16 सितम्बर, 2017 को हैदराबाद में भारतीय कम्पनी सचिव संस्थान के उत्कृष्टता केन्द्र के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का अभिभाषण

हैदराबाद | सितम्बर 16, 2017

मुझे इस ऐतिहासिक शहर हैदराबाद में आपके बीच आकर भारतीय कम्पनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन करने में बेहद खुशी हो रही है ।

पूरे दक्षिण भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस उत्कृष्टता केंद्र और उत्तरी क्षेत्र के लिए अजमेर में और पूर्वी क्षेत्र के लिए कोलकाता में इसी तरह के उत्कृष्टता केन्द्रों के शुरू होने के साथ, यह संस्थान पूरे देश की आवश्यकताओं को पूरा कर पाए। इसका कॉर्पोरेट सेंटर फॉर गवर्नेंस, रिसर्च एंड ट्रेनिंग, पहले से ही मुंबई में कार्य कर रहा है और पश्चिमी क्षेत्र को सेवा प्रदान कर रहा है।

वैश्वीकरण और अर्थव्यवस्थाओं को चलाने में कार्पोरेट क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, कंपनी सचिव जैसे पेशेवरों के लिए ऐसा अत्याधुनिक ज्ञान और कौशल प्राप्त करना अनिवार्य हो गया है जो न केवल सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के अनुरूप हों बल्कि साथ ही अच्छे कॉर्पोरेट शासन को भी बढ़ावा दे।

कॉर्पोरेट शासन के उच्च मानक स्थापित करने के साथ-साथ ऐसे केंद्रों को शोध और नवोन्मेषी प्रथाओं को उच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

मुझे बताया गया है कि उत्कृष्टता केंद्र को सौंपे गए दायित्वों में अन्य कार्यों के साथ-साथ ऐसा परिवर्तनकारी अनुसंधान कार्य शुरू करना भी है, जिनका उद्देश्य कॉर्पोरेट शासन में अंतरराष्ट्रीय स्तर को प्राप्त करना, अनुसंधान की चुनौतीपूर्ण समस्याओं का समाधान करने के लिए सहयोगपूर्ण नेटवर्क का निर्माण करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करना तथा भारतीय अनुसंधान के लिए मान्यता अर्जित करना है।

यह याद रखना चाहिए कि अनुकरणीय कॉर्पोरेट शासन की बुनियाद में मजबूत नैतिक मूल्य होने चाहिए। परन्तु कॉरपोरेट शासन की शिक्षा के लिए कहीं और से प्रेरित होने से पहले, हमें अपने देश में मौजूद ज्ञान पर ध्यान देना चाहिए और इसके लिए कौटिल्य के अर्थशास्त्र से बेहतर क्या हो सकता है। चौथी शताब्दी ई.पू. में कौटिल्य द्वारा लिखित आर्थिक प्रबंधन संबंधी सिद्धांत और कार्यप्रणाली आज भी प्रासंगिक हैं।

मैं "उत्तम कॉरपोरेट शासन को बढ़ावा देने में विश्व में अग्रणी बनने" के दृष्टिकोण और "अच्छे कॉर्पोरेट प्रशासन को मजबूत बनाने वाले उच्च क्षमतावान पेशेवरों को तैयार करने" के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने के लिए भारतीय कंपनी सचिव संस्थान की सराहना करता हूं। आईसीएसआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये उद्देश्य केवल नारे बन कर न रह जाएं और इन्हें पूरी तरह से हासिल किया जाए।

भारत अपनी अंतर्निहित आध्यात्मिक शक्ति, समृद्ध परंपराओं और सुदृढ तंत्र - जो अनेक कुटुंब संचालित व्यवसायों के मूल सिद्धांत हैं - के साथ, कॉरपोरेट शासन में अन्य देशों के लिए एक आदर्श के रूप में उभर सकता है। कॉर्पोरेट शासन के संचालकों को अपने क्षेत्र में भारत को विश्व में अगुआ बनाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

फर्जी कंपनियों के माध्यम से धनशोधन एक ऐसी समस्या है जो किसी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। मैं आईसीएसआई द्वारा अपने सभी सदस्यों और अन्य हितधारकों को न केवल फर्जी कंपनियों, बल्कि फर्जी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के खतरनाक प्रभाव के बारे में जागरुक बनाये जाने के निर्णय की सराहना करता हूं।

मैं सचिवालयी मानदंडों को कानूनी पुस्तकों में शामिल करने और इस प्रकार उत्तम कार्पोरेट परिपाटियों के लिए मार्ग प्रशस्त करने संबंधी आईसीएसआई के प्रयासों की भी सराहना करता हूं । कॉरपोरेट विवादों को देखते हुए इस तरह के मानकों की आवश्यकता है।

कंपनी का सचिव न केवल किसी उद्यम के नैतिक मूल्यों का रक्षक होता हैं, बल्कि उसके पास एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है। नि:सन्देह, कंपनी सचिव मुख्य प्रबंधकीय कर्मी होते हैं, लेकिन वे आंतरिक और बाह्य हितधारकों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं और इस तरह से सुशासन के सिद्धांतों का अनुपालन सुनिश्चित करने और उन्हें लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें प्रबंधन और अन्य हितधारकों के समुचित मार्गदर्शन के लिए कानूनों में हुए परिवर्तनों की नवीनतम और पूर्ण जानकारी रखनी होती है। जीएसटी के कार्यान्वयन के साथ, उन्हें इसके कार्यान्वयन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें अच्छी तरह से सुविज्ञ होना चाहिए।

मुझे यह बताने में खुशी है कि आईसीएसआई आधुनिक कॉर्पोरेट परिदृश्य में प्रासंगिक प्राचीन भारतीय ग्रंथों की शिक्षाओं, को सामने लाकर एक अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट प्रशासन संहिता तैयार कर रही है।

मैं पंचायतों की बैठकों के लिए आदर्श संहिता से संबंधित एक मसौदा नोट प्रस्तुत करने के लिए संस्थान की सराहना करता हूं। इस नोट का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सुशासन को बढ़ावा देना है। अन्य पहलें जैसे आईसीएसआई कर्मचारियों द्वारा सप्ताह में एक दिन खादी पहनना और स्वैच्छिक तरीके से एक कार्पोरेट रिश्वतरोधी संहिता बनाना भी प्रशंसनीय हैं।

मैं संस्थान, उसके सभी सदस्यों और विद्यार्थियों को सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं देता हूँ।

जय हिन्द!