26 सितंबर, 2017 को कोन्नुर ग्राम, गडग जिला, कर्णाटक में स्वच्छता ही सेवा और शुद्ध कुडियुवा नीरिना घटका परियोजना के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू का अभिभाषण।

कर्णाटक | सितम्बर 26, 2017

कर्णाटक के माननीय राज्यपाल श्री वजुभाई रुदाभाई वाला, भारत सरकार के पेयजल और स्वच्छता राज्य मंत्री श्री रमेश जिगाजिनागी, कर्णाटक सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री श्री एच.के. पाटिल, संसद सदस्य श्री पी.सी. गद्दीगौदर, माननीय विधायक श्री बी.आर. यवगल, भारत सरकार के सचिव, अन्य सम्मानित अतिथिगण, देवियो और सज्जनों।

मैं गडग जिले के नारगुंड ब्लॉक को 'स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े' और 'शौचालयक्कागी समारा' के हिस्से के रूप में घोषित किए जाने के अवसर पर कर्णाटक में आकर बहुत प्रसन्न हूं। मैं नारगुंड के निवासियों, जिला प्रशासन और कर्णाटक सरकार को बधाई देता हूं।

प्रत्येक भारतीय को धार्मिक भाव सरीखे उत्साह के साथ इस "जन आंदोलन" का हिस्सा बनना चाहिए ताकि 2 अक्तूबर, 2019, अर्थात महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक "स्वच्छ भारत" का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

गांधीजी ने सफाई और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी और उनका प्रसिद्ध कथन है कि "स्वच्छता राजनीतिक स्वतंत्रता की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है", उन्होंने यह भी बताया था कि "हमारे कई रोगों का कारण हमारे शौचालयों की स्थिति तथा मलमूत्र का कहीं भी और हर जगह निपटान करने की हमारी बुरी आदत है"।

मैंने गांधीजी द्वारा कही गई इन महत्वपूर्ण बातों को इसलिए याद किया है ताकि यह समझाया जा सके कि राष्ट्रपिता के सपने को 'स्वच्छ भारत अभियान' के माध्यम से तभी साकार किया जा सकता है यदि बड़ी हस्तियों से लेकर आम आदमी तक सभी लोग इसमें नि:स्वार्थ भाग लें और इसे सरकार द्वारा संचालित किसी अभियान के रूप में लेने की बजाय स्वयं को इस कार्यक्रम का स्वामी समझें।

यूनिसेफ के अनुसार, स्वच्छता से प्रति परिवार प्रति वर्ष 50,000 रुपये बचाए जा सकते हैं। दस्त के कारण भारत में प्रति वर्ष 1,00,000 से अधिक बच्चों की मृत्यु हो जाती है।

स्वच्छता का अभाव बच्चों में शारीरिक और संज्ञानात्मक दुर्बलता लाता है। इसके अलावा, जब महिलाएं और लड़कियां खुले में शौच करती हैं, तो उनकी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। ये सभी गंभीर समस्याएं हैं और अब यथास्थिति को बनाए रखने की मानसिकता को अपनाकर इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छता की कमी पर हमारे जीडीपी के छह प्रतिशत से अधिक का व्यय करना पड़ता है।

जब से प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 तक 'स्वच्छ भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'स्वच्छ भारत अभियान' का शुभारंभ किया है, तब से इसमें निस्संदेह जनता के विभिन्न वर्गों और विभिन्न राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, जन प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों का प्रचंड समर्थन मिला है।

कुल मिलाकर, स्वच्छ भारत मिशन ने उल्लेखनीय प्रगति की है और देश में स्वच्छता की स्थिति को बदल दिया है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच करने वाले भारतीयों की संख्या वर्ष 2014 में अनुमानत: 60 करोड़ से घटकर अब 30 करोड़ हो गई है।

2,45,000 से ज्यादा गांवों, 1300 शहरों, 200 जिलों और 5 राज्यों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है। गंगा के किनारे के सभी गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है।

