14 सितंबर, 2018 को नई दिल्ली में हिंदी दिवस के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु जी द्वारा दिया गया अभिभाषण

नई दिल्ली | सितम्बर 14, 2018

"देवियो और सज्जनो ! हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर मैं आप सभी को, समस्त देशवासियों को और विश्व भर के सभी हिंदी प्रेमियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ I हिंदी दिवस समारोह में पहली बार आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है I

2. संघीय लोकतंत्र और लोकसत्ता के प्रति सम्मान का यह अद्वितीय उदाहरण है कि भारत की संविधान-सभा ने 14 सितम्बर, 1949 की अपनी बैठक में सर्वसम्मति से देश की एक ऐसी भाषा को भारत संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया जो राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वाधीनता सेनानियों के बीच सम्पर्क का प्रमुख माध्यम रही, जो विविधता में एकता का सूत्र रही, जो देश के ज़्यादातर भागों में अधिकांश लोगों द्वारा सबसे अधिक बोली-समझी जाती रही है और जो देश के सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, साम्प्रदायिक एवं भाषायी समन्वय व सौहार्द का प्रतीक थी; और वह भाषा थी – हिंदी। आज भी हिंदी की यही विशेषताएं उसे अन्य भाषाओं की अपेक्षा अधिक स्वीकार्य बनाती हैं। प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाए जाने की पृष्ठभूमि और आधार यही है।
3. यह विचारणीय विषय नहीं है कि हिंदी भारत की समृद्धतम और श्रेष्ठतम भाषा है क्योंकि देश की कई अन्य भाषाएं हैं जो हिंदी से ज्यादा पुरानी और समृद्ध हैं I संस्कृत तो सभी भारतीय भाषाओं की जननी है और हमारे पास अत्यंत समृद्ध क्षेत्रीय भाषाएँ भी हैं I विचारणीय विषय यह है कि हिंदी सर्व-सुलभ और सहज ग्रहणीय भाषा है, अधिकांश जनता की भाषा है, उसका स्वरूप समावेशी है और उसकी लिपि देवनागरी विश्व की सबसे पुरानी एवं वैज्ञानिक लिपियों में से है, उसका शब्द भंडार एक तरफ संस्कृत से तो दूसरी तरफ अन्य अनेक देशी – विदेशी भाषाओं के शब्दों से समृद्ध हुआ है यानि उसके शब्द भंडार में तत्सम, तदभव, देशज और विदेशी शब्दों का समावेश है I इस प्रकार हिंदी आधुनिक भी है और पुरातन भी है I हिंदी के ये ही गुण उसे मात्र एक भाषा के दर्जे से ऊपर एक संस्कृति होने का सम्मान दिलाते हैं ।
4. भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ देश के अंतिम व्य क्ति तक पहुंचाने के लिए भाषा का अत्य्धिक महत्वी है। सरकार की कल्या णकारी योजनाएं तभी प्रभावी बन सकेंगी जब आम जनता उनसे लाभान्वि त होगी। इसके लिए आवश्य क है कि शासन का काम-काज आम जनता की भाषा में किया जाए । हमारे लिए यह समझना जरूरी है कि राजभाषा हिंदी के माध्यसम से देश की जनता की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृजतिक सभी प्रकार की अपेक्षाओं को पूरा करने वाली योजनाओं व कार्यक्रमों को आखिरी सिरे तक पहुंचाना सरकारी तंत्र का अति महत्वकपूर्ण कर्तव्यू है और उसकी सफलता की कसौटी भी। यदि हम चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र निरंतर प्रगतिशील रहे, और अधिक मजबूत बने तो हमें संघ के काम-काज में हिंदी का तथा राज्यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं का ही प्रयोग करना होगा । हिंदी को उसके वर्तमान स्वदरूप तक पहुंचाने में देश के सभी प्रदेशों का महत्वंपूर्ण योगदान रहा है ।

