7 मार्च, 2017 को जकार्ता में आयोजित आईओआरए नेताओं के प्रथम शिखर सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री मो. हामिद अंसारी द्वारा दिया गया भाषण

जकार्ता, इंडोनेशिया | मार्च 7, 2017

आज हम लोग यहां इस एसोसिएशन की 20वीं वर्षगांठ बनाने के लिए एकत्र हुए हैं और मुझे प्रथम आईओआरए नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने में प्रसन्नता हो रही है।

मेरे और मेरे शिष्टमंडल के प्रति हमारे मेजबानों ने जो आतिथ्य की भावना प्रकट की है, मैं उसके लिए आपका शुक्रगुजार हूं। मैं इस ऐसोसिएशन की अध्यक्षता कर रहे इंडोनेशिया को दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान करने के लिए बधाई देता हूं।

हिंद महासागर वैश्विक कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। यह महासागर और इसके तट प्राकृतिक संपदा से भरपूर हैं और यहां पर 2.3 बिलियन लोग रहते हैं। इससे विकास और समृद्धि के असीम अवसरों का सृजन होता है।

हमारा क्षेत्र सांस्कृतिक दृष्टि से विविधता से भरपूर है और यहां कई स्तरों पर आर्थिक विकास हुआ है। फिर भी, सदियों से इस महासागर के तटों पर रहने वाले लोग समान विचारधारा से जुड़े हुए हैं जिससे कारोबार, धर्म और संस्कृति के माध्यम से विचारों का आदान प्रदान होता रहा है। आइओआरए का सदस्य देश होने के नाते हमारा मानना है कि समुद्र अलग-थलग नहीं करता, बल्कि यह वह पुल है जो जोड़ने का कार्य करता है।

हमने अपने सांस्कृतिक संबंधों में फिर से जान फूंकने के लिए प्रोजेक्ट 'मौसम' की शुरूआत की है। हाल ही में शुरू किया गया 'कंलिगा इंडोनेशिया डायलॉग', जो हमारे अतीत के एक प्रेरणादायी हिस्से की स्मृति को ताजा करता है, एक स्वागतयोग्य पहल है। हम सदस्य देशों के बीच में द्विपक्षीय और सामूहिक दोनों स्तरों पर और अधिक रचनात्मक संबंधों की आशा करते हैं।

आज हमने जिस आई.ओ.आर.ए. समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, वह एक उल्लेखनीय दस्तावेज है जो समुद्री संरक्षा और सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। भारत हमारे आस-पास के क्षेत्र और समुद्रों के लिए शांतिपूर्ण वातावरण की संकल्पना करता है। हम यह मानते हैं कि हमारे महासागर को पारम्परिक और गैर-पारम्परिक खतरों विशेषकर समुद्री डकैती से संरक्षित किया जाना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों के सभी प्रयोक्ताओं को जिम्मेदारी और संयम के साथ कार्य करना होगा।

हमें मुक्त व्यापार और इसके संचालन हेतु खुले समुद्री मार्गों की अत्यंत आवश्यकता है। मैं आई.ओ.आर.ए. के सदस्य देशों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान करता हूं कि यू.एन.सी.एल.ओ.एस. के प्रति हमारी बचनबद्धता की अभिव्यक्ति के रूप में हिन्द महासागर में नौवहन और इसके ऊपर उड़ान भरने की स्वतंत्रता का सभी सम्मान करें।

समुद्री संरक्षा एवं सुरक्षा को वाईट शिपिंग एग्रीमेंट्स जैसी सहयोगी क्रियाविधियों का संस्थानीकरण तथा मेरीटाईम डोमेन अवेयरनेस (एम.डी.ए.) को सुदृढ़ बनाने के लिए सूचना समेकन केन्द्र की स्थापना करके मजबूत बनाया जा सकता है। हमारी सरकार भारत में आई.ओ.आर.ए. सदस्य देशों की सहायता से हमारी अपनी आंतरिक विशेषज्ञता के साथ इस तरह के केन्द्र की स्थापना करके प्रसन्न होगी।

हम बेहतर नौवहन एवं समुद्री भौगोलिकता की बेहतर समझ के लिए सदस्य देशों के साथ अपनी जलमाप चित्रण क्षमताओं को साझा करके प्रसन्न होंगे।

आज, आतंकवाद विकास के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा बन गया है और सभी बहुलतावादी और खुले समाजों के लिए यह एक खतरा है। निर्दोष लोगों की अंधाधुंध हत्या करने के पीछे किसी भी कारण को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। आई.ओ.आर.ए. को किसी देश द्वारा समर्थित आतंकवाद के प्रति जरा सी भी सहिष्णुता नहीं प्रदर्शित करनी चाहिए। आतंकवाद के अपराधियों, संगठनों, वित्तपोषकों और समर्थकों को अलग-थलग कर देना चाहिए और उन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए जाने चाहिए।

हमनें हिंसात्मक उग्रवाद का मुकाबला करने के लिए आई.ओ.आर.ए. घोषणा को अपनाकर आतंकवाद से मुकाबले करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

आई.ओ.आर.ए. के सदस्यों को आसूचनाओं को साझा करके, अपने-अपने- साइबर स्पेस को सुरक्षित बना कर एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए और आतंकवादी गतिविधियों के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग को न्यूनतम कर देना चाहिए। सदस्य देशों के पास उपलब्ध संसाधनों का संयोजन करके इस दिशा में आई.ओ.आर.ए. सहयोगी तंत्र के संस्थानीकरण हेतु तौर-तरीकों को बनाए जाने की अत्यंत आवश्यकता है।

मैं ऐसे विचार मंचों का नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव करना चाहूंगा जो सदस्य देशों के पास उपलब्ध संसाधनों के साझे उपयोग को संभव बना सके। इससे व्यक्तिगत स्तर पर सदस्य देशों के प्रयासों को समन्वित करने में सहायता मिलेगी। इस संदर्भ में, मुझे अपनी सरकार की भारत के किसी एक तटीय शहर में "आई.ओ.आर.ए. उत्कृष्टता केन्द्र (आईसीई)" की स्थापना करने की इच्छा की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। इसका उद्देश्य आंकड़ों और संसाधन सामग्री के सामूहिक स्रोत तक शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को पहुंच प्रदान करना है। हम शीघ्र ही आई.ओ.आर.ए. सचिवालय के माध्यम से प्रस्तावित केन्द्र के संबंध में एक संकल्पना टिप्पण का परिचालन करेंगे।

आज स्वीकार की गई कार्य योजना हमारी साझी प्राथमिकताओं की अंतर्दृष्टि है। भारत इस क्षेत्र की अप्रयुक्त सम्भावनाओं को मूर्तरूप देने के लिए अन्य सदस्यों के साथ मिलकर काम करने और यह सुनिश्चित करने कि हिन्द महासागर समृद्धि एवं सामंजस्य का अंचल बन सके, के लिए प्रतिबद्ध है।
धन्यवाद।