50% से अधिक शहरी वार्डों में ठोस कचरे को घर-घर से उठाया जा रहा है। देश में कचरे से लगभग 100 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 5 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए हैं। मंजिल अभी दूर है और हम सभी भारत को अक्टूबर 2019 तक स्वच्छ और 'खुले में शौच' से मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

2014 में, कर्णाटक में घरेलू स्वच्छता कवरेज केवल 30% थी। तब से इस राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए आज 72% से अधिक कवरेज हासिल कर ली है। राज्य ने लगभग 12,000 गांवों, 50 ब्लॉकों और 7 जिलों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है। कर्णाटक राज्य में खुले में शौच को समाप्त करने के लिए "शौचालयक्कागी समारा" नामक कार्यक्रम (शौचालय के लिए धर्मयुद्ध) को एक जन आंदोलन के रूप में युद्ध स्तर पर कार्यान्वित किया जा रहा है। मैं इसके लिए कर्णाटक सरकार को बधाई देता हूं।

मुझे विश्वास है कि 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 'स्वच्छ भारत अभियान' की गति को और बल देगा।

इस अभियान का उद्देश्य पूरे देश के लोगों, विशेषकर सभी स्तरों के सरकारी कर्मचारियों, स्थानीय नेताओं, युवा समूहों, महिलाओं, स्कूल के बच्चों, रक्षा कर्मियों, कॉर्पोरेट, मशहूर हस्तियों, धार्मिक संगठनों और सभी नागरिकों से ट्विन-पिट वाले शौचालयों के निर्माण के लिए श्रमदान देने का आवाह्न करना और रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पार्क, बाजार, अस्पताल, स्कूल आदि जैसे सार्वजनिक स्थानों को साफ करना है।

पूजा-स्थानों, विरासत स्थलों और समुद्र तटों जैसी हमारी प्राकृतिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत की पवित्रता और स्वच्छता को बनाए रखने की आवश्यकता को पहचानते हुए उनकी पुनर्सज्जा की जाएगी।

यदि हम सब 'चलता है' के सामान्य दृष्टिकोण को अपनाएंगे तो हम निरंतर प्रगति हासिल नहीं कर सकते। हमें सामूहिक रूप से अभिनव समाधानों की खोज करनी चाहिए, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।

सभी नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों को इस उत्तरदायित्व को केवल नौकरी या घर के काम के रूप में नहीं अपितु एक पवित्र मिशन के रूप में लेना चाहिए। यह राष्ट्रपिता के प्रति संभवतः सर्वश्रेष्ठ और राष्ट्रपिता को सबसे ईमानदार श्रद्धांजलि होगी जो इसके बारे में बहुत भावुक थे। यह समय हम सभी के लिए यह दिखाने का एक अवसर है कि हम अपने देश की और हमारे साथी नागरिकों की चिंता करते हैं।

मित्रो

इस तरह की उपलब्धियां केवल तभी संभव हो सकती हैं जब समुदाय सार्वजनिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को प्राप्त करने और लोगों को प्रेरित करने, शौचालयों की मांग पैदा करने और उनका उपयोग करने के लिए मिलकर एक साथ आए। कुछ ऐसे उदाहरण हैं:

इस अवसर पर मैं आपको छत्तीसगढ़ की जोश से ओत-प्रोत 105 वर्षीया कुंवर बाई के बारे में बताना चाहूँगा। वह स्पर्धा करने के मामले में हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। बेहतर जीवन जीने के प्रति अपनी उत्सुकता और कार्यों के चलते उन्होंने अपने घर में शौचालय के निर्माण के लिए अपनी सारी बकरियां बेच दीं। उन्हें स्वयं माननीय प्रधानमंत्री ने सम्मानित किया और अब वह स्वच्छ भारत अभियान की शुभंकर हैं।

हिलटॉप स्कूल, टेल्को की कक्षा छह की छात्रा मोंदरिता चटर्जी ने अपनी जेबखर्च की राशि का उपयोग पूर्वी सिंहभूमि जिले के पोट्का प्रखंड में गरीबों के लिए शौचालय बनवाने के लिए किया।

