30 अगस्त, 2017 को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा आयोजित दूसरा डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम स्मारक व्याख्यान में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का अभिभाषण

नई दिल्ली | अगस्त 30, 2017

मित्रो, आज हम भारत के लब्धप्रतिष्ठ राष्ट्रपति स्वर्गीय डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, जो देश के केवल मिसाइल मैन ही नहीं थे, वरन् अत्यंत लोकप्रिय "जनता के राष्ट्रपति" भी थे का स्मरण करने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

नि:संदेह डा. कलाम वास्तविक अर्थो में असाधारण इंसान थे। वे व्यापक तौर पर उद्धृत हदीस में दी गई इस शिक्षा के साक्षात् प्रतीक हैं:
"कोई भी व्यक्ति जब ज्ञान की खोज में अग्रसर होता है, तब अल्लाह उसे जन्नत की ओर जाने वाली राह पर उन्मुख करेगा।"

अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण वे परिवार की आय में कुछ सहयोग करने के लिए बाल्यावस्था में अखबार बांटा करते थे, उन्होंने अत्यंत जटिल परिस्थितियों में अपने अथक प्रयासों से अपनी शिक्षा प्राप्त की और भारत के अग्रणी अंतरिक्ष और मिसाइल वैज्ञानिक बने। और जैसा कि हम सभी जानते हैं बाद में वे भारत के राष्ट्रपति बने। यह इस देश की महानता है कि अखबार बेचने वाला यह बालक भारत का राष्ट्रपति बनता है। यह भारत के प्रजातंत्र की विशेषता है कि इसने एक साधारण व्यक्ति को भारत का राष्ट्रपति बनाया। यह भारतीय सभ्यता की महानता है, भारतीय संस्कृति की महानता है। हमारे पास ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं। हमारे प्रधानमंत्री भी अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से हैं। वह रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे, जो बाद में भारत के प्रधान मंत्री बने। मैं किसान का बेटा हूँ। मेरे परिवार के किसी सदस्य का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है और न ही किसी ने उच्च शिक्षा ही प्राप्त की। विद्यालय जाने के लिए मुझे तीन कि. मी. पैदल चलना पड़ता था। यह हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली की महानता है जिसके कारण मैं भारत का उपराष्ट्रपति बना हूँ।

धर्म पूजा-अर्चना का एक माध्यम है। हमें अपनी संस्कृति, विरासत, महान सभ्यता पर गर्व होना चाहिए। प्रत्येक धर्म महान है और हमें धर्म की शिक्षाओं और उपदेशों का पालन करना चाहिए।

डा. कलाम चाहे किसी भी पद पर रहे हों, वे सदैव सामान्य बने रहे और सभी के साथ समान प्यार और स्नेहपूर्ण व्यवहार किया - भले ही वहं व्यक्ति किसी उच्च पद पर आसीन रहा हो या छोटे पद पर। वास्तव में, उनका स्नेह इतना स्फूर्त्त और स्वाभाविक रहता था कि वे बच्चों और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गए। वे जहां कहीं भी जाते थे, उन्हें विद्यार्थी और बच्चे घेर लेते थे - उन्होंने नि:संदेह इतनी लोकप्रियता अर्जित की थी।

उनका सपना एक परिवर्तित और ऐसे पूर्ण विकसित भारत को देखने का था, जो 2020 तक विश्व के अत्यन्त विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में शुमार हो। वे इसे 'विजन - 2020' कहा करते थे।

90 के दशक के अंत में सूचना प्रौद्योगिकी, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने एक '2020 तक भारत का प्रौद्योगिकी विजन' नामक एक प्रमुख दस्तावेज तैयार किया था।

