01 जुलाई, 2018 को नई दिल्ली में 125 भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों के समक्ष भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | जुलाई 1, 2018

• “विदेश मंत्री जी, विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री जी, विदेश सचिव, उपराष्ट्रपति के सचिव और मिशन प्रमुखों,

आज दिल्ली में 9वें मिशन प्रमुख सम्मेलन के लिए एकत्रित हुए हैं मिशन प्रमुखों के साथ संवाद करना है मेरे लिए हर्ष का विषय है।

यह हमारी विदेश नीति पर विचार करने, चर्चा करने और उसे बेहतर बनाने का अवसर है।

आप सभी विश्व में प्रवक्ता, व्याख्याकार और भारत का वृतांत सुनाने वाले कथाकार हैं।

आप ऐसे शिल्पकार हैं, जो समझबूझ, सराहना और सामूहिक उन्नति का पुल तैयार करते हैं।

हम सभी आज एक ऐसे विश्व में रह रहे हैं, जो पहले की तुलना में आपस में अपेक्षाकृत अधिक जुड़ा हुआ है। हम एक ऐसे विश्व में भी रह रहे हैं, जो कई अभूतपूर्व तरीकों से तेजी से बदल रहा है।

बदलते हुए वैश्विक भू-राजनैतिक और भू-आर्थिक परिदृश्य के लिए एक नई कुशल, ध्यानपूर्वक रणनीतिक राजनयिक प्रतिक्रिया आवश्यक है।

समेकित विश्व व्यवस्था की स्वीकृत आवश्यकता के बावजूद, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध व्यापार तथा लोगों के आवागमन के लिए नई 'दीवारें' खड़ी की जा रही हैं। संरक्षणवाद की तरफ इस तरह वापस लौटने से सामूहिक उन्नति के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।

मौजूदा विश्व व्यवस्था में 'अशांति' के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं।

विश्व की विभिन्न राजधानियों में भारत के प्रतिनिधियों के तौर पर आपको इस प्रकार की अशांति के कारणों और परिणामों को समझने के लिए सचेत, कुशल और चौकन्ना रहता चाहिए।

मित्रो,

हमें आतंकवाद और आन्तरिक तौर पर वैश्विक वित्तीय संरचना का विध्वंस करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए।

इस प्रकार के अपराधी बंदूक थामने वाले आतंकवादियों से अधिक नहीं तो उतना ही बड़ा खतरा है। ये भगौड़े लूटो और भागों की नीति अपनाते है और वित्तीय तबाही के विनाशकारी परिणामों का मंजर पीछे छोड़ जाते हैं।

वे जिनती आसानी से कानून के लंबे हाथों से बचकर अन्य देशों में सुरक्षित पनाह पाते हैं, वह एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय है।

वैश्विक समुदाय द्वारा इसका पूर्ण रूप से समाधान किया जाना आवश्यक है।

अब समय आ गया है कि इस पर प्रभावी और संगठित तौर पर वैश्विक कार्रवाई की जाए। अन्यथा, वैश्विक अर्थव्यवस्था का देर-सवेर पटरी से उतरने का जोखिम बना हुआ है।

प्रत्यर्पण संधियों और सभी द्विपक्षीय एवं बहु-पक्षीय करारों में आमूल-चूल परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है।

सामूहिक हित के लिए समेकित वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का संरक्षण किया जाना समय की मांग है।

मित्रो,

इस विश्व को स्थायी विकास हेतु संयुक्त राष्ट्र के परिवर्तनकारी, महत्वकांक्षी एजेंडा 2030 के अनुरुप हमारी अभिलाषा वाली दुनिया में रुपांतरित करने के लिए विश्व को भारत की आवश्यकता है।

विश्व को भारत की आवश्यकता केवल इसलिए नहीं है कि यहां लगभग 1.3 विलियन लोग निवास करते हैं जो मानवता का छठवां भाग है।

विश्व को भारत की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इस ग्रह की समस्याओं और चुनौतियों के समाधान के लिए मानवीय, समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

विश्व को भारत की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इसे वह मानव चाहिए जो शांति, अहिंसा और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की बात करता हो।

विश्व को भारत की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इसे संवाद और चर्चा, सहयोग और सहकारिता की क्षमता का लाभ उठाने की आवश्यकता है।

