28 जून, 2018 को किदवई कैंसर संस्थान, बैंगलुरु में नए राज्य कैंसर संस्थान ब्लॉक के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का भाषण

बैंगलुरु | जून 28, 2018

प्रिय बहनों और भाइयों,

सर्वप्रथम मैं कैंसर रोगियों को अद्यतन और सर्वोत्तम उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिष्ठित किदवई कैंसर संस्थान, बेंगलुरु में नए कैंसर संस्थान ब्लॉक की स्थापना की सराहना करता हूं।

कैंसर का निर्बाध और सतत फैलाव होने में देश भर में और अधिक विशिष्ट कैंसर उपचार सुविधाओं की आवश्यकता है।

यह वास्तव में हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर निवारक, उपचारात्मक और उपशामक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं, परंतु कैंसर के प्रसार से निपटने के लिए ये उपाय अत्यंत नगण्य प्रतीत हो रहे हैं।

प्रलेखित निष्कर्षों से कैंसर के प्रसार के विशाल परिमाण का पता चलता है, जिसके लिए न केवल वैज्ञानिक प्रयासों अपितु कैंसर नियंत्रण कार्यक्रमों की उचित योजना, निगरानी और मूल्यांकन के साथ-साथ निरंतर और लगातार प्रयासों की आवश्यकता है।

जबकि दुनिया में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, भारत जैसे विकासशील देशों में गत वर्षों के दौरान इसमें अत्यधिक तेजी से वृद्धि हुई है। भारत में, यह अनुमान लगाया गया है कि किसी विशिष्ट समय कैंसर के लगभग 30 लाख मामले हैं और प्रत्येक वर्ष 10 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत में कैंसर के कारण प्रति वर्ष लगभग 5 लाख मौतें होती हैं।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वर्ष 2016 के अनुमानों के अनुसार वर्ष 2020 तक नए मामलों की कुल संख्या 17.3 लाख तक पहुंचने की संभावना है। यह अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2020 तक कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या 8.8 लाख तक पहुंचने की संभावना है। महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम था जबकि पुरुषों में मुंह के कैंसर के मामले सबसे ज्यादा थे। स्पष्ट है कि यह एक प्रमुख स्वास्थ्य परिचर्या चुनौती है, जिसका पर्याप्त और प्रभावी तौर पर समाधान किए जाने की आवश्यकता है।

प्रिय बहनो और भाइयो,

भारत में कैंसर संबंधी आकड़ों से पता चलता है कि केवल 12.5 प्रतिशत रोगी ही बीमारी के प्रारंभिक चरणों में उपचार के लिए आते हैं। इससे स्पष्ट तौर पर अपेक्षाकृत और अधिक जागरुकता और प्रारंभिक स्तर पर पहचान किए जाने की आवश्यकता का पता चलता है।

किसी व्यक्ति की आनुवांशिक प्रकृति, पर्यावरण, आहार संबंधी आदतें, स्वच्छता और आधुनिक जीवन शैली लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर पंजीकरण कार्यक्रम से प्राप्त आंकड़ों से यह अनुमान लगाया गया है कि शहरी केन्द्रों में औसतन प्रत्येक 15 पुरुषों में से एक तथा प्रत्येक 12 महिलाओं में से एक महिला को अपने जीवन काल में कैंसर हो सकता है। इसलिए, प्रदूषण, मोटापे, तम्बाकू के हानिकारक उपयोग, पान सुपारी और शराब के खतरों, आराम परस्त जीवन शैली, जंकफूड और अन्य कैंसरकारी खाद्य पदार्थ खाने के संबंध में अपेक्षाकृत अधिक जागरुकता पैदा करना महत्वपूर्ण है। विशेष तौर पर ऐसे व्यक्तियों, जिनमें कैंसर विकसित होने का जोखिम है, की समय-समय पर जांच किया जाना भी समान रूप में महत्वपूर्ण है।

सटीक आंकड़े किसी समस्या की जटिलता और उसके विभिन्न आयामों को समझने में भी सहायक होते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि आईसीएमआर राष्ट्रीय आधार पर कैंसर को ध्यान देने योग्य बनाने का प्रयास कर रहा है जिसका उद्देश्य प्रमाणिक डाटा सृजन करना है ताकि कैंसर पर नियंत्रण के लिए उचित निदान, उपचार और लक्षित अंत:क्षेप किया जा सके। विश्वसनीय वैज्ञानिक आंकड़ों की उपलब्धता योजनाकारों और नीति निर्माताओं को कैंसर की प्रभावी रोकथाम संबंधी रणनीतियों का विकास करने में भी सहायता होती है। साथ ही, कैंसर रोकथाम अनुसंधान के क्षेत्र में संवर्धित निवेश किए जाने की आवश्यकता है।

मुझे प्रसन्नता है कि कर्णाटक सरकार ने पहले ही कैंसर को एक ध्यान देने योग्य रोग घोषित किया है। यह राज्य में बीमारी के परिमाण को उपयुक्त ढंग से समझने और बेहतर तथा अधिक लक्षित कैंसर परिचर्या नीति तैयार करने में काफी प्रभावी उपाय होगा।

जैसाकि मैंने पहले ही उल्लेख किया था, यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि अधिकांश कैंसर रोगी कैंसर उपचार केन्द्रों में तब आते हैं जब रोग अग्रिम चरण में होता है। जागरुकता की कमी और कई अन्य सामाजिक-आर्थिक कारक चिकित्सीय सहायता प्राप्त करने में विलंब का कारण हो सकते हैं।