तत्पश्चात् '2020 - ए विजन फॉर द न्यू मिल्लेनियम' नामक एक पुस्तक प्रकाशित हुई जिसके सह-लेखक वाई. एस. राजन और डा. कलाम थे। इस पुस्तक की प्रस्तावना में इन लेखकों ने कहा, "हम अपनी शासन प्रणालियों और सामाजिक तथा राजनैतिक बाध्यताओं के बारे में सजग हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें ऐसी परियोजनाओं को लागू करने का अनुभव प्राप्त हुआ जिनमें लाभार्थियों के रूप में समाज के विभिन्न क्षेत्र के लोग शामिल थे और अत्यधिक वाणिज्यिक दबाव वाली एवं सेटेलाइट या प्रक्षेपण यान या मिसाइल जैसी उच्च स्तरीय प्रोफोइल वाली परियोजनाएं थी। इन योजनाओं के निष्पादन से हमें विविध अनुभव प्राप्त हुए, जिन्हें इस पुस्तक को आकार देने में आधारभूत ज्ञान के रूप में उपयोग किया गया है।

इन कारकों पर विचार करके और भारत तथा अन्य देशों की विभिन्न विजन रिपोर्टों का अध्ययन करने के पश्चात्, हमें अभी भी दृढ़ विश्वास है कि भारत 2020 तक विकसित देश का दर्जा प्राप्त कर सकता है। भारत की जनता वर्तमान गरीबी के स्तर से काफी ऊपर उठ सकती है और अपने संवर्धित स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्म-सम्मान के बलबूते अपने देश के लिए अपेक्षाकृत अधिक उत्पादनकारी रूप से योगदान कर सकती है। भारत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय क्षमता हासिल कर सकता है, जो इसकी सामरिक क्षमताओं और आर्थिक तथा व्यापार संबंधी‍क्षमताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है।"

डा. कलाम के विजन - 2020 में भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में परिकल्पित किया गया है, जहां शहरी-ग्रामीण अंतर अत्यंत कम हो, जहां ऊर्जा और गुणवत्तापूर्ण जल का समान रूप से वितरण हो, और लोगों को सहजता से प्राप्त हो, जहां कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र तारतम्यता के साथ मिलकर काम करें; जहाँ सामाजिक या आर्थिक भेदभाव के कारण किसी भी प्रतिभावान छात्र को अच्छी मूल्यपरक शिक्षा से वंचित न किया जाए; भारत ऐसा राष्ट्र बने जो विश्व के अति प्रतिभावान विद्वानों, वैज्ञानिकों और निवेशकों के लिए अति उत्तम है; ऐसा राष्ट्र बने जो प्रतिभावान विद्वानों, वैज्ञानिकों एवं विश्व के निवेशकों के लिए सर्वोत्तम हो; ऐसा राष्ट्र बने जहां सभी को सर्वोत्तम स्वास्थ्य परिचर्या उपलब्ध हों; एक ऐसा राष्ट्र बने जहां का प्रशासन उत्तरदायी, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त हो; जहां गरीबी को पूरी तरह से मिटा दिया गया हो; निरक्षरता मिटा दी गई हो, जहां महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध न होता हो और जहां समाज से कोई भी व्यक्ति अलग-थलग महसूस न करता हो।

इसमें संपन्न, आतंक रहित स्वस्थ एवं सुरक्षित राष्ट्र की परिकल्पना की गई है। ऐसा शांतिपूर्ण और खुशहाल राष्ट्र बने जो सतत विकास के पथ पर अग्रसर हो और रहने के लिए सर्वोत्तम स्थान हो और जिसे अपने नेतृत्व पर गर्व महसूस हो।

डा. कलाम ने जिस भारत का स्वप्न देखा था, उसे प्राप्त करने के लिए उन्होंने 1) कृषि और खाद्य प्रसंस्करण; 2) शिक्षा और स्वास्थ्य परिचर्या; 3) सूचना और संचार प्रौद्योगिकी; 4) पी यू आर ए -अर्थात् ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुख सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाना स्कीम के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों हेतु अवसंरचना विकास जिसमें विश्वसनीय गुणवत्तायुक्त विद्युत, भूतल परिवहन और अवसंरचना शामिल है; और 5) जटिल प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता जैसे पांच महत्वपूर्ण सक्षमतायुक्त क्षेत्रों के लिए एकीकृत कार्य योजना प्रस्तुत की थी।

