01 दिसंबर, 2017 को नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के बावनवें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | दिसम्बर 1, 2017

‘India’s First Line of Defence’ के बहादुर अधिकारियों और जवानों, प्रहरी परिवार तथा मीडिया सदस्यों, देवियों और सज्जनों,

  1. आज का दिन न सिफ सीमा सुरक्षा बल के लिये, बल्कि पूरे देश के लिए विशेष महत्व का है। आज सीमा सुरक्षा बल अपनी बावनवीं वर्षगांठ मना रहा है। इस अवसर पर राष्ट्र आप सभी सीमा सुरक्षा बल सदस्यों को बधाईयां देता है। साथ ही यह देश कामना करता है कि पिछले बावन वर्षों से आपने जिस कुशलता से सीमाओं की रक्षा की है व अपनी सभी जिम्मदारियों को निभाते हुए देश को सुरक्षित रखा है, आपकी वह क्षमता दिन प्रतिदिन बढ़ती रहे।
  2. मैं इस अवसर पर आप सबके बीच आकर स्वयं को भाग्यशाली समझ रहा हूँ। आपने इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे आमंत्रित किया और मुझे सीमा सुरक्षा बल दिवस की इस भव्य परेड को देखने का अवसर दिया, इसके लिए मैं महानिदेशक सीमा सुरक्षा बल सहित आप सभी सदस्यों को धन्यवाद देता हूँ।
  3. एक अनुकरणीय अनुशासन परेड के शानदार प्रदर्शन के लिये मैं परेड के सभी दलों की सराहना करता हूँ।
  4. वीर सीमा प्रहरियों, सभी देशवासियों को आप पर गर्व है। पिछले बावन वर्षों से आपने निष्ठा से कर्त्तव्य निभाते हुए जिस तरह राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित रखा है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये, वह कम होगी। राजस्थान की तपती रेत से लेकर गुजरात के रण के दलदली इलाके सहित कश्मीर की बर्फीली चोटियों जैसे जटिल भौगोलिक परिवेश और कठिन से कठिन स्थितियों में भी आप सीमाओं पर निरंतर डटे रहते हैं। सीमापार से होने वाली गोलीबारी हो या फिर विभिन्न वस्तुओं की तस्करी सहित अन्य सीमावर्ती अपराध, देश को नुकसान पहुंचाने देश के दुश्मनों के खिलाफ आप फौलाद की तरह खड़े हैं। यह कहना उचित होगा कि आप जागते हैं तभी हम सो पाते हैं।
  5. इसके साथ ही सीमाओं पर आपकी मुस्तैदी और शत्रुओं के विरूद्ध आपकी जवाबी कार्रवाई, सीमावर्ती गाँवों के नागरिकों में आपके और देश की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास जगाती है। हालाँकि दुश्मन अब भी अपने नापाक इरादों से बाज नहीं आ रहा, फिर भी जिस तरह से आप उसके प्रहार को लगातार विफल कर रहे हैं, उससे वह बौखलाया जरूर है।
  6. चुनाव, दंगों इत्यादि ड्यूटियों सहित आपदा प्रबंधन में भी आप पूरी तत्परता से देश के साथ खड़े रहते हैं। मुझे इस बात पर गर्व हे कि आपकी ड्यूटियों में मानवाधिकारों का सम्मान निहित रहता है जिसके कारण आप पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का दोष नहीं लगता।
  7. समय कम है, अगर आपकी उपलब्धियों और राष्ट्र की रक्षा में आपके योगदान के बारे में कहने लगा जाये तो शायद घंटों का समय भी कम पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र अभियानों में आपकी भूमिकाएं, खेल के मैदानों की आपकी सफलताएं और समाज कल्याण के ढेर सारे कार्यक्रम आपको अलग पहचान देते हैं।
