05 दिसंबर, 2017 को देहरादून, उत्तराखंड में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

देहरादून, उत्तराखंड | दिसम्बर 5, 2017

मैं स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में उपस्थित होकर खुशी का अनुभव कर रहा हूं। शांत वादियों के बीच स्थित स्वच्छ और हरित परिवेश से युक्त इस परिसर में व्यावसायिक और उच्चतर शिक्षा प्रदान करने के लिए उचित माहौल सृजित हुआ है।

यद्यपि एसआरएचयू राज्य का विश्वविद्यालय है और मात्र चार वर्ष पुराना है; इसकी प्रायोजक सोसायटी हिमालयन इंस्टीच्यूट हास्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी), जिसे एक महान मानवतावादी, विचारक, शिक्षक, लेखक और सर्वोत्कृष्ट योगी श्री स्वामी राम ने स्थापित किया था, गत 28 वर्षों से उत्तराखंड के निवासियों और इस देश की बहुमूल्य सेवा प्रदान कर रहा है। मुझे यह बताया गया है कि 28 वर्ष पूर्व यह स्थान एक बंजर भूमि थी और आज यह एक खूबसूरत नगर में बदल गया है। यह सब इस महान स्पप्नदृष्टा के प्रताप और आशीर्वाद के कारण संभव हो पाया है।

श्री स्वामी राम यह कहा करते थे "अगर मैं आपके भीतर के ईश्वर की सेवा नहीं कर सका तो मंदिरों, गिरजाघरों और मस्जिदों में जाना सब पाखंड है।" इस दृढ़ निश्चय को ग्रहण करके उन्होंने "प्यार, सेवा, अभिवादन" को एचआईएचटी का आदर्श वाक्य बनाया जो इस बात को याद दिलाते हुए कि हम सभी में एक ही ईश्वर विद्यमान है, छात्रों, संकाय सदस्यों और स्टाफ को अपने साथियों की नि:स्वार्थ और सप्रेम सेवा करने के लिए प्रेरित करता है। मैं इस महान संत द्वारा स्थापित शिक्षा, दया और प्यार के इस मंदिर में आकर गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

श्री स्वामी राम के उत्कृष्ट आदर्शों से प्रेरित होकर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय आज चिकित्सा, नर्सिंग, पैरा-चिकित्सा विज्ञान, जैव-विज्ञान, अभियांत्रिकी, प्रबंधन, अर्थशास्त्र और वाणिज्य में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर गुणवत्तायुक्त उच्च्तर शिक्षा प्रदान कर रहा है।

मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि हिमालयन इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एचआईएमएस) स्वास्थ्य परिचर्या के लिए एकीकृत और किफायती पहुंच विकसित कर रहा है जो न केवल स्थानीय जनता की आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि समग्र रूप से पूरे देश के लिए और विश्व भर में अल्प-सेवित जनसंख्या के लिए एक आदर्श बन सकता है।

मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि 1000 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के माध्यम से एचआईएमएस उत्तराखंड और उसके आसपास के राज्यों की ग्रामीण जनता को सस्ती कीमतों पर बहु-विशिष्ट और सामान्य स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रहा है। यह जानना अत्यंत हर्ष का विषय है कि स्माइल ट्रेन परियोजना के अंतर्गत यहां 9000 से भी अधिक कटे होंठ और तालू वाले बच्चों की नि:शुल्क प्लास्टिक सर्जरी की गई है।

यह जानकर भी संतोष होता है कि भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद ने वर्ष 2014 में चिकित्सा शिक्षा विभाग को क्षेत्रीय चिकित्सा शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में निर्दिष्ट किया है। मुझे बताया गया है कि यह इकाई सतत रूप से संकाय विकास कार्यक्रमों में नई और नवोन्मेषी शिक्षण तथा मूल्यांकन माध्यमों के विकास में लगी हुई है।

