30 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो द्वारा आयोजित डॉ राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल व्याख्यान में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का अभिभाषण

नई दिल्ली | नवम्बर 30, 2017

  1. स्वाधीन भारत के प्रथम राष्ट्रपति की पुण्य स्मृति में आकाशवाणी द्वारा आयोजित इस व्याख्यान के माध्यम से 'भारत का रूपांतरण' विषय पर सुधी श्रोताओं के साथ अपने विचार साझा करने पर मुझे हर्ष हो रहा है।
  2. डॉ0 राजेंद्र प्रसाद आजीवन स्वर्णिम स्वतंत्र भारत के लिए समर्पित रहे। एक छात्र कार्यकर्ता से लेकर स्वाधीन भारत के राष्ट्रपति होने की यात्रा, उनकी अदम्य क्षमता, देश और समाज के प्रति उनके संकल्प और प्रतिबद्धता की महान गाथा है। यह भारतीय राजनीति में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों को भी दर्शाती है जहाँ एक छात्र कार्यकर्ता अपने दृढ़ संकल्प और सेवा तत्परता के कारण स्वाधीन भारत का प्रथम राष्ट्रपति बन सका।
  3. भारत पिछले सत्तर सालों में बदल गया है और हर क्षण रूपांतरित हो रहा है।
  4. श्रोताओं, केवल तुलनात्मक आंकड़ों से ही इस रूपांतरण की तस्वीर साफ नहीं हो सकेगी। समाज में रूपांतरण संख्यात्मक ही नहीं गुणात्मक भी होता है और उसे पहचानना आवश्यक है।
  5. मई 1952 में पहली लोकसभा के निर्वाचन के बाद, नव निर्वाचित सांसदों को पहली बार संबोधित करते हुए राजेंद्र बाबू ने देश की खाद्यान्न समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भारत की सकल राष्ट्रीय आय सिर्फ़ 03 लाख करोड़ रुपये थी और देश महंगे खाद्यान्न का आयात कर रहा था। उस स्थिति से आज हम कृषि खाद्यान्न में स्वावलंबी बने हैं। हरित क्रांति की सफलता के बाद, श्वेत क्रांति के माध्यम से आज भारत पूरे विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। नीली क्रांति से मत्स्यपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर भी देश अग्रसर हैं। खाद्यान्न की उत्पादकता से आज हम खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को विकसित कर रहे हैं। आज हमारे देश की सकल राष्ट्रीय आय 120 लाख करोड़ तक पहुँच गई है।
  6. प्रारंभ की पंचवर्षीय योजनाओं में औद्योगिकरण तथा सरकारी उपक्रमों को स्थापित करने पर जोर दिया गया। पहले देश की अर्थव्यवस्था अंतर्मुखी थी तथा विश्व बाजार से कटी हुई थी। औद्योगिक स्वावलंबन प्राप्त करने के उद्देश्य से आयात के विकल्प पर बल दिया गया। आज “मेक इन इंडिया” के तहत हम विदेशी निर्माताओं को देश में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं और विदेशी पूँजी को देश के त्वरित विकास के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
  7. हमने कई क्षेत्रों में FDI की सीमा 100% तक बढ़ा दी है। आज भारत विश्व अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है। हमारे पास US$370 बिलियन से अधिक विदेशी मुद्रा कोष है। भारत की अर्थव्यवस्था आज विश्व अर्थव्यवस्था का 'पावर इंजिन' के रूप में जानी जाती है। 1991 से देश की अर्थनीति में उदारीकरण के पश्चात् हमने अपनी अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का काम किया है। यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती थी।
  8. हम आज विश्व व्यापार संगठन में बराबर के हिस्सेदार हैं। अपने हितों के संरक्षण के लिए हम विश्व व्यापार संगठन की वार्ताओं में बराबर आवाज़ उठाते हैं। हम विकसित देशों से उनकी अर्थव्यवस्था को हमारे देश के लिए खोलने का आग्रह करते हैं। हम अपने परंपरागत ज्ञान, शिल्प और कारीगरी को बौद्धिक संपदा के रूप में प्रयोग कर रहे हैं, जिससे परंपरागत समूहों और समाज को इस संपदा का लाभ मिल सके। इसी प्रकार पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी अंतर्राष्ट्रीय समझौतों पर भी हम अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार कर रहे हैं। परिणामस्वरूप भारत के नेतृत्व में आज अंतरराष्ट्रीय सोलर संगठन बना और उसका मुख्यालय भारत में स्थापित किया गया।
  9. अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हमारी सफलताएँ हमारे देश निर्माताओं को गौरवान्वित करती हैं। आज हम न केवल अपने बल्कि विकसित देशों के उपग्रह भी प्रक्षेपित कर रहे हैं। एक ही उड़ान में सर्वाधिक 104 उपग्रह प्रक्षेपण का रिकार्ड ISRO की प्रशंसनीय उपलब्धि है।