सोमारी देवी ने लोगों को खुले में शौच करने से रोकने के लिए 'लोटा छीनो, सीटी बजाओ, और डमरू बजाओ' अभियान शुरू किया। वह निगरानी समिति के साथ सुबह 5 बजे और फिर शाम 5 बजे जाती थीं। ऐसी पहलों के फलस्वरूप, 15 दिसंबर, 2016 को हजारीबाग जिले की रेलीगढ़ पंचायत को खुले में शौच से मुक्त पंचायत घोषित किया गया।

कर्णाटक राज्य के दृष्टांत निम्नलिखित हैं:

कर्णाटक में लावण्या नामक एक किशोरी ने अपने गांव के प्रत्येक घर में शौचालय के निर्माण की मांग को लेकर 3 दिनों का उपवास किया। उससे अंत में अपना उपवास तभी तोड़ा जब अधिकारियों ने गांव में शौचालय निर्माण का वायदा किया।

ग्रामीण बेंगलुरु की पूर्व कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डा. मंजूला, आईएएस ने 6 महीने में 48 ग्राम पंचायतों में खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल किया जो कर्णाटक के लिए एक रिकार्ड समय में किया गया कार्य था।

पिछले महीने से, 45 वर्षीया सब्जी विक्रेता शरणम्मा कर्णाटक के कोप्पल जिले में गंगावती तालुक में धानपुर गांव के ऐसे प्रत्येक घर में, जिन घरों में शौचालय है, एक किलो टमाटर मुफ्त दे रही हैं।

उत्तरी कर्णाटक के कोप्पल जिले की 16 वर्षीया मलम्मा ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए अपनी मां पर दबाव बनाने के लिए हाल ही में भूख हड़ताल की थी।

गुलबर्गा की एक स्वसहायता समूह सदस्य अक्कम्मा हरावल, जिन्होंने मार्च 2017 में नई दिल्ली में स्वच्छ शक्ति का प्रतिनिधित्व भी किया था, ने समुदायों को शौचालयों का निर्माण करने और उनके प्रयोग के लिए प्रेरित किया।

तनुजा गौडा ऐसे परिवार से हैं जिसमें केवल महिलाएं ही हैं, कोई पुरुष नहीं है। उन्होंने अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए शौचालय के लिए स्वयं ही गड्ढा खोदा। ऐसे परिवार की महिलाएं और लड़कियाँ उन परिवारों में विवाह करने से इंकार कर रही है जहां शौचालय नहीं है।

मित्रो

पिछले सप्ताह से, और विशेषकर 17 दिसम्बर को, सेवा दिवस के अवसर पर कई के‍बिनेट मंत्रियो, मुख्यमंत्रियों, राज्य मंत्रियों, संसद सदस्यों, विधायकों और सरपंचों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों को प्रेरित करने के लिए श्रमदान किया।

स्वयं प्रधान मंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक गांव में दो गड्ढों वाले शौचालय के निर्माण हेतु श्रमदान किया था।

फिल्मी सितारों, खिलाड़ियों, कारपोरेट जगत के अधिकारियों, कलाकारों और धार्मिक नेताओं ने भारत के विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों में श्रमदान किया।

सशस्त्र सेनाओं और पुलिस बल जैसी सेवा की प्रतीक संस्थाओं ने भी देश भर में स्वच्छता के लिए अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।

'स्वच्छता ही सेवा' से देश में सफाई और स्वच्छता आंदोलन को और अधिक बल प्राप्त हुआ है। मैं प्रत्येक व्यक्ति से अपील करता हूँ कि वे आगे आएं और 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान में शामिल हों, और इस अभियान की अलख को पखवाड़े के अलावा भी लगातार जगाए रखें ताकि राष्ट्र स्वच्छ भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

साफ और स्वच्छ और तत्पश्चात् एक स्वस्थ भारत का निर्माण विकसित भारत की दिशा में पहला कदम है। आइए, हम सुनिश्चित करें कि यह जनांदोलन प्रतिदिन और तेज हो और प्रत्येक नागरिक इसमें अपनी भूमिका निभाए।

जय हिंद।