा इंजीनियरों के लिए किसानों के समक्ष उपस्थित जलवायु परिवर्तन की समस्या सहित विभिन्न समस्याओं का लीक से हटकर समाधान ढूंढने का समय है।

किसानों की आय को दोगुना करने और कृषि की लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से बेहतर मौसम भविष्यवाणी प्रणाली विकसित करने तथा कृषि को और अधिक लचीला बनाने के तौर-तरीकों और साधनों का पता लगाने का आह्वान किया।

यह उल्लेख करते हुए कि कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए भारत के खाद्य उत्पादन को बढ़ाना होगा, श्री नायडु ने कहा कि आयातित खाद्य सुरक्षा कभी समाधान नहीं हो सकती।

यह उल्लेख करते हुए कि जलवायु के पैटर्न और मौसम प्रणालियां बदल रही हैं, उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग एक वास्तविकता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में अब कोई इनकार नहीं कर सकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियर और प्रौद्योगविद (टेक्नोक्रेट) स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के समर्थक बने। उन्होंने कहा कि अच्छी तकनीक के जरिए पर्यावरण और विकास के बीच एक संतुलन कायम किया जा सकता है। उन्होंने कहा “यह जरूरी है कि हम उस संतुलन को कायम रखें। हमारा विकास दीर्घकालिक होना चाहिए। संरक्षण आपके प्रत्येक नवाचार का आधार होना चाहिए।”

श्री नायडु ने शहरी और ग्रामीण भारत के बीच अंतर कम करने के लिए तकनीकी नवाचारों और हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया।

इस बात पर बल देते हुए कि विकास समाज के सभी वर्गों तक अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

महात्मा गांधी द्वारा गांवों को आत्मनिर्भर संस्थाओं के रूप में विकसित करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए, उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए स्कूलों, अस्पतालों, पुस्तकालयों और कौशल विकास केंद्रों जैसी सुविधाओं के सृजन का आह्वान किया।

युवा छात्रों द्वारा तनाव के कारण आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने संबंधी समाचारों पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में कैम्पस सबसे सुरक्षित स्थान होने चाहिए और सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से युवाओं को तनाव प्रबंधन सिखाने के लिए अतिरिक्त ध्यान देने का आग्रह किया।

उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे तकनीकी शिक्षा संस्थानों को छात्रों में जीवन कौशल का पोषण करना चाहिए तथा नैतिक मूल्य विकसित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों से उत्तीर्ण होने वाले प्रत्येक स्नातक को न केवल अकादमिक रूप से दक्ष होना चाहिए अपितु नैतिक मूल्यों से सम्पन्न दयालु और ईमानदार भी होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने केन्द्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया, जब उन्होंने 2015 में एनआईटी आंध्र प्रदेश के शिलान्यास समारोह में भाग लिया था।

इस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री विश्व भूषण हरिचंदन; आवासन मंत्री, आंध्र प्रदेश सरकार, श्री रंगनाधा राजू; महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, आंध्र प्रदेश सरकार, श्रीमती तनेती वनिता; निदेशक, एनआईटी आंध्र प्रदेश, प्रो. सी.एस.पी. राव; कुलसचिव, एनआईटी आंध्र प्रदेश, प्रो. जी. अम्बा प्रसाद राव और अन्य लोग उपस्थित थे।

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