  10. विश्व शांति के संस्कार, हमें पीढ़ियों से प्राप्त हुए हैं। हर पीढ़ी ने इस धरोहर का संरक्षण किया है। संकीर्ण धार्मिक, राजनैतिक विश्व में भारत शांति का संदेश निरंतर देता रहा है। शांति, सद्भावना और विश्व को एक परिवार मानना हमारे सनातन संस्कृति का मूल स्तंभ रहा है। शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के मूलभूत सिद्वांतों का पालन करते हुए हमने सदैव ही संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयास में अपना योगदान दिया है। हमारे लिए यह गर्व का विषय है कि 71 राष्ट्र शांति मिशन में से, लगभग 50 मिशनों में भारत की भागीदारी रही है। कम ही श्रोताओं को ज्ञात होगा कि भारत पहला देश था जिसने राष्ट्र के शांति दस्ते में महिलाओं का दस्ता भेजा था। उसके बाद अनेक देशों ने हमारा अनुसरण किया।
  11. इस संदर्भ में हाल की एक महत्वपूर्ण घटना का जिक्र करना चाहूँगा। हमारे देश के प्रतिनिधि न्यायमूर्ति श्री दलबीर भंडारी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) में पुनर्निवाचित हुए हैं। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के 71 वर्षों के इतिहास में पहली बार ब्रिटेन का कोई प्रतिनिधि नहीं है। भारत की इस उपलब्धि को विश्व राजनीति में बदलते समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है जिसमें भारत एक जिम्मेदार और आर्थिक एवं सामरिक रूप से शक्तिशाली राष्ट्र के तौर पर उदय हो रहा है। रूपांतरण का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि भारत के औपनिवेशिक शासक आज भारत से मैत्री को महत्व दे रहे हैं।
  12. राजेंद्र बाबू तथा उनके पीढ़ी के राजनेताओं ने उपनिवेशवाद के विरुद्ध जिस यज्ञ का प्रारंभ किया था, वह सफल हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत आज बड़ी आर्थिक शक्ति के तौर पर उभर रहा है। इसके आर्थिक महाशक्ति बनने से दक्षिण एशियाई देशों के बीच भारत की स्थिति बड़े भाई जैसी है और इसीलिये यह दक्षिण एशियाई देशों खासकर अफ़गानिस्तान के पुनर्निर्माण, भारत-बंगला देश के बीच पानी के बँटवारे को लेकर उत्पन्न समस्या के निराकरण तथा भारत-नेपाल के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देकर भारत दक्षिण एशियाई देशों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
  13. गत कुछ वर्षों से हमने पिछले अनुभवों के आधार पर उदारीकरण को तेज और उत्तरदायी बनाने के लिए वैधानिक कदम उठाये हैं। पुराने कानूनों को निरस्त कर नये कानूनों और नीतियों को लाया जा रहा है। नयी नीतियों की कारगर समीक्षा की जा रही है। लोकतांत्रिक शासन को सुशासन बनाने की दिशा में कारगर कदम उठाये जा रहे हैं। स्वराज्य का लाभ और आनन्द सभी भारतीयों को प्राप्त हो। इस महत्वाकांक्षा से सुराज्य को सुदृढ़ करने के अनेक प्रयास हम कर रहे हैं।
  14. प्रिय देशवासियों, भारत के बदलाव की इस प्रक्रिया में पिछले लगभग तीन दशकों में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सूचना प्रौद्योगिकी की इस क्रांति का प्रयोग केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर जनमानस के सामान्य जीवन को सुविधाजनक व सरल बनाने के लिए किया जा रहा है। सरकारों द्वारा नागरिकों को प्रदान की जा रही विभिन्न सेवाओं को निरंतर ई-गवर्नेंस के दायरे में लाया जा रहा है। ई-गवर्नेंस प्रदान करने की केंद्र व राज्य सरकारों की मुहिम नागरिकों को सुशासन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी, ऐसी मेरी पूरी आशा है।
  15. इन प्रयासों में केंद्र सरकार की 'डिजिटल इंडिया' योजना उल्लेखनीय है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में भारत एक पूर्णत: डिजिटल समाज और राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा। अपने इस प्रयास में हमें अपने ग्रामीण क्षेत्रों की ओर विशेष ध्यान देना होगा। चूँकि हमारी जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा गाँवों में रहता है इसलिए डिजिटल इंडिया के हमारे सपने को तभी साकार किया जा सकता है जब हम अपने गाँवों को अपने 'डिजिटल मानचित्र' पर जल्द से जल्द ले आएँ।
