04 नवंबर, 2017 को हैदराबाद मेंफिक्की महिला संगठन द्वारा आयोजित बिल्डिंग ए न्यू इंडिया समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का भाषण

हैदराबाद | नवम्बर 4, 2017

"मुझे महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य कर रहे और परिवर्तन के दूत बनने का प्रयास कर रहे आप सभी के साथ 'नए भारत' के निर्माण पर अपने विचारों को साझा करने में अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मुझे यह जानकर खुशी है कि फिक्की महिला संगठन आत्मनिर्भरता से अपना काम कर रहा है और महिलाओं, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले वर्गों की महिलाओं को सशक्त बनाने की विभिन्न पहलों पर तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर भी काम कर रहा है।

भारत आज एक प्रमुख आर्थिक शक्ति में परिवर्तित होने की दहलीज पर है। परिवर्तन की इस प्रक्रिया को त्वरित करने के लिए सभी भारतीयों को एक नए भारत और महात्मा गांधी, डॉ. बी. आर. अंबेडकर, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत के निर्माण के प्रति नए उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ काम करना होगा।

मित्रो, हम अब "चलता है" रवैये को नहीं अपना सकते हैं या चीजों को 'ये तो होना लिखा था' कहकर के स्वीकार नहीं कर सकते हैं और न ही हमारे चारों ओर की घटनाओं के प्रति उदासीन रह सकते हैं। जैसा कि राष्ट्रपिता ने कहा था: "आप जो बदलाव देखना चाहते हैं, वह बदलाव खुद बनो" - शुरूआत में हर किसी को अपने व्यक्तिगत स्तर पर काम करना शुरू करना चाहिए - चाहे वह एक गृहिणी हो, उभरता उद्यमी हो या कर्मचारी हो - सबको लैंगिक भेदभाव, महिलाओं पर अत्याचार, शिशुहत्या, कुपोषण, भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता और निरक्षरता जैसी सामाजिक बुराइयों से सक्रिय रूप से लड़ना चाहिए। आतंकवाद भारत की एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

समय बीतने के साथ-साथ हम भारतीयों ने एक अजीब रवैया या विश्वास विकसित किया है कि हर समस्या को सरकार द्वारा हल किया जाना चाहिए और व्यक्ति या समाज को बड़े पैमाने पर कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है। "सब कुछ सरकार करेगा, हम बेकार बैठेगा" - इस आधार-वाक्य को बदलना होगा और हर नागरिक को भारत को अपनी पूर्ण क्षमता सामने लाने में सक्षम बनाने में योगदान देना होगा।

इसे पूरा करने के लिए और नए भारत की कल्पना को साकार करने के लिए सभी वर्गों, विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं, जो देश की लगभग आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, को सबसे आगे रहना होगा।

नया भारत पूरी तरह से साक्षर होगा, भ्रष्टाचार से मुक्त होगा, हर परिवार के लिए घर होगा, मांग पर बिजली उपलब्ध होगी, श्रेष्ठ स्वास्थ्य-सेवा उपलब्ध होगी, युवाओं की रोजगार संबंधी आकांक्षाएं पूरी होंगी, महिलाएं सशक्त बनेंगी, किसानों की आय दोगुनी होगी तथा सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों द्वारा आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने से भारत एक आर्थिक महाशक्ति में परिवर्तित हो जाएगा। नि:संदेह, राजनेताओं और राजनीतिक दलों को अपने आचरण में अनुकरणीय बनना होगा।

प्राचीन काल से और हमारे धर्मग्रंथों में महिलाओं को शक्ति और नेतृत्व का दर्जा प्रदान किया गया है। हमारा लोकाचार और नैतिक मूल्य सदैव महिलाओं का सम्मान करते रहे हैं, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आधुनिक काल में अत्याचार की घृणित प्रवृत्तियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह दोहराने की आवश्यकता नहीं है कि महिलाओं पर अत्याचार करने वाले अपराधियों के विरूद्ध सबसे कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। यहां मैं स्वामी विवेकानंद जी के उद्गारों का स्मरण करना चाहूंगा : "राष्ट्र की प्रगति को मापने का सर्वश्रेष्ठ पैमाना यह है कि वहां की महिलाओं के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाता है।" हमारे ग्रंथों में कहा गया है "यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता:", जिसका अर्थ है कि जहां महिलाओं का सम्मान किया जाता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

जबकि महिलाओं को अंतरिक्ष से लेकर खेलकूद तक अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता मिली है, महिलाओं के सशक्तिकरण में राजनीतिक सशक्तिकरण सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में पंचायतों से लेकर संसद तक विभिन्न निकायों में अधिक से अधिक महिलाएं देखी जाएंगी। महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करना भी आवश्यक है। हमें पंचायतों की तर्ज पर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण देने की आवश्यकता है।

कहने की आवश्यकता नहीं है कि शिक्षा लड़कियों और महिलाओं को सशक्त बनाने का आधार है। कितना उचित कहा गया है कि एक महिला को शिक्षित करने का अर्थ है एक पूरे परिवार को शिक्षित करना। लैंगिक असमानता को समाप्त करना, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना, रोजगार कौशल प्रदान करना, रोजगार के अधिक अवसर सृजित करना और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना आदि का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तीकरण करना है। महिलाओं को शिक्षित करने के लाभों के संबंध में 219 देशों के आंकड़ों के आधार पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रजनन योग्य आयु की महिलाओं को शिक्षा के लिए प्रदान किए गए प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष से बाल मृत्यु दर में 9.50% की भारी कमी आती है।

सरकार ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' समेत कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य बाल लिंग अनुपात में गिरावट के रुझान को समाप्त करना है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि फिक्की महिला संगठन (एफएलओ), हैदराबाद खंड ने विशेषकर कमज़ोर वर्गों की महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रमों को शुरू किया है। मैं स्कूलों में महिलाओं के लिए वाहनचालक, दर्जी और सुरक्षा कार्मिक बनने के लिए प्रशिक्षण देने के लिए एक सुविधाकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए एफएलओ को शुभकामना देता हूं।

महिला उद्यमियों के लिए एक परामर्शदाता और संरक्षक समूह के रूप्‍ में एफएलओ का 'स्वयम' भी एक प्रशंसनीय पहल है।

अंत में, मैं देश के हर नागरिक का आवाह्न करूंगा कि वह ऐसे नए भारत के निर्माण के लिए प्रयास करे जिसमें प्रत्येक भारतीय की आकांक्षाएं और सपने पूरे हों और जहां कोई भी पीछे नहीं छूट जाए।

धन्यवाद! जय हिंद!"