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि विश्वविद्यालय का कैंसर अनुसंधान संस्थान कैंसर नियंत्रण के सभी पक्षों जैसे रोकथाम, प्रारंभिक अवस्था में रोग निदान और उसका उपचार, शिक्षा, शोध तथा सामुदायिक सेवा पर ध्यान दे रहा है। सीआरआई, क्षेत्र में प्रमुख कैंसर केन्द्र बनने तथा उत्तराखंड एवं पड़ोसी राज्यों से कैंसर के मरीजों को रेफर किए जाने हेतु नोडल केन्द्र बनने के लिए पूर्ण रूप से सुसज्जित है। मैं यह सुनकर भी बहुत खुश हूँ कि आईसीएमआर ने कैंसर अनुसंधान संस्थान को शोध प्रयोजनों के लिए समन्वय केन्द्र के रूप में मान्यता प्रदान की है।

हमें प्राय: सुनने में आता है कि उपचार और स्वास्थ्य परिचर्या अब मरीज-केंद्रित नहीं रह गये हैं और मरीजों पर नैदानिक परीक्षणों, प्रक्रियाओं, दीर्घावधि तक अस्पताल में रोके जाने तथा निम्न स्तर की दवाओं का अनावश्यक बोझ डाला जाता है।

चिकित्सा स्नातकों को मेरी सलाह है कि आप मरीजों के कल्याण और सुख को ध्यान में रखते हुए अपने चिकित्सा व्यवसाय को नैतिक कार्य में रूपांतरित करें।

प्राचीन भारतीय चिकित्सक, चरक ने ठीक ही कहा था, "न अपने लिए और न ही किसी लाभ की पूर्ति के लिए, बल्कि मैं अपनी कला का उपयोग विषादग्रस्त मानवता के कल्याण के लिए करते हए उत्कृष्टता अर्जित करूंगा। जो बीमारियों के उपचार का क्रय-विक्रय हेतु सामग्री की भांति व्यापार करते हैं, वे स्वर्ण की अनदेखी करते हैं और रजकण एकत्र करते हैं।

नर्सें मरीजों को अत्यावश्यक करूणामयी स्पर्श देकर उनकी देखभाल तथा उपचार में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। मुझे यह सुनकर प्रसन्नता हुई है कि हिमालयन नर्सिंग कॉलेज (एचसीएन) नर्सिंग में डिप्लोमा, स्नातक एवं स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी प्रदान कर रहा है।

एचसीएन में प्रदान की जाने वाली शिक्षा हमारे देश में नर्सों की कमी की समस्या को दूर करने में बहुत सहायक सिद्ध होगी। चूंकि नर्सों को कार्यस्थल पर लंबे कार्य-घंटों तथा गैर नर्सिंग भूमिकाएं निभाने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, एक सकारात्मक कामकाजी माहौल, कार्य संतुलन, समुचित भर्ती तथा उन्हें टिकाए रखने संबंधी नीतियों से इन चुनौतियो पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।

यह अच्छी बात है कि एचसीएन सशक्त नर्सें बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें न केवल मरीजों की देखभाल के लिए ही प्रोत्साहित किया जाता है, बल्कि वे सामुदायिक विकास, मरीज के हित तथा परामर्श में भी शामिल रहती हैं।

प्रबंध छात्रों का एक साझा, सशक्त और समर्पित दृष्टिकोण देश और उसकी अर्थव्यवस्था को सही आकार देने में एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावकारी भूमिका निभा सकता है। मुझे बताया गया है कि एसआरएचयू स्थित हिमालयन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्ट्डीज़ (एचएसएमएस) में छात्र केवल प्रबंध की कला एवं विज्ञान में ही पारंगत नही किए जाते हैं वरन् उन्हें नैतिक मूल्य भी प्रदान किए जाते हैं और उन्हें निरंतर ज्ञानार्जन, शोध तथा नवोन्मेषण की संस्कृति स्थापित करके संपूर्णता में विकास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह दृष्टिकोण कारोबार एवं समुदाय के साथ एक सार्थक तारतम्य स्थापित करने के लिए ऐसे नेता तैयार करने में सहायक होगा जिनमें नैतिक मूल्य सामाहित हों। छात्रों को रोजगार एवं उद्योग के लिए योग्य बनाने हेतु यह प्रशंसीय है कि उद्योग और शैक्षणिक समुदाय के बीच के अंतर को पाटने के लिए तथा साथ ही उद्योग-केंद्रित कौशलयुक्त कर्मचारी तैयार करने की सर्वाधिक प्रभावी रणनीतियों की पहचान करने के लिए भी सम्मेलन, गोलमेज सम्मेलन तथा संगोष्ठियों जैसे दोनों की सहभागिता मंच बारम्बार आयोजित किए जा रहे हैं।

उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलों में अपार संभावनाएं हैं। प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, विशेषकर पर्यटन, कृषि एवं स्वास्थ्य परिचर्या उद्योग के लिए निवेश गंतव्य के रूप में राज्य के आकर्षण में वृद्धि करता है। एचएसएमएस के होटल प्रबंधन में कौशल विकास पाठ्यक्रम, युवाओं को राज्य में पर्यावरण केंद्रित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कौशल से युक्त करेंगे।

मैं एचएसएमएस के स्नातकों को याद दिलाना चाहूंगा कि प्रभावी संवाद, स्व-प्रबंधन, नवोन्मेष, भावनात्मक सूझ-बूझ, आत्म-ज्ञान (स्वयं की क्षमताओं एवं सीमाओं को जानना) जैसे व्यक्तिगत गुण आपको कारोबार तथा मानव सेवा दोनों में ही, जीवन के उचित प्रयोजन में आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाएंगे।

अनंत काल से, इंजीनियरी ने वृहत भूमिका निभायी है और मानव सभ्यता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर विकसित हुई है। यह प्रत्येक राष्ट्र के कल्याण और आर्थिक विकास का केन्द्र बिंदु रही है। हमारे जैसे विकासशील देश के संदर्भ में, इंजीनियरी अवसंरचना के विकास में और गरीबी और बेरोजगारी के उन्मूलन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इंजीनियरी को कई अन्य विधाओं की तरह तेजी से बदलती हुई प्रौद्योगिकीय उन्नति के साथ तालमेल बनाए रखना होता है और मुझे खुशी है कि उभरती हुई चुनौतियों का सामना करने के लिए पाठ्यक्रम को लगातार अद्यतन बनाया जा रहा है और नए पाठ्यक्रमों को जोड़ा जा रहा है। नैनोटेक्नॉलॉजी, लाजिस्टिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी और हाई परफार्मेंस कम्प्यूटिंग ने भावी इंजीनियरों के लिए अवसरों की अनेक संभावनाएं खोल दी हैं।

मुझे आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत सरकार की भारत को एक अधिकांशत: कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से बदलकर एक विनिर्माण और सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था में विविधीकृत करके एक प्रतिस्पर्धी, उच्च-विकास, उच्च उत्पादकता वाला मध्यम आय देश बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के परिणामस्वरूप कुशल श्रम की मांग में वृद्धि होगी। सरकार के हाल के कौशल-अंतर विश्लेषण में यह निष्कर्ष निकला है कि वर्ष 2022 तक अर्थव्यवस्था के 24 प्रमुख क्षेत्रों में 100 मिलियन से अधिक कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी।

मैं बेहतर आजीविका की खोज में युवाओं का ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में प्रवास के संबंध में एक और गंभीर चिंता को उजागर करना चाहता हूं। इस प्रवृत्ति को पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के दृष्टिकोण को लागू करके परिवर्तित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने गांवों से शहरों की ओर लोगों के प्रवास को रोकने के लिए पुरा' (ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करना) की अवधारणा तैयार की। यहां मैं गांवों, जो भारतीय समाज की बुनियादी सांस्कृतिक इकाइयां हैं, के चंहुमुखी विकास में सरकारों के प्रयासों में सहायता देने के लिए उद्योगों, निगमों और गैर-सरकारी संगठनों से अपील करना चाहता हूं। प्रवासन को रोकने का समाधान उद्यमिता का पोषण करने, व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन देने में निहित है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) अपने पराचिकित्सीय डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से और आईएल एंड एफएस के साथ सहयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन से कौशल अंतर को समाप्त करने में अपनी भूमिका निभा रहा है। मुझे बताया गया है कि एसआरएचयू छात्रों के बीच उद्यमिता कौशल को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) के साथ मिलकर काम कर रहा है।

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए और मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि हिमालयन संस्थान अस्पताल न्यास 1200 गांवों में स्वास्थ्य देखभाल और शैक्षिक सेवाएं प्रदान कर रहा है। मुझे बताया गया है कि इसने पहाड़ी क्षेत्रों में 325 से अधिक दूरस्थ गांवों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया है और 14,000 ग्रामीण परिवारों, 40 स्कूलों और 10 आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए शौचालयों का निर्माण किया है।

मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि मानविकी और योग छात्रों और नए संकाय के लिए पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग हैं और उन्हें व्याख्यान और व्यावहारिकता के हर्षित जीवन विज्ञान कार्यक्रम के माध्यम से श्री स्वामी राम की शिक्षाओं की जानकारी मिलती है। ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें आधुनिक जीवन के तनावों और दबावों पर काबू पाने में मदद मिल सकती है और उन्हें पता चलता है कि कैसे अधिक रचनात्मक और ऊर्जस्वी व्यक्ति बना जा सकता है।

प्रिय युवा मित्रों, आज का दिन आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि आज आप अपने पदक और डिग्री प्रमाणपत्र प्राप्त करेंगे। लेकिन स्मरण रहे कि यह आपके सीखने का अंत नहीं है। वास्तव में, जीवन सीखने की एक सतत प्रक्रिया है और जब आप इस संस्था के द्वार से बाहर निकलेंगे और नई चुनौतियों का सामना करेंगे, हर पल में आप नई चीजें सीखेंगे। औपचारिक शिक्षा आपको रोजगार पाने में सक्षम बनाती है, लेकिन असली चुनौती तब होगी जब आपके जीवन-कौशल का परीक्षण किया जाता है। आप को समता के साथ जीवन का सामना करना चाहिए - चाहे निराशाएं हों या सबसे अधिक उत्साहित क्षण - आपको पूर्ण संयम के साथ उनका सामना करना चाहिए। बड़ा सपना देखने की हिम्मत करें और अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करें। कुछ निराशाजनक घटनाओं को अपने रास्ते की बाधा न बनने दें।

आज की शिक्षा से विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के अलावा उन्हें बहु-कुशल बनाने और उन्हें तकनीकी रूप से बदलते हुए विश्व में भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने का कार्य करना चाहिए। व्यक्ति के समग्र विकास पर बल दिया जाना चाहिए।

मित्रो, आज भारत सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और आपके पास पर्याप्त अवसर हैं। मेरी आप सभी के लिए सलाह है कि केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, अपितु रोजगार सर्जक बनने का भी प्रयास करें। रचनात्मक, अभिनव, गैर-परंपरावादी रहें और नए क्षेत्रों का पता लगाने का प्रयास करें। असफलताओं से भयभीत न हों। समर्पण, जोश, प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत, अनुशासन और अध्यवसाय से आप अपने सपनों को साकार कर सकेंगे और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे।

भारत जनसांख्यिकीय दृष्टि से एक विशिष्ट लाभप्रद स्थिति में है क्योंकि लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु वर्ग की है। इस जनसांख्यिकीय क्षमता का पूरी तरह से आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और नए भारत को दुनिया की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में से एक बनाने के लिए पूरी तरह से उपयोग किया जाना चाहिए।

प्रिय छात्रो, आप हमारे राष्ट्र का भविष्य हैं और स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में प्राप्त व्यावसायिक शिक्षा के साथ अपने देश की सेवा करने के लिए आदर्श रूप से तैयार हैं। हमारे देश में भ्रष्टाचार को समाप्त करने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें समर्पित डॉक्टरों, नर्सों, प्रबंधकों और इंजीनियरों की जरूरत है।

आप अनंत संभावनाओं की एक रोमांचक दुनिया में कदम रख रहे हैं और आप के लिए मेरी सलाह है कि आप सक्रिय और स्फूर्तिमान, जिम्मेदार और उत्तरदायी, ग्रहणशील और सकारात्मक बनें।

प्रिय छात्रो, आप विश्वविद्यालय छोड़ने के बाद भी सीखते रहें ताकि आप लगातार अद्यतन जानकारी हासिल करते रहें और आप अपने क्षेत्र में अग्रणी रहें और गति-निर्धारक बनें। अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए आप मानवता के कल्याण को अपना अंतिम लक्ष्य बनाएं।

मैं एक बार फिर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं!

ईश्वर आप सबको आशीर्वाद दें!

जय हिन्द!