08 फरवरी, 2018 को नई दिल्ली में नीति आयोग और सीआईआई द्वारा राष्ट्रीय रोजगार सम्मलेन और जीविका निर्माण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | फ़रवरी 8, 2018

“सर्वप्रथम, मैं नीति आयोग और कॉनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) को भारत में रोजगार और आजीविका सृजन संबंधी इस सम्मेलन के आयोजन पर बधाई देना चाहता हूं जिसका उद्देश्य भारत में सौभाग्य से उपलब्ध जनसंख्या का फायदा उठाने के लिए कार्यनीतियां तैयार करना है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, भारतीय युवा वर्ग की प्रतिभा को सम्पूर्ण विश्व में पहचान मिली हुई है जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि सुविख्यात वैश्विक कंपनियों में ऊंचे-ऊंचे पदों पर अनेक भारतीय पदासीन हैं। आज भारत सबसे युवा राष्ट्र है और मैं यह पूर्वानुमान लगा सकता हूं कि भविष्य में और भी अधिक प्रतिभाशाली युवा अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर मानवजाति के विकास में अपना योगदान करेंगे। परंतु इसके लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और कौशल प्रशिक्षण के संबंध में, जिससे संपोषणीय आजीविका और राष्ट्र निर्माण में लाभकारी योगदान मिलेगा, उनकी प्रतिभा का दोहन करने के लिए समुचित अवसरों की उपलब्धता अपेक्षित है।

मैं देश के युवाओं से संबंधित विभिन्न पहलुओं के साथ निकटता से जुड़ा रहा हूं और यह मेरा दृढ़ विश्वास है कि राष्ट्र की नियति उसके युवाओं के द्वारा निर्धारित की जाती है। मैंने ग्रामीण और शहरी विकास की कार्यसूचियों पर निकटता से काम किया है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार और आजीविका सृजन को अत्यधिक महत्व प्रदान किया है। किसी व्यक्ति द्वारा लाभकारी रोजगार प्राप्त किए जाने के लिए अनेक कारक होते है, जिनमें शिक्षा, उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुसार प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा तन्त्र, स्वास्थ्य सुविधाएं और उन्नत श्रम बाजार शामिल हैं। यद्यपि भारत की अकादमिक प्रणाली में बड़े पैमाने पर विकासमूलक परिवर्तन आए हैं फिर भी व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ और लोकप्रिय बनाए जाने की आवश्यकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं है बल्कि किसी व्यक्ति के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है।

भारत की जनसंख्या का लाभ न केवल घरेलू जरूरतों को, अपितु विश्व की परिपक्व अर्थव्यवस्थाओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए भी समुचित कौशल विकास के जरिए से लाभकारी रोजगारों हेतु एक अवसर प्राप्त करना है।

नवीन भारत कुल आबादी के 33 प्रतिशत युवाओं के साथ 'युवा भारत' के रूप में उभरा है। युवाओं की यह आबादी हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी संभावना रखती है और यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि देश के विकास के लिए इस जनसंख्या का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।

हमें व्यावहारिक प्रशिक्षण सहित शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण में क्षमता निर्माण द्वारा श्रेष्ठतम ढंग से इस जनसंख्या का लाभ उठाना चाहिए। रोजगार संवर्धन एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है और यह न केवल उत्पादन और राष्ट्रीय आय की वृद्धि में योगदान करता है अपितु गरीबी कम करने और जीवन स्तर को सुधारने में भी सहायक है।

लोगों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षा विकास का पहला महत्वपूर्ण घटक है-जो आजीविका के बढ़े हुए अवसरों और ज्ञानार्जन, कौशल विकास और रुझान तथा मूल्यों के विकास के लिए एक पहली अपेक्षा है।

यद्यपि हमने अपनी शिक्षा प्रणाली में काफी अधिक विस्तार किया है और पहले किसी भी समय की तुलना में आज अधिक संख्या में बच्चे और युवाजन स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ रहे हैं, तथापि यहां साफ तौर पर गुणवत्ता का संकट परिलक्षित होता है। हमारे यहां आज भी विश्व की सबसे ज़्पयादा अशिक्षित युवा जनसंख्या है। स्कूली स्तर पर किए गए अधिगम संबंधी सर्वेक्षणों में अधिगम में बहुत ज्यादा अंतर देखने में आए हैं। उच्चतर शिक्षा प्रणाली में कतिपय संस्थान ही विश्वस्तरीय हैं तथापि बड़ी संख्या में औसत दर्जे के संस्थान भी हैं। हमारे महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों के पास रोजगार योग्य समुचित कौशल नहीं होता है। पाठ्यक्रम और शिक्षा पद्धति दोनों के ही संदर्भ में शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिए जाने और उसमें सुधार किए जाने की आवश्यकता है।

हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारा युवावर्ग रोजगार बाजार के लिए तैयार हो। उन्हें 'रोजगार सृजक' बनाने के लिए उनको उद्यमिता कौशल से लैस किए जाने की आवश्यकता है।

गुणवत्ता संवर्धन के साथ-साथ, हमें समान रूप से शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सामान्यत: अधिकतर महिलाएं एवं कन्याएं, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लोग, नि:शक्त और अल्पसंख्यक लोग शिक्षा से वंचित रहते हैं। जो देश 'सामाजिक न्याय' के सिद्धांत के प्रति वचनबद्ध है, वहां सामाजिक लोकतंत्र हासिल करने की दिशा में शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना पहला महत्वपूर्ण कदम बन जाता है।

बहनो और भाइयो,

आइए अब हम विकास के अन्य महत्वपूर्ण कारकों के बारे में बात करें।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है जो आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। अत: इस समूह की आय और क्रय-शक्ति को बढ़ाना अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था का विकास इस समूह के आर्थिक सामर्थ्य और शक्ति पर निर्भर है।

चूंकि सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी कार्य आरंभ किया है, इसलिए कृषि को अर्थक्षम और लाभकारी बनाने की आवश्यकता है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमें सभी अगड़ी और पिछड़ी कड़ियों के साथ एक कार्यतंत्र तैयार करने की आवश्यकता है। तीव्रीकरण और विविधीकरण के माध्यम से उच्चतर मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

यह महत्वपूर्ण है कि किसानों के लिए परंपरागत फसलों के स्थान पर उच्चतर मूल्य वाली फसलों की खेती आरंभ की जाए और कटाई के बाद प्रौद्योगिकी में सुधार किया जाए तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश किया जाए।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस), जिसे विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार स्कीम और सबसे बड़ी सार्वजनिक कार्य-योजना के रूप में जाना जाता है, को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किए जाने की आवश्यकता है।

सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सबसे बड़े नियोजकों में से एक हैं और देश के सकल घरेलू उत्पाद में प्रमुख योगदान करके भारतीय अर्थव्यवस्था में एक आधार स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं।

मुझे विश्वास है कि विमुद्रीकरण और जीएसटी के लागू होने के पश्चात सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के बड़े पैमाने पर विकसित होने से, वे रोजगार सृजन और विनिर्माण क्षेत्र को बड़े स्तर पर प्रोत्साहन देने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। हमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का ठोस विकास करने का उद्देश्य रखना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान 25 प्रतिशत तक हो सके और आगामी वर्षों में भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा सके।

गुणवत्ता और उत्पादन के संवर्धन में कौशल उन्नयन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैं राष्ट्रीय स्तर पर और विभिन्न राज्यों में विभिन्न औद्योगिक संघों को युवाओं के कौशल उन्नयन में सरकार के प्रयासों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर स्वयं योगदान करने और 'कुशल भारत' के रूप में देश का विकास करने का सुझाव देना चाहूंगा।

मैं यह जानकर प्रसन्न हूं कि सरकार 'प्रधानमंत्री कौशल केंद्र' (पीएमकेके) के तहत देश के प्रत्येक जिले में एक मॉडल कौशल केंद्र की स्थापना कर रही है और इन केंद्रों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु ऐसे 306 केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है।

मुझे पूरा विश्वास है कि प्रत्येक राज्य कौशल से वंचित आबादी को सहायतार्थ आजीविका संवर्धन हेतु 'दक्षता अर्जन और ज्ञान बढ़ाने संबंधी कार्यक्रम' (संकल्प) के तहत प्रदान किए जाने वाले विशिष्ट प्रोत्साहनों का पूरा लाभ उठाएगा।

औद्योगिक मूल्य संवर्धन हेतु दक्षता सुदृढ़ीकरण (स्ट्राइव) योजना जैसे अन्य कार्यक्रमों, जो औाद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों (आईटीआई) को उनके कार्य-निष्पादन में सुधार हेतु प्रोत्साहन प्रदान करते हैं और राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) से भी 'कुशल भारत' के विकास में बहुत सहायता मिलेगी।

हमें इस प्रकार के कौशल-सृजन करने की आवश्यकता है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरुप हों ताकि हमारे युवा कार्मिक अधिक स्फूर्त हो सकें और उनके कौशल की मांग विश्वभर में बढ़ सके। विगत कुछ वर्षों में 'कुशल भारत' की बढ़ती मांग ने दक्षता-प्राप्त परितंत्र की औपचारिक संरचना के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि दक्षता प्रदान करने संबंधी विभिन्न पहलों के बीच अधिक सहक्रियता का होना आवश्यक है और इसके अलावा दक्षता प्रदान करने संबंधी परितंत्र को परिवर्तनशील औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुसार विकसित एवं परिवर्तित होना चाहिए।