डा. कलाम उस विरल श्रेणी के राजनेता थे जिन्होंने कभी न तो धन-दौलत की चिन्ता की और न ही सत्ता की, और वे सदैव विनम्रता के साथ ऊँचे पद पर आसीन रहे। वे एक सृजनशील नेता थे, जिन्होंने विकासपरक नीतियों की उस राह को चुना जिसे अभी तक खोजा नहीं गया था। जो व्यक्ति उनके साथ जुड़े, उन्हें वे अपने साथ लेकर चले और उन्होंने इस विजन को साकार रूप में प्रदान करने के लिए उनकी समस्त योग्यता, बुद्धिमता और सृजनशीलता का उपयोग किया।

वे हमेशा कहा करते थे कि युवाओं के दैदीप्यमान मस्तिष्क 'मैं इसे कर सकता हूँ' की भावना और "भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा" के विश्वास से उत्साहित हैं। यह अनुभव और भावना भारत की उस युवा शक्ति को प्रेरित करते रहते हैं, जो डा. कलाम को हमेशा प्रेरक पुरूष के रूप में देखता है।

केवल एक पखवाड़ा पहले ही हमने देश की स्वाधीनता की 70वीं वर्षगांठ मनाई थी। अब हम भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।

यद्यपि, हम कृषि से लेकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी तक विभिन्न क्षेत्रों में पिछले सात दशकों के दौरान की गई प्रगति पर तर्कसंगत रूप से गर्व कर सकते हैं तथापि यह प्रश्न पूछे जाने की जरूरत है कि क्या हम इससे बेहतर कर सकते थे? भारत की वास्तविक क्षमता क्या है, क्या हमने भारत की पूरी क्षमता का दोहन कर लिया है?

ऐसी संपत्ति को सृजित करने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जो नवोन्मेषी हो, विकास की शक्ति को उजागर करे। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां देश के लोगों की मानसिकता को बदलना होगा। रचनात्मक होना देश के महान सपूत डा. अब्दुल कलाम के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संसद, विधानसभाओं और अन्य निकायों को भी प्रभावी ढ़ंग से कार्य करना होगा ताकि प्रत्येक व्यक्ति की सर्वोत्तम क्षमता का लाभ मिल सके। और तब देश को आगे ले जाने और अच्छे कानून, अच्छे विधान बनाने का सामूहिक रूप से दृढ़निश्चय करना होगा।

आतंकवाद समाज के लिए एक बड़ी समस्या है। आतंक का कोई धर्म नहीं होता। दुर्भाग्यवश कुछ लोग आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ रहे हैं, कोई धर्म आतंकवाद का समर्थन नहीं करता है। कोई धर्म आतंकवाद का उपदेश नहीं देता और कोई धर्म आतंकवाद को स्वीकार नहीं करता है।

इन प्रश्नों से ऐसे प्रत्येक भारतीय की अंतरात्मा व्याकुल हो जानी चाहिए, जो एक समृद्ध और फलते-फूलते नए भारत को देखना चाहते हैं,जहां प्रत्येक क्षेत्र - चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य रक्षा या शासन हो- में उत्कृष्टता की कसौटी होनी चाहिए। जी हाँ, हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डा. भीमराव अम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डा. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा परिकल्पित भारत का निर्माण कर सकते हैं जहां किसी को किसी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े, जहां शहरी-ग्रामीण का कोई विभाजन न हो, जहां किसान सम्पन्न हो, जहां महिलाओं का सम्मान किया जाए और वे प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों के साथ समान रूप से प्रतिस्पर्धा करें और जहां सबसे निचले स्तर के गरीब का उत्थान हो सके। पंक्ति में सबसे अंत में बैठे व्यक्ति को अपना हक मिलना चाहिए।

