28 दिसंबर, 2017 को नई दिल्ली में लोक सभा के वर्ष 2018 के कैलेण्डर का विमोचन करने के उपरांत भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

नई दिल्ली | दिसम्बर 28, 2017

"भारतीय संसदीय समूह की वार्षिक आम बैठक के अवसर पर और वर्ष 2018 के लिए लोकसभा कैलेंडर का विमोचन करने के लिए मुझे यहां आप सभी के बीच होने की खुशी है।

अब से तीन दिन में हम एक नए साल में प्रवेश करेंगे, जो एक राष्ट्र के रूप में और व्यक्तियों के रूप भविष्य में होने वाली कई रोमांचक चीजों की उम्मीद से भरा होगा। मुझे आशा है कि वर्ष 2018 हमारे देश और दुनिया भर में सभी के लिए खुशी, समृद्धि, शांति और खुशी का समय लाएगा।

भारतीय संसदीय समूह (आईपीजी) अब से लगभग एक साल में अपने अस्तित्व के सात दशकों को पूरा करेगा। इसकी स्थापना के बाद से, इसने हमारी संसद और दुनिया की अन्य विभिन्न संसदों के बीच सेतु और संसदीय प्रतिनिधिमंडल, सद्भावना मिशन, पत्राचार, दस्तावेज आदि के सुगम आदान-प्रदान को बनाए रखने और सामयिक रुचि के संसदीय विषयों पर सम्मेलनों, सेमिनारों और संगोष्ठियों का आयोजन करने के मंच के रूप में कार्य किया है।

मुझे आशा है कि आज आईपीजी की इस वार्षिक आम बैठक में अपनी विभिन्न उपलब्धियों की समीक्षा करने, नई योजनाएं तैयार करने और आने वाले वर्ष के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करने का अवसर सुलभ होगा। ऐसी बैठक से सदस्यों में भविष्य में अपनी कार्यसूची को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता का संचार होता है। मैं आप सभी को एक उपयोगी चर्चा और सफल बैठक की शुभकामनाएं देता हूं।

चूंकि मैं 2018 के लिए लोकसभा कैलेंडर जारी करने जा रहा हूं, इसलिए मुझे पिछले दो दशकों में प्रत्येक आगामी वर्ष के लोक सभा कैलेंडर में चित्रित किए गए विभिन्न विषयों का स्मरण हो रहा है।

हाल के वर्षों में, वर्ष 2016 के कैलेंडर में संसदीय लोकतंत्र में हमारे निरंतर विश्वास का जश्न मनाने के लिए विभिन्न अवसरों पर शानदार ढंग से प्रकाशित संसद भवन को दर्शाया गया है। इसी तरह, 2017 के कैलेंडर में भव्य संसद भवन एस्टेट का प्रदर्शन किया जिसमें इसके आसपास की हरियाली पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस वर्ष का विषय अद्वितीय और प्रेरणादायक है। नए साल 2018 के कैलेंडर को संसद में आलीशान गुंबदों, मेहराबों, कक्षों और अन्य विभिन्न स्थानों पर उदार और प्रेरणादायक शब्दों और वाक्यों को लिखा और सुंदर ढंग से दर्शाया गया है। इन शिलालेखों में सारगर्भित संदेश, सार्वभौमिक और कालातीत हैं जो खुद के ज्ञान के दुर्लभ मोती हैं और हमारे इतिहास और दार्शनिक परंपराओं के एक प्रामाणिक स्रोत हैं।

यह संसद में है कि एक राष्ट्र की गतिविधियों की पूरी श्रृंखला पर चर्चा की गई है और इसकी नियति को आकार दिया और ढाला गया है। उस महान निकाय की चर्चा स्वाभाविक रूप से सत्य और न्यायपरायणता की सर्वोच्च परंपराओं से प्रेरित होनी चाहिए। ऋग्वेद, महाभारत, श्रीमद् भगवद गीता, पंचतंत्र और कौटिल्य के अर्थशास्त्र से उद्धरित संसद भवन में ये शिलालेख आगंतुकों को ऐसे कालातीत मूल्यों का ध्यान दिलाते हैं, जो देश की जीवन शैली का आधार हैं। मैं इस अवसर पर अपने पसंदीदा पुरालेख (ऋगवेद से ) का उल्लेख करना चाहूंगा, जो 2018 कैलेंडर में भी शामिल है।

अर्थ:

(आइए हम सब सभा में एकत्रित हों और एक आवाज से बोलें। हमारे विचारों में सहमति हो, हमारी मंत्रणा भी उसी दिशा में हों। सभा में सभी बराबर हों। हमारी बुद्धि एक जैसी हो और हमारे विचार भी एक हों। हमारी आशाएं और आकांक्षाएं एक जैसी हो जाएं और हमारे दिल एकजुट हो जाएं, ताकि हम सद्भाव और प्रसन्नता से जीवन जीए।)

इस विचार की गहराई और संसद सदस्यों को समाज में उन महान उपलब्धियों - उद्देश्य की एकता, शांति और सामाजिक सद्भाव, सभी के लिए खुशी - जो हमारी आकांक्षाएं हैं, को हासिल करने के लिए भावनात्मक और उद्देश्यपूर्ण ढ़ग से एकजुट होने की दी गई प्रेरणा को किसी भी कीमत पर गंवाया नहीं जा सकता है।

राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में, सभी सदस्यों को मेरी यह सच्ची सलाह होगी कि वे इस उद्धरण विशेष पर अधिक ध्यान दें।

अपनी बात पूरी करने से पहले, मैं माननीय लोक सभा अध्यक्ष, श्रीमती सुमित्रा महाजन जी की पहल की सराहना करता हूं जिनके दूरदर्शी मार्गदर्शन से इस सुंदर कैलेंडर का निर्माण संभव हुआ है। आज, हम हमारे - लैपटॉप, पीसी, मोबाइल, टैबलेट, आदि - की स्क्रीन पर वॉलपेपर लगाते हैं इन्हें अल्पावधि में बदला जा सकता है लेकिन यह कैलेंडर ऐसा "वॉलपेपर" होगा जो हम आने वाले वर्ष के लिए कई बार देखेंगे ।

इन शब्दों के साथ, मैं अब वर्ष 2018 के लिए लोक सभा कैलेंडर का विमोचन करता हूं।

मैं एक बार फिर से आपको और आपके परिवार के सदस्यों को अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि की शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद।"