28 मई, 2018 को जम्मू, जम्मू-कश्मीर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन के वैज्ञानिकों, छात्रों तथा कर्मचारियों को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

जम्मू, जम्मू और कश्मीर | मई 28, 2018

"मानव सभ्यता कई सहस्राब्दियों के दौरान प्रश्न पूछने और उनके उत्तर ढूंढने के माध्यम से विकसित हुई है I प्रश्न पूछने और उनके उत्तर ढूंढने की यह प्रक्रिया अनुसंधान के केंद्र में निहित हैI हमारे चारों ओर के विश्व की अपेक्षाकृत और गहरी समझ की इस इच्छा के बिना मानव प्रगति संभव नहीं है I अनुसंधान और नवोन्मेषण से हमारा विकास होता है I वे उस विश्व को बदल डालते हैं जिसमें हम रहते हैं I

वस्तुतः अनुसंधान की इस प्रवृत्ति हमारी शिक्षा व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिएI बच्चों और युवा वयस्कों को प्रश्न पूछने और उनके उत्तर ढूंढने हेतु प्रोत्साहित करना होगाI शिक्षा के लिए भारतीय शब्द "विद्या" है I

इसका अक्षरशः अर्थ है , "जो है उसे जानना"I कृपया ध्यान दीजिये यहाँ जो है उसे "जानने" पर बल दिया गया है उसे "सिखाये जाने" पर नहीं I सीखने वालों को सक्रिय अन्वेषक, अनुसंधानकर्ता बनना होगा जो सच का पता लगाने की कोशिश करते हैं I

अनुसंधान की गुणवत्ता किसी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण सूचक होता हैI

किसी देश के संसाधन संस्थानों में अनुसंधान की गुणवत्ता उस देश के विकास की गति का निर्धारण करती है I संगत प्रश्न पूछना और उत्तर ढूँढना जीवन शैली होनी चाहिएI

यदि हम अपने देश को एक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में, एक ऐसे देश के रूप में परिवर्तित करना चाहते हैं जो लोगों के जीवन को बदलने के लिए ज्ञान की शक्ति का उपयोग करता है, तो हमें अनुसंधान पर और अधिक ध्यान देना होगा I अनुसंधान मानव प्रगति को प्रेरित करता है। यह राष्ट्र के विकास का आधार है I परन्तु अनुसंधान को विकास में परिवर्तित किया जाना चाहिएI

स्वास्थ्य परिचर्या से सम्बंधित मुद्दों के प्रति एक समेकित रवैया, लोगों के हित के लिए सभी चिकित्सा प्रणालियों का प्रभावी उपयोग करना हमारे रुख का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैI विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के मामले में भारतीय चिकित्सा प्रणाली अत्यंत सुदृढ़ है, जिन्हें आजकल एलॉपेथी का प्रभावी विकल्प माना जा रहा हैI

इस समेकित रुख के बारे में बात करते हुए मुझे हमारे देश में विज्ञान और प्रोद्योगिकी की नींव रखने के मामले में हमारे प्रथम प्रधान मंत्री के योगदान की याद आ जाती है I हमने कल उनकी पुण्यतिथि मनाई हैI मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ I

नेहरु जी ने यह गहराई से महसूस किया कि हमारे देश के लाखों लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने हेतु राष्ट्रीय योजना के साथ विज्ञान और प्रोद्योगिकी का एकीकरण करने की आवश्यकता है I

डा. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी , स्वतंत्र भारत में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के प्रथम उपाध्यक्ष थे I

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने उनका जन्मशताब्दी वर्ष (2000) मनाने हेतु श्रद्धांजलि स्वरुप "डा. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी (एसपीएम) फ़ेलोशिप" नामक एक विशेष अध्येतावृत्ति भी शुरू की है I

प्रत्येक धर्म उसके अनुयायियों द्वारा अनुपालन हेतु मूल्यों और नैतिक आदेशों का एक निकाय है I इस 'अनुशासनात्मक शक्ति' और 'आचार संहिता' के बिना, इतने बड़े पैमाने पर 'सामजिक सुव्यवस्था' लागू करना मुश्किल होगा I