  16. डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने भारतीय प्रतिभा को विश्व के समक्ष प्रतिस्पर्द्धी बनाने के लिए शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करना होगा। आज़ादी के बाद लंबे समय तक हमने अंग्रेजों से प्राप्त अफसरशाही तथा उसी कार्यप्रणाली को बनाये रखा। बदलती जरूरतों के साथ लालफीताशाही को काटना आवश्यक था। गुड गवर्नेंस को सक्षमता, पारदर्शिता, कुशलता के मानकों पर आंका जाना अपेक्षित था। डिजिटल इंडिया तथा ई-गवर्नेंस को हर स्तर पर बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। बैंकिंग, कराधान, विदेश व्यापार, यातायात आदि अनेक क्षेत्रों में ई-प्रोसेस प्रारंभ हो गये हैं। अनेक सरकारी सेवाओं और आंकड़ों को अंकीकरण कर दिया गया है। इससे सरकारी तंत्र और जनता के बीच सम्पर्क कम हुआ है और अधिकार का क्षेत्र कम कर, नियम आधारित सुशासन लागू किया जा रहा है। सूचना के अधिकार के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
  17. लोकतांत्रिक सरकार से अपेक्षित है कि वह अंत्योदय के आदर्श पर कार्य करे। आम आदमी के रोजमर्रा के संघर्षों से लोकतांत्रिक सरकार का सरोकार होना ही चाहिए। अपने परिवेश में स्वच्छता कौन नहीं चाहता? खुले में शौच से मुक्ति महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा कारणों से सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। 1300 शहर खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिये गये हैं। शहरों में 4 लाख से अधिक निजी शौचालय बनाए गये हैं। मुझे हर्ष है कि गांवों में यह अभियान शहरों से भी अधिक सफल हुआ है। लगभग 5.5 करोड़ निजी शौचालयों का निर्माण किया गया है। लगभग 2.75 लाख ग्रामों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है। 'नमामि गंगे' के तहत भी 4400 गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है। जिसमें नदियों को निर्मल करने में सहायता मिलेगी।
  18. लिंगानुपात महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक अड़चन है। आज कन्या भ्रूण हत्या कानूनी अपराध है, परंतु इस पर पूरी तरह अंकुश लगाने में हम सफल नहीं हो पाये हैं। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे सकारात्मक अभियान से आज समाज का दृष्टिकोण महिलाओं के प्रति बदला है।
  19. समाज और सरकार के संयुक्त प्रयासों से आज महिलाओं के प्रति एक अनुकूल वातावरण बन रहा है। हरियाणा जैसे पारंपरिक समाज में, महिलाओं का लिंगानुपात कई वर्षों में पहली बार 900 के ऊपर हो गया है।
  20. Dr. Rajendra Prasad and Pandit Nehru had different views on certain issues including inauguration of the rebuilt Somnath Temple in Gujarat.
  21. Both Dr. Rajendra Prasad and Sardar Vallabhai Patel felt the reconstruction ought to be done quickly because it was a matter of ‘Rashtriya Swabhiman’, and with K.M. Munshi who also wanted to see Somnath Reconstructed swiftly. In that sense Sardar Patel, Rajendra Babu and Munshi thought alike because the dilapidated condition of the Somnath Mandir troubled them no end.
  22. President Rajendra Prasad participated in the ceremony to re-install the Somnath Lingam on May 11, 1951. At the inaugural ceremony, Rajendra Prasad said that although monuments can be destroyed, the bond that people have with their culture and faith can never be destroyed.
  23. भारत युवा देश है। यहाँ 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। इनमें अदम्य शक्ति और विश्वास है। उपरोक्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं में भारत भूमि, भारतीय संस्कृति, समाज तथा भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति आस्था पैदा करना आवश्यक है। भारत को विकास के मार्ग पर प्रशस्त करने के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह हमारी जनसांख्यिकीय लाभांश है। विकास में इनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इन युवाओं को कुशल बनाने पर जोर देने की दिशा में कौशल विकास की एक रूपरेखा तैयार की गयी है। इसके अतिरिक्त, स्वरोजगार बढ़ाने के लिए मुद्रा योजना द्वारा महिला उद्यमी एवं SC/ST उद्यमी को लाभ पहुँचा है।
  24. देश के युवाओं को स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करने के लिए उनमें उद्यमिता को बढ़ाने के लिए र्स्टाट अप इंडिया जैसी योजना लागू की गई। आइडिया को इनोवेशन तक तथा इनोवेशन को इंटरप्राइसेस तक विकसित करने में यह योजना कारगर साबित होगी।