5. भारत की सभी भाषाएं समृद्ध हैं । उनका अपना साहित्यत, शब्दाभवली तथा अभिव्य‍क्तिायां एवं मुहावरे हैं । इन सभी भाषाओं में भारतीयता की एक आतंरिक शक्तिन भी है । भले ही हमारी भाषाएं अलग-अलग हों, इन्हें बोलने वाले लोग देश के अलग-अलग भागों में रहते हों, पर ये सभी भाषाएँ भावनात्मक रूप से हमारी साझी धरोहर हैं I इससे हमारी राष्ट्रीोय एकता और मजबूत होगी तथा भारत की विविध संस्कृवति को बेहतर रूप में अभिव्यदक्त किया जा सकेगा । हिंदी को केवल बोलचाल के स्त र पर ही संपर्क भाषा नहीं बनना है, बल्किे कला और साहित्यक के स्तयर पर भी यह दायित्व निभाना है । हमारी क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य का हिंदी में अधिक से अधिक अनुवाद होना चाहिए ताकि पूरे देश का साहित्या हमें आसानी से उपलब्धक हो सके । इसके साथ ही, हिंदी साहित्यह का भी अन्या भारतीय भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए। इससे न केवल राष्ट्री य एकता बढ़ेगी बल्कि् वैचारिक, सांस्कृयतिक और भावनात्मनक आदान-प्रदान से भारतीय साहित्य और भारतीय भाषाएँ भी समृद्ध होंगी I मेरा ये भी मानना है कि हिंदी को केवल मनोरंजन एवं साहित्यम तक सीमित न रखा जाए अपितु शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी एवं वाणिज्यन में भी इसका अधिकाधिक उपयोग हो ।

6. भारत आज एक युवा राष्ट्र है जिसका लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा 35 साल से कम आयु की आबादी का है। किसी अन्य राष्ट्र को मानव संसाधन का इतना बड़ा लाभ प्राप्त नहीं है। युवाओं को अपनी भाषा में सही शिक्षा, ज्ञान और कौशल प्रदान करके हमें इस विशाल मानव पूंजी को राष्ट्रीय संपत्ति सर्जकों में परिवर्तित करने की जरूरत है। मेरा यह मानना है कि हिंदी का विस्तार शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी एवं वाणिज्य में अधिकाधिक होने से युवा पीढ़ी को विकास के बेहतर अवसर मिल सकेंगे । हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को लोगों की रोज़ी-रोटी से जोड़ा जाए यानि अपनी भाषाओं के अध्ययन से लोगों को रोजगार के अधिक अवसर मिलने चाहिएI
7. भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है । आज जब भारत की दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की संभावना है, सभी देशवासियों को अपने सपनों को साकार करने और देश के विकास में योगदान देने के लिए सही दिशा में अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा को लगाना होगा। ऐसा हिंदी और देश की भाषाओं के अधिकाधिक प्रयोग से ही संभव है क्योंकि कोई भी देश विदेशी भाषा के बूते पर प्रगति नहीं कर सकता I
8. गांधीजी ने न केवल हमारे स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व किया, बल्कि् वह हमारे नैतिक पथ-प्रदर्शक भी थे और सदैव रहेंगे। गांधी जी ‘स्वदेशी’ पर बहुत ज़ोर दिया करते थे। स्वदेशी की यह सोच आज भी उपयोगी और प्रासंगिक है। गांधी जी ने हिंदी को भारतीय चिंतन-धारा का स्वाभाविक विकास क्रम माना I हिंदी भाषा का प्रश्न उनके लिए स्वराज्य का प्रश्न था I आइए हम सब भारतवासी अपने दिन-प्रतिदिन के आचरण में, उनके द्वारा सुझाए गए रास्तों पर चलने का संकल्प लें। भारतीयता के गौरव को महसूस करने का, इससे बेहतर कोई और तरीका नहीं हो सकता।
9. ‘वसुधैव कुटुंबकम’ भारत की उदार सांस्कृ तिक चेतना और विश्व दृष्टिक का प्रतीक है । हमारी हिंदी इसी भाव बोध का प्रतिनिधित्वक करती है । हिंदी भाषा हमारी सबसे बड़ी, सबसे मज़बूत, सबसे अधिक प्रभावशाली तथा अनमोल धरोहर है । हमें इसका सबल उत्तभराधिकारी बनना है । भूमंडलीकरण के कारण पूरे विश्व में तेजी से बदलते आर्थिक एवं वित्तीाय परिवेश में वैश्विलक स्तीर पर हिंदी की गूंज रही है । अपनी इस नई पहचान के कारण हिंदी विश्वद बाज़ार के लिए एक प्रभावशाली और ताकतवर भाषा बन कर उभरी है।