वैज्ञानिक प्रगति के परिणामस्वरूप मानवजाति के समक्ष परमाणु युद्ध, जैविक हथियार, भारी विनाश के अन्य साधन और प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन के गंभीर मुद्दों जैसी कई चुनौतियां उपस्थित हो गयी हैं I परन्तु यह विज्ञान और वैज्ञानिक खोज के परित्याग का कोई कारण नहीं है I

वैज्ञानिक प्रगति ब्रह्माण्ड के सम्बन्ध में हमारी समझबूझ को संवर्धित कर सकती है I परन्तु धर्म ही अनन्वेषित ब्रह्माण्ड के सम्बन्ध में उत्तर प्रदान करता है I यह विशाल अनन्वेषित ब्रह्माण्ड 'मन और आत्मा' से सम्बंधित मुद्दे और अनवरत आतंरिक व्याकुलता और आतंरिक शांति की कमी से बना है I धर्म ही इन ज्वलंत मुद्दों के लिए कुछ उत्तर प्रदान करता है I

नेहरु जी का दृष्टिकोण उन्हें 'अनीश्वरवादी' बना सकता है और कुछ लोग उन्हें 'नास्तिक' भी कह सकते हैं I वैज्ञानिक और वैज्ञानिक भावना के पक्ष को बढ़ावा देने के लिए नेहरु जी को श्रद्धांजलि देते हुए मैं धर्म और मानवजाति के लिए उसकी उपयोगिता के मामले में विनम्रतापूर्वक उनसे असहमति व्यक्त करता हूँ I

मुझे लगता है कि सम्पन्नता और आतंरिक शांति की खोज के लिए मनुष्य के पास विज्ञान और धर्म दो साधन हैं I

मुझे भारतीय समवेत औषध संस्थान का दौरा करके और यहाँ के वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों तथा जम्मू क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के साथ बात करके वास्तव में बहुत ख़ुशी हुई I

मुझे यह जानकार ख़ुशी हुई कि यह हमारे देश के प्राचीनतम संस्थानों में से एक है I वर्ष 1941 में स्थापित यह संस्थान हमारे देश के वैज्ञानिक और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन प्रदान करने के मामले में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है I वस्तुतः, यह जम्मू और कश्मीर सरकार के तत्वावधान में औषध अनुसंधान प्रयोगशाला (डीआरएल) के रूप में देश में स्थापित प्राकृतिक संसाधनों से औषधि के विकास से संबंधित पहला रूपान्तरणकर्ता संस्थान है I कर्नल सर राम नाथ चोपड़ा, जिन्होंने एक अनुसंधान और विनिर्माण इकाई के रूप में डीआरएल की संकल्पना करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसके संस्थापक अध्यक्ष थे I

मुझे यह बताया गया कि डीआरएल द्वारा शुरू किये गए अनुसंधानों का भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने उदारतापूर्वक समर्थन किया I डीआरएल के अनुसंधान आउटपुट के आधार पर विनिर्माण संबंधी खंड एक पृथक वाणिज्यिक इकाई के रूप में विकसित किया गया था I

मुझे यह देखकर ख़ुशी हुई कि एक अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में डीआरएल ने सबसे पहले आबद्ध पैदावार की अवधारणा प्रस्तुत की I यह एक्टिव प्रिंसिपल्स को देशी औषधीय जड़ी-बूटियों से अलग करने वाला और प्रयोगशाला के जानवरों पर औषधीय प्रतिक्रिया पर काम करने वाला पहला संस्थान भी था I मुझे बताया गया कि इस संस्थान ने उच्चरक्तचाप, चर्म रोग और जठरांत्रीय रोगों के संबंध में महत्वपूर्ण भारतीय औषधीय जड़ी बूटियों पर विस्तृत नैदानिक अध्ययन भी किये I