जी हां, इसे हासिल किया जा सकता है जब सभी भारतीय सामूहिक और अलग-अलग रूप से संकीर्ण, स्वार्थी मानसिकता से ऊपर उठेंगे और गरीबी, भ्रष्टाचार, निरक्षरता, साम्प्रदायिकता, क्षेत्रवाद और ऐसे किसी भी विचार जो देश को पीछे की ओर खींचता हो, को समाप्त करने के लिए समर्पण और उद्देश्यपूर्ण जोश के साथ कार्य करने की शपथ लेंगे। भ्रष्टाचार, सरकार और समाज दोनों के समक्ष एक प्रमुख नासूर के रूप में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस नासूर को जड़ से समाप्त करना होगा। पवित्र कुरान में सुरा अल बकारा 205 में उल्लेख है कि ईश्वर को भ्रष्टाचार पसंद नहीं है।

यहां मैं इस बात पर भी ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि यद्यपि आम तौर पर इस्लाम का अर्थ "अधीनता" बताया जाता है, अरबी भाषा में इस्लाम शब्द की व्युत्पत्ति "सलाम" से हुई है जिसका अर्थ है शांति। सभी धर्म शांति और भाईचारे का पाठ पढ़ाते हैं, जो किसी समाज या राष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए दो पूर्वापेक्षाएं हैं। सुरा अलमा'इदाह-48 में बताया गया है कि अच्छे कार्य करने में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए...अत: नेकी में प्रतिस्पर्धा कीजिए। इस संदेश की भावना एक पुनरूत्थानशील भारत के निर्माण में सभी व्यक्तियों के प्रत्येक कार्य में व्याप्त होनी चाहिए।

एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अब अपनी युवा जनसंख्या की ऊर्जा को उजागर करने और एक नये और पुनरूत्थानशील भारत के निर्माण में कोई देरी बर्दाश्त नहीं कर सकता है। ज्ञान और प्रौद्योगिकी द्वारा धन के सृजन को गति देने और विकास की गति को तेज करने के लिए अनुसंधान और नवोन्मेषण पर ध्यान केन्द्रित किया जाना चाहिए और शिक्षा-क्षेत्र और उद्योग के बीच मजबूत संपर्क स्थापित किये जाने चाहिए।

इसी के साथ, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु किसान के लिए कृषि को सतत और लाभप्रद बनाना होगा। राष्ट्रपिता के 'रामराज्य' के स्वप्न को केवल तभी साकार किया जा सकता है जब 'ग्रामराज्य' आए। इसे प्राप्त करने के लिए, संसद से पंचायत तक सभी को 'नए भारत' के निर्माण की दिशा में एकचित्त समर्पण की भावना के साथ कार्य करना होगा।

जन प्रतिनिधियों का व्यवहार अनुकरणीय होना चाहिए और उन्हें दूसरों के लिए आदर्श के रूप में कार्य करना चाहिए। संसद या विधानसभाओं में व्यवधान डालना एक दिन के लिए मुख्य समाचार बन सकता है परंतु यदि इस अपकारी प्रवृति को रोका नहीं गया तो जनता और लोकतंत्र को नुकसान होगा। देश के विकास में बाधा डालने की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती है - आगे बढ़ने का मूल मंत्र चर्चा करना, वाद-विवाद करना, निर्णय लेना होना चाहिए न कि व्यवधान डालना।

मित्रों, अपनी बात समाप्त करते हुए, मैं चाहूंगा कि देश का प्रत्येक नागरिक भावी पीढ़ी के बारे में सोचे और सुनिश्चित करे कि हमारी भावी पीढ़ियों को एक सुन्दर, उदार, हरा-भरा और जीवन अनुकूल ग्रह विरासत में मिले।
धन्यवाद, जय हिन्द!