29 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली में योनेक्स सनराइज डा. अखिलेश दास गुप्ता इंडिया ओपन बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन सुपर सीरीज वर्ल्ड टूर का उद्घाटन करने तथा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान करने के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा

New Delhi | जनवरी 29, 2018

“'योनेक्स सनराइज डा. अखिलेश दास गुप्ता इंडिया ओपन बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन सुपर सीरीज वर्ल्ड टूर' का उद्घाटन करते हुए और श्री प्रकाश पादुकोण को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

मैं इस आयोजन को सर्वाधिक मंगलमय अवसरों में से एक मानता हूँ। हाँ, आने इसे सही सुना। मैंने "मंगलमय" कहा क्योंकि मैं मानता हूँ कि राष्ट्र निर्माण एक महान यज्ञ है।

राष्ट्र निर्माण के यज्ञ की "पवित्र अग्नि" एक अरब से अधिक आत्माओं की लालसाओं, भावनाओं और उत्पाह का प्रखर समावेश है जो कतिपय अवसरों पर भारत की एकल धड़कन में एक साथ धड़कते हैं। खेल एक ऐसा क्षेत्र है जो इन अवसरों के लिए योगदान करता है। ऐसे अवसर पवित्र अग्नि हैं जो इस राष्ट्र को तब समाहित करता है जब हमारे अपने बेटे और बेटियां विश्व विजेता प्रतियोगिताओं में हमारा प्रतिनिधित्व करते हैं।

कुछ लोग इसे सामूहिक उन्मत्तता कह सकते हैं परंतु मैं इसे पवित्र अग्नि कहना चाहता हूँ।

यह अग्नि पवित्र और मंगलमय है क्योंकि यह कवि गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा उल्लिखित विख्यात "संकीर्ण घरेलू दीवारों" (नैरो डोमेस्टिक वॉल्स) को पार करने के लिए समाज की आत्मा को शुद्ध करती है।

इस प्रकार, खेल के क्षेत्र में इस महान देश का प्रत्येक बेटा और बेटी भारतीयता की भावना को जगाने और राष्ट्र निर्माण का नेतृत्व करने में सहायक हो सकता है। भारत के इतिहास में पहले से कही ज्यादा खेल न केवल भारतीयता की भावना को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर राष्ट्र निर्माण में बल्कि सुविधाओं और अवसंरचनाओं के निर्माण में भी अपना योगदान कर सकते हैं।

विश्व की सर्वाधिक युवा आबादी आज भारत में है। इसके साथ-साथ प्रौद्योगिकी में हुई अत्यधिक प्रगति, सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई क्रांति तथा सोशल मीडिया के साथ हमारे देश में राष्ट्र निर्माण में खेल की भूमिका में और अधिक वृद्धि होगी।

यद्यपि, साथ ही हमें इस बात को मान लेना चाहिए कि एक ही समय पर प्रत्येक खेल समान लोकप्रियता प्राप्त नहीं कर सकता है। प्रत्येक खेल का अपना समय और स्थान होता है। शायद जैसीकि कहावत है कि 'जब समय आता है, तो मनुष्य आता है' (कमेथ द आवर, कमेथ द मैन) इसका कारण हो। कुछ व्यक्तित्व खेल को और साथ ही खेल की लोकप्रियता को भी नई उँचाइयों तक ले जाते हैं। हमने क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों तथा मुक्केबाजी, बिलियर्ड, फेंसिंग, निशानेबाजी और तीरंदाजी सहित एथलेटिक्स में ऐसे अग्रणी खिलाड़ी देखे हैं।

इस प्रकार, प्रत्येक खेल का अपना समय होता है। अब, हम सभी को इस बात के लिए प्रसन्न होना चहिए कि बैडमिंटन की लोकप्रियता कायम है और यह देश के शीर्ष खलों में से एक है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह स्थिति काफी समय तक जारी रहेगी।

खेलों में बैडमिंटन का एक अद्वितीय स्थान है। एक तकनीकी खेल होने के कारण इसके लिए अच्छे शारीरिक समन्वय और जटिल रैकेट संचालनों को विकसित करना अपेक्षित होता है। खेल के उच्चतम स्तर पर बैडमिंटन के लिए अत्यधिक चुस्त-दुरूस्त होना जरूरी है: खिलाड़ियों के लिए एरोबिक क्षमता, स्फूर्ति, शक्ति, गति और नियम निष्ठता आवश्यक है।

इस पृष्ठभूमि में, यह वास्तव में प्रशंसनीय है कि डा. हिमंत विश्वशर्मा के नेतृत्व में भारतीय बैडमिंटन एसोशिएसन (बीएआई) की ओर से भारतीय खेलों के महान अग्रणी खिलाड़ियों में से एक श्री प्रकाश पादुकोण का जो सत्तर और अस्सी के बाद के दशकों में अत्यंत लोकप्रिय थे, आदर और सम्मान किया जा रहा है।