जैसा कि हम सब जानते हैं, विज्ञान ने हमारे महान राष्ट्र के विकास में एक बड़ी भूमिका निभाई है और अन्य क्षेत्रों के साथ साथ सस्ती दवाइयों, खाद्य सुरक्षा, दुग्ध उत्पादन, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां इस तथ्य की पुष्टि करती हैं I भारत अंतरिक्ष और सूचना प्रोद्योगिकी के मामले में अग्रणी राष्ट्रों में से एक है I यहाँ इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि इस संस्थान के संस्थापक, सर राम नाथ चोपड़ा ने स्वतंत्र भारत के औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम और नियम बनाने में बड़ी भूमिका निभाई I उन्होंने आधुनिक आयुर्विज्ञान में आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के ज्ञान को शामिल करने हेतु चिकित्सा के एक समेकित विषय का सृजन करने में सहायता की और इस प्रकार प्राचीन भारतीय ज्ञान को विश्व में मान्यता प्रदान किया जाना सुनिश्चित किया I

भारत के स्वंतत्र होने के बाद, दिसम्बर 1957 में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने औपचारिक रूप से डीआरएल का अधिग्रहण किया और क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में उसका फिर से नामकरण किया I

मुझे यह देखकर ख़ुशी हुई कि इस प्रयोगशाला ने अपनी अनुसंधान संबंधी पहलों को विस्तार प्रदान किया है जिसमें जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और प्रोद्योगिकीय विज्ञान (खाद्य, फर और ऊन, सरफेस कोटिंग और पेपर सेल्युलोज पल्प) को शामिल किया है I मुझे पता है कि प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित औषधियों की खोज के क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण ताकत को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2007 में इस संस्थान के अधिदेश को पुनः परिभाषित किया गया और इसका नाम बदलकर भारतीय समवेत औषध संस्थान रख दिया गया I

विगत कई वर्षों के दौरान पूर्ववर्ती क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला की विभिन्न उपलब्धियां सराहनीय रहीं जैसे वर्ष 1958 में भारत में पुदीने की खेती शुरु करना I इस समय दो लाख हेक्टेयर भूमि पर इस फसल की खेती की जा रही है जिसका वार्षिक कारोबार 4000 करोड़ रूपये का है I अन्य प्रशंसनीय पहलों में घरेलु मद्यनिर्माणशाला उद्योग की मांग को पूरा करने हेतु भारत में हॉप्स शुरू करना; जम्मू और कश्मीर में 300 हेक्टेयर भूक्षेत्र में अधिक मूल्य वाले वाणिज्यिक फसलों के रूप में लैवेंडर और गुलाब की खेती शुरू करना शामिल है और इस प्रकार 9000 से अधिक लोगों के लिए रोज़गार का सृजन करना I

मुझे बताया गया है कि पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों के वैज्ञानिक विधिमान्यकरण द्वारा इस प्रयोगशाला ने रिसोरिन (तपेदिक रोधक), सलाकी (आमवात के लिए), लिवज़ोन और लिव-1 (हेपेटाइटिस रोधी) और इम्मिनेक्स (इम्म्युनो -मॉड्युलेटर) आदि नामक दवाइयां विकसित की हैं I साथ ही इस संस्थान द्वारा विकसित किण्वन प्रौद्योगिकियों को कई उद्योगों में ग्लूकोनेट साल्ट्स, जैव उर्वरक और बायो कण्ट्रोल एजेंट्स के उत्पादन हेतु अंतरित किया गया थाI

मुझे यह जानकार बहुत ख़ुशी हुई कि इस संस्थान ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलें की हैं ---अरोमा मिशन : इस मिशन का लक्ष्य विशेष रूप से देश भर के वर्षा सिंचित/निम्नीकृत भूमि को ध्यान में रखते हुए 5000 हेक्टेयर से भी अधिक अतिरिक्त क्षेत्र को सुगन्धित नकदी फसलों की आबद्ध खेती के अंतर्गत लाना है I इसका उद्देश्य किसानों/फसल उत्पादकों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी बाय बैक तंत्र बनाने में सहायता करने के अलावा देश भर के किसानों/फसल उत्पादकों को आसवन और मूल्यवर्धन के लिए तकनीकी और अवसंरचनात्मक समर्थन प्रदान करना भी है I

मुझे ख़ुशी है कि यह वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था में गंध तेल और सुगन्धित उपदानों के एकीकरण के लिए इन्हें मूल्य वर्धन प्रदान करने की परिकल्पना करता है I