  25. कस्बों और गांवों के उद्यमियों को आसान शर्तों पर बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए जनधन योजना के तहत उनको बैंकिंग व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अब तक लगभग 30 करोड़ से अधिक नये खाते खोले गये जिनमें लगभग 68000 करोड़ रुपये की धनराशि जमा की गई है। जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग बैंकिंग व्यवस्था में शामिल हुआ है।
  26. यह प्रसन्नता की बात है कि इस वर्ष विश्व बैंक की कार्य करने की सुगमता की सूची में हम 100वें स्थान पर पहुँच गए हैं। हमारा उद्देश्य विश्व की पहली 50 अर्थव्यवस्थाओं में पहुँचना है। व्यवसाय और स्वरोजगार से ही बेरोजगारी की समस्या का निदान होगा।
  27. भारत देश की कर पद्वति का एक महत्वपूर्ण दूरदर्शी रूपांतरण हो रहा है जी एस टी के माध्यम से। 01 जुलाई, 2017 से देश में लागू हुई GST से 'एक देश, एक बाज़ार' का स्वप्न साकार हुआ। पहली बार राज्यों के साथ एक नई व्यवस्था द्वारा जीएसटी काउंसिल स्थापित की गई जो जीएसटी की दरों पर निर्णय लेगी। यह व्यवस्था सहयोगी संघवाद का एक अप्रतिम उदाहरण है। नई व्यवस्था लागू करने में कठिनाइयां आना स्वाभाविक है - कर अधिकारियों तथा कर दाताओं - दोनों के लिए। लेकिन यह देशवासियों के हित में है और भारत की आर्थिक व्यवस्था को परिपुष्ट करने के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
  28. आजादी के समय हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित थी। आज भी अधिकांश जनसंख्या गावों में वास करती है। लेकिन गत दशकों में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। आज शहरों को 'इंजिन ऑफ ग्रोथ' के रूप में विकसित किया जा रहा है। देश की 2/3 GDP और 90% राजस्व शहरों से आता है। लेकिन शहरीकरण के साथ शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त करने की आवश्यकता है। स्मार्ट सिटी, अमृत, हृदय जैसी योजनायें इसी दिशा में प्रयास है।
  29. सबसे महत्वपूर्ण प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान कर अर्थव्यवस्था की मूलधारा से जोड़ने के लिए किये गये हैं। आज हम 18000 गांवों का विद्युतीकरण कर रहे हैं। देश की 685 मंडियों को E-NAM के माध्यम से डिजिटली जोड़ा जा रहा है जिससे किसानों को अपने उत्पाद के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। लगभग 1.67 लाख रिहाइशी इलाकों को ग्रामीण सड़क योजना के तहत जोड़ने का लक्ष्य है।
  30. आज देश में 55 लाख किलोमीटर सड़कों का जाल है जिसमें 1.14लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग, 1.61 लाख किमी. राज्य राजमार्ग तथा लगभग 4 लाख किमी. ग्रामीण सड़कें हैं। 76000 गांवों को आप्टीकल फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। जनधन योजना के तहत खोले गये खातों से बड़े पैमाने पर गावों का वित्तीय समावेशन हुआ है। गाँव जितने अर्थव्यवस्था से जुड़ेंगे, उतना अर्थव्यवस्था में विस्तार होगा और स्थायित्व आयेगा। आज देश में विद्युत आपूर्ति की कमी नहीं है। मार्च 2019 तक हर गाँव, हर शहर के हर घर तक सस्ते दर पर बिजली पहुँचाने का लक्ष्य है।
  31. मनरेगा तथा खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कमजोर तबकों के लिए रोजगार तथा पोषण को सुनिश्चित किया जा रहा है। नि:संदेह हम अन्त्योदय के आदर्श पर नया भारत बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
  32. हमारे लिए गर्व का विषय है कि भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। आज विश्व में भारत को एक आदर्श-प्रजातंत्र के रूप में देखा जा रहा है जिसने सवा सौ करोड़ लोगों को जो विभिन्न जातियों, धर्मों, समुदायों, भाषाओं से तालुक रखते हैं; एक संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था में पिरो कर रखा है। संविधान में 73वें और 74वें संशोधन के माध्यम से पंचायती राज की स्थापना की गई। महिलाओं को 33% आरक्षण देकर पंचायती राज संस्थाओं को महिला के राजनैतिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया गया। इस अनुभव को संसद और विधान सभाओं में भी लागू करने पर विचार करना चाहिए।
  33. श्रोताओं, विकास का प्रवाह सतत् है, इसमें चुनौतियाँ ही अवसर प्रदान करती हैं। हमारे समक्ष भी बहुत चुनौतियाँ हैं जैसे :

