06 जनवरी, 2018 को जयपुर में मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के 12वें दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

जयपुर | जनवरी 6, 2018

"मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान के 12वें दीक्षांत समारोह में आप सभी के बीच आकर प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं। एक दीक्षांत समारोह संस्थान और साथ ही विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होता है। संस्था के लिए यह एक मील का पत्थर है क्योंकि यह उत्कृष्टता के मार्ग पर चलता है। छात्रों के लिए यह एक मील का पत्थर है क्योंकि यह सीखने के एक चरण के सफल समापन और एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है। यह एक उत्सव का क्षण है। यह चिंतन करने और पुनर्समर्पण का भी क्षण है।

मैं प्रत्येक छात्र को उसकी उपलब्धियों पर अपनी हार्दिक बधाई देता हूं, अपने बच्चों की प्रतिभाओं के पल्लवन के लिए मैं उनके माता-पिता का अभिवादन करता हूं और मैं दृढ़ संकल्प के साथ उत्कृष्टता का अन्वेषण करने के लिए संकाय और प्रबंधन को शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे प्रिय छात्रों, आप एक ऐसे संस्थान से स्नातक बन रहे हैं जो हमारे देश के महान दूरदर्शी संस्थासृजकों में से एक भारत रत्न मदन मोहन मालवीय के नाम पर है। यहां यह स्मरण करना उचित होगा कि उन्होंने ही राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते', जो हमारे राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे उत्कीर्ण है, को लोकप्रिय बनाया। सत्य के प्रति यही दृढ प्रतिबद्धता हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की पहचान है। यही प्रतिबद्धता स्वतंत्रता के बाद भी हम सभी को प्रेरित कर रही है।

मेरे विचार में, सच्ची शिक्षा हमें सच्चाई तक पंहुचने में सक्षम बनाती है। यह हमें नई वास्तविकताओं को खोजने में सक्षम बनाती है। यह ज्ञान की सीमाओं का विस्तार करती है और नवाचार को बढ़ावा देती है।

प्रिय छात्रों,

आपकी शिक्षा यात्रा आपको नए क्षेत्रों में ले जाती है। आपने इस संस्थान में अपने अध्ययन के दौरान व्यापक जानकारी प्राप्त कर ली है। आशा है कि आपने अपने ज्ञान को गहन किया है और नई अंतर्दृष्टि प्राप्त की है। प्रसिद्ध कवि टी.एस. इलियट ने सवाल किया था:

"वह बुद्धिमानी कहां है जिसे हमने ज्ञान में गंवा दिया है?"

"वह ज्ञान कहां हैं जिसे हमनें जानकारी में गवां दिया है?"

प्रिय छात्रों,

जानकारी की भूलभुलैया में अपना रास्ता न खोना। अधूरी जानकारी प्राप्त करके मत रुकना। चिंतन करें, सोचें और चर्चा करें। एक बार जब आप विभिन्न तथ्यों को जोड़ते हैं तो आप ज्ञान प्राप्त करते हैं। लेकिन ज्ञान अभी भी अधूरा है। आपको अंतर्दृष्टि, अनुभव और सही निर्णय लेने की क्षमता की आवश्यकता है। यही विवेक है। जब तक आप अच्छे और बुरे, नैतिक और अनैतिक, उचित और अनुचित के बीच स्पष्ट अंतर बनाने के स्तर तक नहीं पहुंच जाते हैं, तब तक आप सतही शिक्षा तक ही सीमित रहेंगे। आप 'ज्ञान' या 'विज्ञान' के स्तर पर ही बने रहते हैं। आपको अपने कल्याण और मानवता के कल्याण के लिए प्राथमिकता निर्धारित करने वाले 'विवेक', ज्ञान का उपयोग करने वाले विवेक को आत्मसात करना चाहिए।

आप देश के प्रमुख संस्थानों में से एक से स्नातक बन रहे हैं। आप अपने शैक्षिक प्रयासों में और प्रगति करने के लिए ज्ञान और कौशल प्राप्त कर चुके हैं। कृपया याद रखें कि शिक्षा में कोई 'पूर्ण विराम' नहीं होता है, केवल 'अल्पविराम' होता है। आपको निरंतर सीखना और अपने ज्ञान को अद्यतन करना जारी रखना चाहिए। आपको सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करना चाहिए। आपको विनम्रतापूर्वक अपने ज्ञान में कमी को स्वीकार करना चाहिए। आपके पास दुनिया भर से ज्ञान अर्जित करने की क्षमता होनी चाहिए। वस्तुत:, ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है। हमारे देश ने दुनिया भर से अच्छे विचारों का स्वागत किया है। अनुदार और संकीर्ण दृष्टि विभाजन पैदा करती है। वैश्विक नेता बनने के लिए आपको एक व्यापक, वैश्विक दृष्टि रखने की आवश्यकता है।

मैं चाहता हूं कि आप अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाएं और अपने आप को विरासत में मिली समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराएं। जैसाकि प्रसिद्ध दार्शनिक विल ड्यूरेंट ने कहा है:

"भारत हमें परिपक्व मन की सहनशीलता और नम्रता, आत्मा की समझ और सभी मनुष्यों के लिए एकजुट करने वाला शांतिप्रिय प्रेम सिखाएगा"।