10. हिंदी का महत्त्व हमारे संविधान निर्माताओं ने प्रारम्भ में ही स्वीकार कर लिया था जिसे अब सारे संसार ने भी मान लिया है I देश – विदेश के सैकडों विश्वविद्यालयों में एक विषय के रूप में हिंदी की पढाई होती है, ज्ञान – विज्ञान की मौलिक पुस्तकें हिंदी में भी लिखी जा रही हैं, आज हिंदी सोशल मीडिया और संचार माध्यमों की प्रमुख भाषा बन गई है, विशेष रूप से हिंदी कमेंटरी वाले टीवी चैनल शुरू हो रहे हैं, निजी और सरकारी क्षेत्र की देशी - विदेशी आईटी व व्यावसायिक कम्पनियां भारत की ओर रुख करने के लिए हिंदी का महत्व स्वीकार कर रही हैं I

11. 18-20 अगस्त, 2018 को विदेश मंत्रालय द्वारा मारिशस में आयोजित ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के माध्यम से हमने दुनिया को हिंदी के व्यापक प्रभाव क्षेत्र के संबंध में स्पष्ट संदेश दे दिया है और विश्व मंच पर हिंदी को स्वीकार करने के लिए मज़बूत दावेदारी पेश की है। मैं आशा करता हूँ कि इस सम्मेलन में हुए विचार-मंथन से और इसमें लिए गए निर्णयों से वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार को गति मिलेगी I विश्वह पटल पर हिंदी भाषा के विकास व भारतीय संस्कृति के संवर्धन एवं संरक्षण में विभिन्न देशों में बसे भारत वंशियों ने अहम योगदान दिया है । आज इस मंच से मैं उन सभी साहित्यभकारों एवं लेखकों के प्रति आभार प्रकट करता हूं जिन्होंदने अपनी संवेदनाओं की अभिव्यंक्तिह के लिए हिंदी को ही स्वा्भाविक माध्यिम माना और जो पूरे विश्व में निःस्वार्थ भाव से हिंदी के सिपाही बन कर सृजनात्मक कार्यों में लीन हैं I

12. भारत की विकास गाथा में एक वैश्विक भाषा के रूप में हिंदी का महत्व सर्वविदित हैI पर्यटन, विज्ञान, वाणिज्य, व्यापार और मीडिया जैसे हर क्षेत्र में हिंदी का महत्व बढ़ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आई वर्तमान क्रांति, विशाल बाजारों की उपलब्ध्ता, व्या पारिक अवरोधों की समाप्ति , प्रत्यइक्ष विदेशी निवेश आदि से वैश्वी्करण में और भी तीव्रता आई है । भूमंडलीकरण और आर्थिक उदारीकरण के मौजूदा दौर में हिंदी ने अपने महत्वत, प्रासंगिकता और लोकप्रियता की वजह से अंतर्राष्ट्री य स्तेर पर अपनी विशेष पहचान बनाई है । हिंदी अपनी व्यावपक पहुंच एवं लोकप्रियता तथा बाजार सम्मोंहन क्षमता के चलते एक शक्तिरशाली भाषा के रूप में स्था पित होने की राह पर अग्रसर है । बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्री य कंपनियों के लिए भारत में अपना व्यरवसाय कामयाब बनाने के लिए हिंदी का सहारा लेना व्यारवसायिक मजबूरी है । बहुराष्ट्रीभय कंपनियां अपने व्याूपारिक हितों के लिए वैश्वििक हिंदी की संकल्प ना कर रही हैं । मीडिया एवं विज्ञापनों से भी हिंदी का बाजारीकरण हो रहा है ।

13. सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी को मजबूत बनाने के लिए राजभाषा विभाग ने जो प्रयास किए हैं, वह सराहनीय हैं I मुझे बताया गया है कि पिछले वर्ष हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर राजभाषा विभाग द्वारा 14 भारतीय भाषाओं में हिंदी सीखने के लिए तैयार किए गए ‘लीला’ मोबाइल ऐप का लोकार्पण माननीय राष्ट्र पति जी के कर-कमलों से किया गया था I हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले कार्मिकों तथा जन साधारण को हिंदी भाषा का उच्चतर ज्ञान देने के लिए आज लोकार्पित ‘ लीला हिंदी प्रवाह’ तैयार करने के लिए और हिंदी प्रौद्योगिकी संसाधन केंद्र की स्थापना के लिए मैं राजभाषा विभाग को बधाई देता हूँ I स्मृति आधारित अनुवाद टूल ‘कंठस्थ’ राजभाषा विभाग की महत्वकांक्षी परियोजना है जिसका लोकार्पण पिछले माह मारीशस में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में किया गया था I मुझे आशा है कि भविष्य में भी विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन इसी प्रकार कुशलता से करता रहेगा I