काला धन और भ्रष्टाचार - मुक्त बाजार व्यवस्था के लिए अभीष्ट और वैधानिक नियंत्रण के अभाव में, भ्रष्टाचार बढ़ा। पुराने कानूनों के स्थान पर नये विधान लाना तथा उनकी सतत् निरीक्षण जरूरी है। काला धन हमारी अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहा है। विमुद्रीकरण के बाद से, इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में 25% की वृद्धि तथा एडवांस टैक्स कलेक्शन में 41% की वृद्धि, काले धन के विरुद्ध विमुद्रीकरण की सफलता को इंगित करता है। देशवासियों से मेरा आग्रह है कि वे लैस-कैश इकानामी की तरफ अग्रसर हो तथा डिजिटल मोड से कारोबार करे।

कृषि और किसानों की समस्या - यद्यपि हम खाद्यान्न में आत्मनिर्भर हो गये हैं फिर भी आज कृषि सबसे जोखिम भरा व्यवसाय है। किसान आज भी मौसम और सरकार पर निर्भर है। आवश्यक है कि कृषि में निवेश बढ़े, किसानों की मौसम पर निर्भरता कम हो, सिंचाई के साधन विकसित हों, किसान को फसल के लिए बाजार और मूल्य मिले। भूमिहीन और छोटे किसानों में अधिकांश को साहूकारों और अनधिकृत स्रोतों से ही ऋण लेना पड़े। इस स्थिति को बदलना ही होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में व्यवसायों और कृषि का विविधीकरण करके, खेती पर निर्भरता को कम करना होगा। खाद्य प्रसंस्करण पर भी अधिक ध्यान देना होगा।

आतंकवाद, नक्सलवाद, अतिवाद जैसी विभाजनकारी प्रवृतियाँ - देश गत 40 वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, देश में पनप रहे नक्सलवाद, क्षेत्रीयवाद जैसी विभाजनकारी प्रवृत्तियों से जूझ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा से इन प्रवृत्तियों पर समय रहते काबू पाया है। फिर भी सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने के लिए वैश्विक सहमति और कार्य योजना की आवश्यकता है। देश में राजनैतिक हिंसा का विष फैल रहा है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