मैं उद्योगों से इस प्रक्रिया का एक सक्रिय भागीदार बनने का अनुरोध करता हूं। उद्योगों द्वारा दक्षता प्रदान करने की प्रक्रिया को उत्पादकता बढ़ाने के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए और प्रशिक्षुता प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी करने के लिए आगे आना चाहिए। आखिरकार, हम किसके लिए दक्षता कार्यक्रम चला रहे हैं? प्रतिवर्ष श्रमशक्ति से जुड़ने वाले लाखों लोगों को रोजगार कौन प्रदान करेगा? यह कार्य उद्योग का है....... भले ही आप एक स्टार्ट-अप उद्योग हों और केवल कुछ व्यक्तियों को नियोजित कर सकते हैं।...... इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। एक उद्योग के रूप में आप देश के युवाओं के लिए अपना योगदान दे रहे हैं और निश्चित रूप से आपकों इससे संतुष्टि मिलगी।

स्वचलीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रूप में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने से नई चुनौतियां सामने आएंगी परंतु इससे हमें विकास और आजीविका सृजन के लिए नए-नए बेशुमार अवसर भी मिलेंगे। नई प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए आवश्यक नए कौशलों को अपनाने के लिए हमारे युवाओं और कार्यबल को तैयार करना ही आज समय की आवश्यकता है।

सभी निजी संस्थानों को सभी संगठनात्मक स्तरों पर कार्यबल के लिए पुन: प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने में सक्षम होना चाहिए। उद्योगों को भी युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने और उनके लिए रोजगार सृजन हेतु आगे आना चाहिए।

वैश्विक फर्मों को भी प्रौद्योगिकी अंतरण, संयुक्त उद्यमों के सृजन और स्थानीय फर्मों को सहायता प्रदान करने में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इससे स्थानीय कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस, सेमी-कंडक्टरों और रोबोटिक्स जैसी प्रतिनिधि प्रौद्योगिकियों के मूलभूत क्षेत्रों में मुकाबला करने में सहायता मिलेगी।

निर्यात न केवल अर्थव्यवस्था के विकास में अपितु रोजगार संवर्धन में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैं महसूस करता हूं कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान के साथ-साथ रोजगार सृजन दोनों के ही संदर्भ में इस क्षेत्र में सुधार की बहुत गुंजाइश है। रोजगार सृजन में निर्यातों के महत्व को देखते हुए, भारत को एक ऐसा परिवेश निर्मित करने की आवश्यकता है जिसमें वैश्विक मानकों के अनुरूप निर्यातक पनप सके और फल-फूल सकें।

यद्यपि वर्ष 2014-16 के दौरान निर्यातों में गिरावट आई थी तथापि वर्ष 2016-17 के दौरान उनमें वृद्धि हुई और बेहतर होते हुए वैश्विक व्यापार परिदृश्य को देखते हुए उसमें सुधार आने की आशा है। चूंकि भारत विश्व के महत्वपूर्ण पर्यटन गंतव्यों में से एक है अत: पर्यटन क्षेत्र में भी रोजगार सृजन के लिए काफी अधिक सम्भावनाएं हैं।

बहनों और भाइयों,

मैंने आगे बढ़ने के संभावित तरीकों के संबंध में अपने कुछ विचार रखे हैं।

मेरे विचार से, यह वस्तुत: असीमित संभावनाओं और अवसरों का समय है।

भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और उसका आधारभूत तत्व मजबूत हैं।

समष्टिगत आर्थिक परिवेश अनुकूल है

सुनियोजित सुधार अपनी जड़ें जमा रहे हैं।

हमें इन रुपांतरकारी परिवर्तनों के वर्तमान रूझानों का लाभ उठाना चाहिए।

एक समृद्ध मानव-संसाधन पूंजी तैयार करके, निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करके, अधिक विकास की संभावना रखने वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके और वैश्विक भौगोलिक राजनीति में आगामी रूझानों का पूर्वानुमान लगाकर और नवोदित अवसरों का लाभ उठाने के लिए समुचित तैयारी करके एक बहुत बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

बेरोजगारी और अल्परोजगार विकट चुनौतियां है।

हमें एक साथ मिलकर अत्यंत प्रभावी कार्यनीति तैयार करके इसे क्रियान्वित करने की आवश्यकता है।

मुझे आशा है कि नीति आयोग हमारे देश के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों के साथ परामर्श करके एक व्यावहारिक समयबद्ध कार्यनीति तैयार कर पायेगा।

मैं इस सम्मेलन के परिणामों को देखने के लिए बहुत उत्सुक रहूंगा।

जय हिंद!