प्रिय छात्रों,

आपको हमारे इतिहास का अध्ययन करना चाहिए और इससे सबक सीखनें चाहिएं। इससे आपको हमारे प्राचीन ऋषियों के अच्छे विचारों का लाभ उठाते हुए उन्हें समकालीन वास्तविकताओं पर लागू करने के लिए साहसिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास हासिल करने में मदद मिलेगी।

आपके पास सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए दृढ़ विश्वास से पैदा हुआ साहस होगा। यह विश्वास ज्ञान से पैदा होगा। यही कारण है कि आपको अपने ज्ञान को लगातार अद्यतन करना चाहिए।

ज्ञान ही शक्ति है। अच्छा करने की शक्ति; हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति।

प्रिय छात्रों,

आपके स्नातक होने के बाद आप में से कुछ व्यवसाय की दुनिया में प्रवेश करेंगे। आप यहां प्राप्त ज्ञान और कौशल का अपने कार्यस्थल में उपयोग करेंगे। नियोक्ता आपके प्रदर्शन, आपकी योग्यता और आपके दृष्टिकोण के आधार पर आपका आंकलन करेंगे। मुझे उम्मीद है कि आप अपने चुने हुए व्यवसायों में एक पहचान बना लेंगे। प्रिय छात्रों, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आपका 'दृष्टिकोण' आपको नई 'ऊंचाई' तक पहुंचने में मदद कर सकता है। वास्तव में, यही आपके संस्थान का आदर्श वाक्य है - 'योग कर्मसु कौशलम।' आपको लगातार बेहतर करने के लिए प्रयास करना चाहिए। नवाचार को नारा और उत्कृष्टता को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएं।

प्रिय छात्रों,

आप एक लंबी, शानदार विरासत के उत्तराधिकारी हैं। अनेक ऐतिहासिक वृत्तांतों के अनुसार प्राचीन भारत एक बहुत अत्यंत भारत था। आर्यभट्ट, भास्कर और ब्रह्मगुप्त जैसे गणितज्ञ, सुश्रुत जैसे चिकित्सक, जो तीसरी शताब्दी में मोतियाबिंद और पित्ताशय की शल्यचिकित्सा तथा कुष्ठ रोग का उपचार कर सकते थे, सुविख्यात हैं। 'शून्य' से 'दशमलव प्रणाली' की अवधारणा तक, इस्पात के उत्पादन से कपास और जूट की खेती तक, दिल्ली में लौह स्तंभ जैसे धात्विकीय चमत्कार से सौर घड़ी जैसे उन्न्त खगोल विज्ञान तक, सभी में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय योगदान किया था। जैसाकि आप जानते हैं, जयपुर में जंतर मंतर 1734 में बनाए गए उन्नीस वास्तु खगोलीय उपकरणों का एक संग्रह है। सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की हालिया प्रगति इस भव्य वैज्ञानिक परंपरा की निरंतरता का द्योतक है।

प्रिय छात्रों, आपके पास इस मजबूत वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान के आधार पर निर्माण करने का एक अवसर है। अब, आप दुनिया भर के सर्वोत्तम विचारों को जोड़ सकते हैं और ज्ञान की सीमा का विस्तार कर सकते हैं। आपके पास भारतीय संदर्भ में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का एक अनूठा अवसर भी है। आपको इस विस्तृत परिदृश्य को ध्यान में रखना चाहिए। यह आपका मिशन होना चाहिए।

आप ऐसे कुछ भाग्यशाली लोगों में से हैं, जो इस तरह के संस्थान से स्नातक होने में सफल हुए हैं। आपके सामने एक पुनरुत्थानशील भारत है - व्यापक अवसरों और अनंत संभावनाओं वाला भारत। कृपया इसका लाभ उठाएं और अपनी छिपी प्रतिभा को खोजें। अपने कैरियर पथ पर आगे बढ़ने के दौरान उस पथ को चुनें, जो आपमें जोश भर दे। उस पथ को चुने जो आपके विकास में योगदान करे। उस पथ को चुनें जो हमारे देश को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक बनाता है। उस पथ को चुनें जो हमारे ग्रह को रहने के लिए एक बेहतर स्थान बनाता है।

प्रिय छात्रों,

मैं आपके भावी प्रयासों के लिए आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं। आप अपने विचारों, भाषणों और कार्यों के माध्यम से अपनी दुनिया को आकार देंगे। जैसा कि महात्मा गांधी जी कहा करते थे - "आप स्वयं वह बदलाव बनिए, जो बदलाव आप दुनिया में देखना चाहते हैं।"

इस संस्था को देश के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में से एक बनाने में कठोर प्रयास करने के लिए मैं निदेशक और संकाय सदस्यों को बधाई देता हूं। मैं आप सभी को आने वाले अनेक वर्षों में ज्ञान और कौशल को सुलभ बनाने उसका विस्तार और प्रसार करने के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

हम सभी को इस महान संस्था के महान शिक्षा मिशन की याद दिलाने वाले इस खुशी के अवसर पर मुझे अपने साथ रहने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। आपने पिछले कई सालों से मानकों को बनाए रखा है और आप देश के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी शैक्षिक संस्थानों में से एक हैं। मुझे आशा है कि आने वाले वर्षों में आप और भी बेहतर बनेंगे और ज्ञान प्राप्त करने के अवसरों की गुणवत्ता में वृद्धि करेंगे।"