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    उपराष्ट्रपति ने बेंगलुरु में नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

    प्रकाशित तिथि : जून 27, 2026
    Vice President Shri C. P. Radhakrishnan graced the 517th Birth Anniversary celebrations of Nadaprabhu Sri Kempegowda in Bengaluru on 27.06.2026

    बेंगलुरु की ‘मिनी भारत’ के तौर पर पहचान केम्पेगौड़ा की दूरदर्शी सोच का सबूत है: उपराष्ट्रपति

    टिकाऊ विकास, सामाजिक सद्भाव और समावेशी शासन को लेकर केम्पेगौड़ा की सोच आज भी आधुनिक भारत को प्रेरित करती है: उपराष्ट्रपति

    महान राष्ट्र उन लोगों से बनते हैं, जो अपने जीवनकाल से आगे की सोचते हैं: केम्पेगौड़ा जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति

    भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज बेंगलुरु में नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने बेंगलुरु के संस्थापक को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक दूरदर्शी प्रशासक, शहर के निर्माता, पर्यावरणविद् और समाज सुधारक बताया, जिनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।

    सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री केम्पेगौड़ा को केवल एक शासक के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने लोगों के कल्याण के लिए दूरदर्शी सोच के साथ काम किया। उन्होंने कहा कि केम्पेगौड़ा ने एक ऐसे समावेशी शहर की कल्पना की थी, जहाँ किसान, व्यापारी, कारीगर, विद्वान और अलग-अलगधर्मोंकेलोगएकसाथरहसकेंऔरसाथमेंतरक्कीकरसकें।उन्होंनेखुशीज़ाहिरकरतेहुएकहाकिआजकाबेंगलुरुवास्तवमें”मिनीभारत”केरूपमेंउसीसोचकोदर्शाताहै।

    केम्पेगौड़ा की दूरदर्शिता की तारीफ करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने सुनियोजित शहरी विकास की नींव रखी, जिसमें अच्छे ढंग से डिज़ाइन किए गए बाज़ार, रिहायशी इलाके, जल प्रणालियाँ और सार्वजनिक स्थान शामिल थे। उन्होंने कहा कि केम्पेगौड़ा का झीलों और जल-धाराओं का आपस में जुड़ा नेटवर्क और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना, भारत की टिकाऊ विकास की सदियों पुरानी समझ को दिखाता है। साथ ही, यह पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी आज की चुनौतियों से निपटने के लिए भी अहम सीख देता है।

    उपराष्ट्रपति ने सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक सद्भाव और मानवीय गरिमा के प्रति केम्पेगौड़ा की प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कन्नड़ संस्कृति से गहराई से जुड़े होने के बावजूद, केम्पेगौड़ा ने भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को अपनाया और उनका मानना ​​था कि एक महान शहर को शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना चाहिए।

    यह मानते हुए कि बेंगलुरु भारत की तकनीक और नवाचार राजधानी के रूप में उभरा है, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इसकी सफलता केम्पेगौड़ा द्वारा लगभग पाँच सदी पहले रखी गई मज़बूत नींव पर टिकी है। उन्होंने आगे कहा कि केम्पेगौड़ा की दीर्घकालिक योजना, टिकाऊ और संस्थान-निर्माण के आदर्श विकसित भारत के विज़न की ओर भारत की यात्रा का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

    उपराष्ट्रपति ने युवाओं से केम्पेगौड़ा के जीवन से प्रेरणा लेने और समाज तथा राष्ट्र-निर्माण में सार्थक योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर भी ज़ोर दिया और देश भर के किसानों के फ़ायदे के लिए जल संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने हेतु नदियों को आपस में जोड़ने की वकालत की।

    इस अवसर पर मौजूद लोगों में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावर चंद गहलोत, भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच. डी. कुमारस्वामी, रेल और जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता श्री आर. अशोक, कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधायक डॉ. सी. एन. अश्वथ नारायण, डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी, नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. एम. कृष्णगौड़ा और श्री बसवमूर्ति मदारा चेन्नैया स्वामीजी शामिल थे।

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