22 फरवरी, 2017 को भारत-युगांडा बिजनेस इवेंट में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री मो. हामिद अंसारी का भाषण

युगांडा | फ़रवरी 22, 2017

मैं युगांडा के माननीय उपराष्ट्रपति का यहाँ आने के लिए आभार प्रकट करता हूँ। मैं भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंडल परिसंघ (फिक्की), प्राइवेट सैक्टर फाउंडेशन युगांडा और इंडियन बिजनेस फोरम (आईबीएफ), युगांडा का भी इस व्यापारिक आयोजन को आयोजित करने के लिए धन्यवाद देता हूँ।

युगांडा के साथ हमारे वाणिज्यिक और वाणिज्यिक संबंध बहुत ही गतिशील रहे हैं और ये हमारे द्विपक्षीय संबंधों के मुख्य स्तंभ हैं। मुझे बताया गया है कि हर महीने युगांडा के 70 से अधिक व्यवसायी भारत में व्यावसायिक अवसरों की तलाश में भारत की यात्रा करते हैं। यह संतोष का विषय है कि भारत युगांडा के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है परंतु 615 मिलियन अमरीकी डालर के स्तर को देखते हुए हमारा द्विपक्षीय व्यापार अब तक अपनी वास्तविक स्तर को छू नहीं पाया है।

युगांडा की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था अनेक क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराती है। युगांडा प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है जिनमें उपजाऊ जमीन, मजबूत कृषि आधार तथा खनिज भंडार है और अब पेट्रोलियम का भी पता चला है। हाल में हुए आर्थिक सुधारों से तीव्र विकास का आगाज हुआ है। हम अपनी कंपनियों को युगांडा की अर्थव्यवस्था द्वारा दिए जा रहे अवसरों में शामिल होने और उनमें निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। भारत और युगांडा दोनों में जनसंख्या युवा है। हमारे युवा लोग हमारे सबसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं। परंतु उनकी क्षमताओं का उपयोग करने के लिए हमें उन्हें शिक्षित करना होगा और उन्हें वह जरूरी कौशल प्रदान करना होगा जिससे हमारे लगातार जटिल होते हुए विश्व में उन्हें उत्पादक बनाया जा सके।

भारतीय शिक्षा संस्थानों ने युगांडा सहित अफ्रीका से विद्यार्थियों की निरंतर बढ़ती हुई संख्या को पश्चिमी देशों के संस्थानों की तुलना में काफी कम लागत पर गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्राप्त करने के अवसर दिए हैं। भारत सरकार युगांडा के विद्यार्थियों के लिए अनेक छात्रवृत्तियों और अध्येयतावृत्ति भी प्रदान कर रही है ताकि वे भारत में विभिन्न शैक्षणिक और व्यावसायिक कार्यक्रमों और अनुसंधान पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर सकें। ये विद्यार्थी भविष्य में हमारे वाणिज्यिक और जन-संपर्क बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाऐंगे।

भारत और युगांडा की जनांकिकीय विशेषताएं और लोगों के रोगग्रस्त रहने की समस्या समान है और दोनों ही स्वास्थ्य और अपनी-अपनी जनसंख्या की भलाई संबंधी समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारत अफ्रीका के लोगों के लिए खरीद योग्य मूल्य पर औषधियां प्राप्त करने और विशेषज्ञतायुक्त स्वास्थ्य देखभाल का स्रोत रहा है। अनेक भारतीय अस्पतालों ने युगांडा सहित अफ्रीका से रेफर किए रोगियों का इलाज करने की सुविधाएं विकसित कर ली हैं। उनमें से अनेक अस्पतालों ने तो युगांडा में समेकित स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं स्थापित करने में रूचि भी दिखाई है ताकि विशेषज्ञताओं के व्यापक क्षेत्र में गुणवत्तायुक्त चिकित्सा और नर्सिंग सेवाएं प्रदान की जा सकें।

युगांडा में भारतीय समुदाय काफी जीवंत है और विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में युगांडा की अर्थव्यवस्था में उसकी स्थिति काफी महत्वपूर्ण हैं। भारतीय व्यवसायी हजारों युगांडावासियों को रोजगार देते हैं और वे युगांडा में कर राजस्व के सर्वाधिक अंशदाताओं में से हैं।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत युगांडा में सबसे बड़े निवेशकों और व्यापार भागीदारों में से एक बनकर उभरा है। ऐसा युगांडा की सरकार के निरंतर और सकारात्मक सहयोग के कारण हुआ है। मैं, युगांडा की सरकार को भारतीय उद्यमियों, जिन्होंने युगांडा में व्यावसायिक अवसरों में रूचि दिखाई, का स्वागत करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और मैं अनुरोध करता हूँ कि युगांडा की सरकार युगांडा में व्यापार करने वाली हमारी कंपनियों को ऐसा सहयोग और प्रोत्साहन देना जारी रखें।

मैं आपको मुझे आज सुबह महामहिम युगांडा के राष्ट्रपति से मुलाकात करने के समय जिस एक बात का पता चला, उसके बारे में बताना चाहता हूँ । उस बैठक से दोनों सरकारों द्वारा एक-दूसरे के साथ सहयोग करने की इच्छा के प्रति मेरे आत्मविश्वास को बल मिला और हमारे दोनों देशों में व्यावसायिक समुदायों को एक प्रभावशाली संदेश यह गया कि यहां ऐसे व्यासवायिक अवसर हैं जिनका लाभ उठाना होगा । महामहिम राष्ट्रपति विशेष रूप से यह बताते हुए काफी उत्साहित थे कि भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भारतीय विनिर्माता इस सोच का लाभ उठाकर पर्याप्त रूप से लाभान्वित हो सकते हैं कि वे केवल युगांडा के बाजार को ही नहीं देख रहें हैं बल्कि पूर्वी अफ्रीकी समुदाय और आस-पास के क्षेत्रों के काफी विस्तृत बाजार पर ध्यान दे रहे हैं।

इसलिए, जैसा माननीय मंत्री ने कहा है कि आप केवल 28 या 30 मिलियन लोगों के बाजार को नहीं बल्कि पूर्वी अफ्रीका में 350 मिलियन लोगों के बाजार को देख रहे हैं। और इस विचार को आत्मसात करना होगा क्योंकि ऐसी अनेक चीजें जो यहां विनिर्मित और परिवहन की जाती है, ठीक उसी प्रकार से भारतीय ज्ञान और विशेषज्ञता के साथ इस क्षेत्र में एक काफी व्यापक बाजार के लिए विनिर्मित की जा सकती हैं। इसी संदेश को मेरा शिष्टमंडल और मैं भारत में सरकार और व्यवसाय समुदाय के लिए यहां से लेकर जा रहे हैं और इसी विषय पर परस्पर लाभ के लिए हम मिलकर संयुक्त रूप से कार्य करने जा रहे हैं।

मैं इस व्यावसायिक बैठक को आज उसकी चर्चाओं में सफल होने की शुभकामनाएं देता हूँ, मुझे विश्वास है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध प्रगाढ़ होते रहेंगे और भविष्य में नई ऊचाइयों को प्राप्त करेंगे।

धन्यवाद।