आधारभूत ढाँचे का विकास -- यद्यपि विश्व बैंक की 2016 की संभारिकी-निष्पादन में भारत 36 वें स्थान पर पहुँच गया, फिर भी यदि भारत को तीव्र विकास दर को बनाये रखना हे तो इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलेपमेंट में निवेश करना होगा। इसमें भारी पूँजी निवेश और तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होगी।

सामाजिक क्षेत्र में निवेश -- शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सामाजिक क्षेत्र में हमारा निवेश कुल जीडीपी का केवल 7.4% है जिसमें शिक्षा पर GDP का 3.2% और स्वास्थ्य पर मात्र 1.5% व्यय किया जाता है। यह स्थिति सुधरनी ही चाहिए।

  1. मुझे विश्वास है कि चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों इन चुनौतियों के प्रति सजग रहें और इन चुनौतियों को विकास के अवसर में बदलें। इन चुनौतियों का सामना सब भारतवासियों को संघटित रूप से करना चाहिए। जटिल समस्याओं का समाधान ढूँढना चाहिए।
  2. श्रोताओं, 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान का अनुमोदन किया। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ0 राजेंद्र प्रसाद ने पूरे संविधान के पीछे दर्शन और संवैधानिक आस्थाओं का सटीक विश्लेषण किया जो भावी नीति-निर्माताओं और न्यायविदों के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा :

अंतत: कोई संविधान किसी मशीन की भांति निर्जीव वस्तु ही है। यह मानवों के द्वारा जीवन अर्जित करता है जो इस पर नियंत्रण रखते हैं, और इसे प्रचालित करते हैं। भारत को आज केवल कुछ ईमानदार व्यक्तियों की आवश्यकता है जिनके लिए देश हित सर्वोपरि हो।

  1. 2022 में स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होंगे। विकास की यात्रा तो सतत और शाश्वत है। आवश्यक है कि हमारे प्रयास ईमानदार हों, कारगर हों तथा जनकल्याण के लिए हों। लोकतांत्रिक व्यवस्था के नेतृत्व की इन लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता बहुत आवश्यक है।
  2. हम सब एक रूपांतरित भारत देखना चाहते हैं। स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, साक्षर भारत, सक्षम भारत, सशक्त भारत, समरस भारत हमारा सपना है। सब भारतवासी यही कामना कर रहे हैं। यदि मन में सुदृढ़ संकल्प, हृदय में सुहृद भावना और कार्य में दक्षता हो तो यह सपना साकार हो सकता है।
  3. सहयोगी संघवाद के साथ साथ प्रतियोगी संघवाद की भी आवश्यकता है। राज्यों के बीच विकास की ओर अग्रसर होने की आकांक्षा प्रबल होनी चाहिए। राज्यों के बीच में विकास की गति को बढ़ाने के लिए स्पर्धा हो तो देश की उन्नति भी गतिशीलता के साथ हो सकेगी।
  4. दुनिया के विचार केन्द्र में आज अर्थ, विज्ञान तथा राजनीति है। लेकिन मानवता की रक्षा सिर्फ इन तीन विचार बिन्दुओं तक सीमित नहीं हो सकती। इनके अलावा भी बहुत कुछ है जो जीवन को स्थायित्व देता है। इसके लिए भारतीय दर्शन, संस्कृति, समाज तथा जीवन मूल्यों के प्रति समझ पैदा करना जरूरी है।
  5. 21वीं सदी भारत की सदी होगी। यह लक्ष्य भारतीय दर्शन, संस्कृति, मूल्यों तथा समाज के स्थिर स्वरूप की बुनियाद पर ही प्राप्त हो सकता है।
  6. 03 दिसंबर को राजेंद्र बाबू की 133वीं जन्म जयंती के अवसर पर, मैं आशा करता हूँ कि भारतीय संसद और सरकार, उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप देश का रूपांतरण करने के पुण्य कार्य में आगामी वर्षों में अत्यधिक श्रद्धा और निष्ठा से जुट जाएंगे। मैं इस व्याख्यान को डॉ0 राजेंद्र प्रसाद की पुण्य स्मृति को समर्पित करता हूँ।

धन्यवाद ! जय हिंद !