नि:संदेह केन्द्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों के पास द्रोणाचार्य, अर्जुन और पद्दम सम्मानों समेत विभिन्न सम्मानों के माध्यम से खेलकूद के व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए नीतियां हैं। परन्तु ऐसे प्रयास करने हेतु भारतीय बैडमिंटन एसोशिएसन की पहल भारतीय बैडमिंटन के प्रति इसके समर्पण के बारे में बहुत कुछ वर्णन करती है।

श्री प्रकाश पादुकोण देश के सभी महत्वाकांक्षी खिलाड़ियों और महिलाओं के लिए महती प्रेरणा हैं। श्री पादुकोण कर्णाटक में पादुकोण गांव के हैं और पच्चीस वर्ष की अवस्था में बैडमिंटन में विश्व रैंकिंग में नंबर - 1 की स्थिति प्राप्त करना वस्तुत: उनकी अद्वितीय उपलब्धि है। उन्होंने 1978 में कनाडा में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। वह डेनिश ओपन, स्वीडीश ओपन और मार्च 1980 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के भी विजेता थे। यद्यपि खेल अवसरंचना और सुविधाएं तीन दशक पूर्व उतनी विकसित नहीं थी जितनी आज हैं, फिर भी श्री पादुकोण ने केवल उत्साह और दृढ़ संकल्प से ही भारत को सम्मान दिलाया।

इसके अतिरिक्त उनका अदभ्य उत्साह, आवेग और भारतीय बैडमिंटन के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ। वह भारतीय टीमों के कोच के रूप राष्ट्र की सेवा करते रहे। इसके बाद, उन्होंने एक बैडमिंटन अकादमी की सह-स्थापना की जो वर्तमान में बंगलोर और मुम्बई में टाटा पादुकोण बैडमिंटन केन्द्र चलाता है। वह बैडमिंटन में दूसरी पीढ़ी के अग्रणी खिलाड़ियो को तैयार करने संबंधी अपने मिशन में भी सफल रहे हैं।

श्री गोपीचंद जैसे उनके छात्रों में से कुछ इस उद्देश्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। उनमें से प्रत्येक हमारे गर्व, आशा और संभावना के पात्र रहे हैं। अब हमारे पास बैडमिंटन के उभरते सितारों की तीसरी पीढ़ी है और उनमें से कुछ आज यहां हमारे बीच मौजूद हैं। इस प्रकार यह कार्यक्रम भारतीय बैडमिंटन के लिए शुभ संकेत है। यह अतीत और वर्तमान के सभी बैडमिंटन खिलाड़ियों के प्रति भी सम्मान है।

ऐसा कहते हुए मुझे भारत के युवा आदर्श स्वामी विवेकानंद का उद्धरण याद आ रहा है .... "कुछ पूरे हृदय से जुड़े, ईमानदार और उत्साही पुरुष और स्त्री एक वर्ष में एक सदी से जुटी भीड़ से अधिक कर सकते हैं।"

मैं उन सभी लोगों को अपना सम्मान देना चाहूंगा जिन्होंने भारतीय खेलों में अपना योगदान दिया है। इन सभी उपलब्धियों ने विश्व के बैडमिंटन मंच पर हमें वहां पहुंचाया जहां आज हम हैं।

भारतीय ओपन आठ वर्ष पूर्व विश्व बैडमिंटन फेडरेशन द्वारा सर्वप्रथम दिया गया था और अब यह वर्ल्ड टूर सर्किट का हिस्सा है। हमें यह जानकर गर्व महसूस होता है कि दिल्ली में चल रहा चैंपियनशिप वर्ल्ड टूर आयोजन का हिस्सा है। इसका तात्पर्य यह है कि यह विश्व के बारह महत्वपूर्ण टूर्नांमेंटों में से एक है और यह खिलाड़ियों को प्वाइंट देता जो उन्हें विश्व रैंकिंग में नंबर प्रदान करने में सहायक होगा। यह हम सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए महान अवसर है।

इस प्रकार में होनहार, खिलने वाले और चमकने वाले भारतीय युवाओं के साथ देश के लिए बैडमिंटन में महान भविष्य देखता हूँ। मुझे कोई संदेह नहीं है कि आप सभी के और भारतीय बैडमिंटन एसोशिएसन के प्रयास विश्व बैडमिंटन में भारतीयों को नंबर एक बनाने में दूरगामी होंगे।

मैं भारतीय बैडमिंटन एसोशिएसन और इसके अध्यक्ष डा. हिमंत विश्वशर्मा और उनके सभी साथियों धन्यवाद देता हूँ। भारतीय बैडमिंटन एसोशिएसन, सभी बैडमिंटन खिलाड़ियों और श्री प्रकाश पादुकोण को मेरी शुभकामनाएं। मैं दिल्ली में योनेक्स सनराइज डा. एडीजी इंडिया ओपन बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज वर्ल्ड टूर के प्रतिभागियों और आयोजकों को सफलता की शुभकामना भी देता हूँ।

इन शब्दों के साथ में 'इंडिया ओपन बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज वर्ल्ड टूर' के शुरू होने की घोषणा करता हूँ।'

जय हिंद!”