  8. साथियों, अक्तूबर महीने में श्रीनगर एयरपोर्ट के पास आपके कैंप पर हुए हमले को आपने जिस सामरिक कुशलता से विफल किया वह आपके युद्ध-कौशल एवं मजबूत इरादों को दर्शाता है। इस तरह की कार्रवाइयों ने आतंकवादियों को साफ संदेश दिया है कि हमारे सशस्त्र बल और हमारी सेनाएं उनके निबटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
  9. जैसा कि महानिदेशक सीमा सुरक्षा बल ने बताया कि राष्ट्र की प्रथम रक्षा पंक्ति के रूप में कार्य करते हुए 1856 सीमा प्रहरियों ने कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दी है। 2000 से भी अधिक वीरता के पदक इस बल के खाते में दर्ज है। ये बलिदान और ये सम्मान राष्ट्र की धरोहर है जिनपर देश को अभिमान है। देश की खातिर वीरगति को प्राप्त होने वाले इन सीमा प्रहरियों को शत-शत नमन।
  10. वीर सीमा प्रहरियों, आपको आधुनिक तथा शक्तिशाली बनाने के लिये सरकार निरंतर प्रयासरत है। हथियार उपकरणों की खरीद पर और आपकी सुविधाओं पर, सरकार एक भारी-भरकम राशि खर्च कर रही है। कल्याण की भी ढेर सारी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें से कुछ पर कार्य हो चुका है और कुछ विचाराधीन हैं। इन पर शर्मा जी प्रकाश डाल चुके हैं। फिर भी, भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मैं, आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि सरकार आपको शक्तिमान बनाने के लिये तथा आपके और आपके परिवार के कल्याण के लिये हर संभव कदम उठा रही है।
  11. हमारी संस्कृति अत्यंत प्राचीन है। अतीत में हमने कभी किसी भी देश पर आक्रमण नहीं किया। अपनी सांस्कृतिक विरासत में हम अत्यंत सुदृढ़ हैं। हमारा ध्येय समग्र मानवीय कल्याण है। यही हमारा दर्शन, यही हमारा धर्म है।यही हमारी अवधारणा है और यही हमारे व्यवहार में है। हम दूसरों के सामने कोई समस्या खड़ी नहीं करते। भारत सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। किन्तु दुर्भाग्यवश हमारा एक पड़ौसी हमारी भूमि में घुसपैठ करके समस्या खड़ी करना चाहता है। हमारा एक पड़ौसी आतंकवाद से लड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। दुर्भाग्यवश वह इसे आर्थिक रूप से पोषित और प्रोत्साहित करता है। विश्व में सभी आतंक के खतरे का अनुभव कर रहे हैं। पूरा विश्व आतंकवाद के दुष्परिणामों से अवगत है। किन्तु हमारा पड़ौसी इसमें और आगे बढ़ता जा रहा है।
  12. आतंकवाद की कोई जाति कोई धर्म नहीं होता। कोई अच्छा या बुरा आतंकवाद नहीं होता। आतंकवाद तो बस आतंकवाद होता है। यह मानवता का शत्रु है। समग्र विश्व को यह समझना है, और सयुंक्त राष्ट्र के द्वारा कड़ी कार्रवाई करने का प्रयास करना है।
  13. यदि सीमा पर कोई तनाव है तो वहाँ विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया जा सकेगा, राष्ट्र में विकास और अच्छे शासन को आगे बढ़ाने के लिए शांति की आवश्यकता है।
  14. प्रहरी साथियों, आपकी कर्त्तव्य भावना, बहादुरी और निष्ठा को नमन है। देश जानता है कि आपका जीवन कठिन है, आपकी राहें कंटीली हैं और आपका जीवन तपस्या व बलिदान की गाथा है। आपका यह त्याग करोड़ों देशवासियों को अमन-चैन प्रदान करता है तथा देश के विकास को गति देता है। देश की तरफ से मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आप निष्काम भाव से अपना धर्म निभाएं, देश आपके प्रति अपना फर्ज निभाएगा।

धन्यवाद, जय हिंद।