जबकि कई शहरी क्षेत्रों में कैंसर अस्पताल और उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं, परंतु हमें ग्रामीण क्षेत्रों, जहां हमारी लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, में प्रारंभिक तौर पर पहचान करने, निदान, उपचार और उपशामक परिचर्या प्रदान करने के लिए कैंसर इकाईयों की स्थापना करने की आवश्यकता है। हमें चिकित्सा पद्धति के इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत और अधिक चिकित्सा एवं परा चिकित्सीय व्यावसायिों की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में शामिल सभी हितधारकों की मुख्य चिंता उपचार की लागत है। इस बात में कोई संदेह नहीं कि इष्टतम उपचार प्रदान करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षित जनशक्ति और उपकरणों हेतु अत्यधिक निवेश की आवश्यकता है, परंतु सरकार को ऐसे विभिन्न नीतिगत विकल्पों का पता लगाना चाहिए जिससे कैंसर का उपचार सस्ता हो सके।

यह नोट किया जाना चाहिए कि जीवन प्रत्याशा में वृद्धि से अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या के लिए कैंसर का जोखिम उत्पन्न हुआ है। इसलिए, कैंसर और संबंधित जोखिमों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक जागरुकता पैदा करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। निवारक पहलुओं और स्वस्थ जीवन शैली के संवर्धन पर पर्याप्त ध्यान देना होगा।

मुझे प्रसन्नता है कि विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों में ऑन्कोलॉजी स्कंधों की स्थापना हेतु उपाय प्रारंभ करने के अतिरिक्त केन्द्रीय सरकार ने अवसंरचना निर्माण, कैंसर के निदान और उपचार हेतु आधुनिकतम उपकरणों की अधिप्राप्ति के लिए पर्याप्त निधियां प्रदान करके कई क्षेत्रीय कैंसर केन्द्रों को राज्य कैंसर संस्थानों में उन्नयिव किया है। इस राष्ट्रीय पहल एक लाभार्थी कर्णाटक राज्य है, जिसने किदवई कैंसर संस्थान में कैंसर परिचर्या सुविधाओं का सफलतापूर्वक स्तरोन्नयन किया है।

यह अत्यधिक संतोष का विषय है कि यह संस्थान, जो गत चार दशकों से अस्तित्व में रहा है, देश में उपचार और अनुसंधान के लिए एक अग्रणी क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र के तौर पर उभर कर आया है। मुझे प्रसन्नता है कि यह संस्थान न केवल कर्णाटक के लोगों अपितु पूर्वोत्तर राज्यों सहित भारत के अन्य भागों के रोगियों की उपचार आवश्यकताओं को भी पूरा कर रहा है।

कोई भी वैज्ञानिक और चिकित्सा संस्थान उत्कृष्टता केन्द्र के तौर पर केवल तभी विकसित हो सकता है, यदि वह उस क्षेत्र में नवीनतम प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखे है।

इसके संकाय और कर्मचारियों को अपने ज्ञान और व्यावसायिक विशेषज्ञता को अद्यतन बनाए रखने का निरन्तर प्रयास करना चाहिए। उन्हें शोध कार्य जारी रखना चाहिए और इसे ज्ञान कोष में शामिल करना चाहिए।

प्रबंधकों द्वारा संस्थानिक आचारों को इस प्रकार आकार दिया जाना चाहिए कि रोगियों को मानवीय और देखभाल किए जाने वाले परिवेश में विश्व स्तरीय उपचार प्राप्त हो सके।

भौतिक अवसंरचना आवश्यक है और इसके आवधिक उन्नयन और नियमित रख-रखाव की आवश्यकता है।

मुझे प्रसन्नता है कि इस संस्थान ने रोबोटिक सर्जरी और हाई-टेक लीनियर एक्सीलिरेटर सुविधाओं के माध्यम से आधुनिकतम कैंसर उपचार प्रदान करने में बड़ी प्रगति की है, मुझे विश्वास है कि इससे बीमार गरीब कैंसर रोगियों और उनके परिवारों को कैंसर से लड़ने और पुन: बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

भौतिक अवसंरचना और उपकरणों के अतिरिक्त रोगियों के साथ संवाद स्थापित किया जाना महत्वपूर्ण है।

विशेष तौर पर कैंसर जैसे घातक रोग में रोगियों और परिवारों को आराम पहुंचाने की आवश्यकता होती है।

उन्हें प्रशामक देखभाल और उससे भी अधिक ऐसे दयालु शब्दों की आवश्यकता होती है, जो दर्द को सहन करने योग्य बनाते हैं।

सहानुभूति और धैर्य, परिचर्या और करुणा ऐसे गुण हैं, जो रोगियों के मन में आशा का संचार करते हैं और परेशान परिवारों के मस्तिष्क को शांति प्रदान करते हैं।

मुझे इस संस्थान के विकास और एक उत्कृष्टतम केन्द्र के तौर पर विकसित होते देखकर प्रसन्नता हो रही है। मैं प्रबंधन, चिकित्सकों और सम्पूर्ण कर्मचारियों को ऐसे व्यक्तियों की सेवा करने के लिए बधाई देता हूं जो चिकित्सा सहायता और सलाह के लिए आते हैं।

मैं कामना करता हूं कि आप सभी मानवता की सेवा करते हुए संतोषप्रद व्यवसायिक जीवन प्राप्त करें।

जय हिन्द।