मुझे यह जानकार उतनी ही ख़ुशी हुई कि फाईटोफार्मा मिशन का लक्ष्य आयुर्वेद के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए वनस्पति-आधारित दवाइयों का विकास करना और बहु-लक्षीय रुख और औषधीय नेटवर्क के माध्यम से कीमती, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त औषधीय वनस्पतियों सहित आयुर्वेदिक दवाइयों को उनका स्थान दिलाना है I

तीसरे मिशन, सिकल सेल एनीमिया मिशन का लक्ष्य देशी वनस्पतियों का उपयोग करते हुए सिकल सेल एनीमिया के लिए औषधियों की खोज और नए निदान पूर्व उम्मीदवार तैयार करना है I

मुझे यह देखकर ख़ुशी हुई कि यह संस्थान भारत की औषध विनियामक प्रणाली का समर्थन करने में एक बड़ी भूमिका भी निभा रही है I जड़ी बूटियों पर आधारित दवाइयों का निष्कर्षण और उन्हें तैयार करने के लिए विश्व स्वस्थ संगठन के दिशानिर्देशों का अनुपालन करने वाली सीजीएमपी प्लांट, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता आश्वासन सुविधा, औषध परीक्षण प्रयोगशाला तथा जीएलपी स्टैण्डर्ड एनिमल हाउस की उपलब्धता और भारतीय समवेत औषध संस्थान को डीसीजी(आई) द्वारा वानस्पतिक और फाईटोफार्मास्युटिकल दवाओं के लिए केन्द्रीय औषध प्रयोगशाला और और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा रेफेरल लैब के रूप में मान्यता प्रदान करने से इसके लिए उचित प्रकार का पारिस्थितिकी तंत्र बनता है I

मुझे ख़ुशी है कि इस संस्थान ने जम्मू और कश्मीर के युवाओं के लिए रोज़गार के सृजन और उद्यमिता विकास तथा जम्मू और कश्मीर के प्रचुर जैव संसाधनों का उपयोग करते हुए स्टार्टअप कंपनियो के लिए उचित पारिस्थितिकी तंत्र का सृजन करने के उद्देश्य से एक टेक्नोलॉजी बिज़नेस इनक्यूबेटर शुरू किया है I मुझे यह देखकर ख़ुशी है कि भारतीय समवेत औषध संस्थान के परिसर के भीतर कई ऐसे स्टार्टअप हैं जो इस समय विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित इस पहल के अंतर्गत पनप रहे हैं I

यह जानकर ख़ुशी होती है कि इस संस्थान में कर्करोग विज्ञान, गठिया, यकृत सुरक्षा, तपेदिक, अल्ज्हेमर्स और पेप्टिक अलसर के क्षेत्रों में सुदृढ औषधि विकास तंत्र है I मुझे इस बात की भी ख़ुशी है कि यह इस सुन्दर राज्य में औद्योगिक जैव-प्रोद्योगिकीय पार्क स्थापित करने में भी जम्मू और कश्मीर के विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग की सहायता कर रहा है I

हमें पाकिस्तान के साथ बातचीत की इच्छा रखनी चाहिए परन्तु उसे आतंक का समर्थन, उसे सहायता, बढ़ावा और प्रशिक्षण प्रदान करना बंद करना होगा I राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता के मामलों में शून्य सहिष्णुता होनी चाहिएI

पाकिस्तान को आतंक के प्रशिक्षण हेतु अपने भूक्षेत्र का उपयोग नहीं करने देने संबधी अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करना चाहिएI

प्रगति के लिए शान्ति पूर्वापेक्षित हैI यदि सीमा पर तनाव हो तो हम विकासात्मक कार्यकलापों पर ध्यान नहीं दे सकते हैंI केंद्र/राज्य सरकार द्वारा एक लाख करोड़ रुपये की लागत पर चलायी जा रही विकासात्मक गतिविधियों के लाभ अनिवार्य रूप से लोगों तक पहुँचने चाहिए I

अंत में, अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं चाहता हूँ कि आप मधुमेह और मलेरिया, चिकुनगुनिया और डेंगु जैसी बीमारियों पर और ज्यादा ध्यान दें ताकि औषधियों की खोज से सम्बंधित आपके अनुसंधान से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हों I

जय हिन्द!"