भारत गत बीस सदियों से इसी दृष्टिकोण और मत, इसी रूख और विश्वास का समर्थक रहा है। भारत का यह दृष्टिकोण और मत विश्व के लिए पहले की अपेक्षा कहीं अधिक प्रासंगिक है। हमारी सभ्यता का मूलभूत सिद्धान्त जिसमें विश्व को 'वसुधैव कुटुम्बकम' कहा गया है, हमें अशांति के इस दौर में वैश्विक संवाद को प्रभावित करने की नैतिक शक्ति प्रदान करता है।

भारत के शांति और सहिष्णुता, समावेशन और सहयोग, देखभाल और सहभाजन के कतिपय वैश्विक मूल्य हमारे ग्रह को बेहतर स्थान बना सकते हैं।

मुझे यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि भारत ने दीर्घकालिक विकास समाधान में अग्रणी स्थान बनाया है।

पेरिस में सीओपी 21 के अवसर पर भारत की पहल से प्रारंभ किया गया अन्तर्राष्ट्रीय और ऊजा गठबंधन एक ऐसा ही उदाहरण है।

आपको इसी प्रकार का नेतृत्व प्रदान करने और यथा संभव अधिकाधिक क्षेत्रों में वैश्विक कार्यक्रम का निर्धारण करने और उनके कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाने के अवसरों की अनवरत तलाश करनी चाहिए।

मित्रो,

देश के राजदूतों के तौर पर आप विदेशी श्रोताओं तक हमारे देश की दास्तान पहुंचाते हैं।

मुझे विश्वास है कि आप देश के विशिष्ट सांस्कृतिक कोष और कालातीत मूल्यों का निपुणता से चित्रण करते हुए भारत का कथानक तैयार करने और आर्थिक विकास के मौजूदा चरण के उत्साह तथा समकालीन भारत में परिवर्तनकारी गति का सजीव चित्रण करने में सक्षम हैं।

जैसाकि आप जानते हैं, यह हमारा सामूहिक प्रयास रहा है कि हमारी विदेश नीति के निर्माण और कार्यान्वयन को दृढतापूर्वक घरेलू विकास कार्यक्रम के साथ सहबद्ध किया जाना चाहिए। भारत ने हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व में मुख्य पहले प्रारंभ की हैं जिनमें विकास के पहलुओं जैसे 'मेक इन इंडिया', 'स्किल इंडिया', 'स्मार्ट सिटीज' और 'स्टार्ट अप इंडिया' पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। हमने कई उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्त की हैं, हालांकि कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं।

मुझे आपके और उन लोगों के बीच सतत संवाद की आवश्यकता महसूस होती है, जो देश में विकास पहलों का कार्यान्वयन कर रहे हैं। सूचना के इस आदान-प्रदान की मौजूदा प्रणाली को और अधिक अर्थपूर्ण होना चाहिए, जहां उभरते हुए अवसरों पर चर्चा की जा सके और बाध्यकारी अवरोधों का अभिनिर्धारण करके उन्हें दूर किया जा सके।

विश्व भर में, कूटनीति में आर्थिक आयामों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि, आशावादी विकास दर और वैश्विक कारोबारी समुदाय की भारत में बढ़ती हुई रूचि से आर्थिक पुनरूत्थान हो रहा है। अवसंरचना, विनिर्माण स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश से हम उच्चतर विकास दर प्राप्त करने की स्थिति में है जिससे हमें गरीबी समाप्त करने में सहायता मिलेगी।

मिशन प्रमुखों को व्यापार, सेवाओं, निवेश और अवसंरचना के क्षेत्रों में अवसरों का लाभ उठाते हुए इस गति का फायदा उठाने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। आपको सक्रिय रहना चाहिए ताकि भारतीय उद्योग और कारोबार विश्व बाजारों का लाभ बढ़ा सकें। आपको भारत में विदेशी निवेश प्रवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए।

प्रवासी भारतीय हमारे देश की एक बड़ी ताकत हैं। मिशन प्रमुखों को प्रवासी भारतीयों के हितों का संरक्षण करते हुए तथा उनके कल्याण का ध्यान रखते हुए उनकी सहभागिता से इस ताकत का सकारात्मक लाभ उठाने का प्रयास करना चाहिए। वे हमारे देश के लिए ताकत का एक बड़ा स्रोत हैं। यह सुनिश्चित करना हम सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है कि उनके प्रयासों और सदभावना की सराहना की जाए और उनको उपयुक्त दिशा प्रदान की जाए।

मित्रो,

यह महत्वपूर्ण है कि ब्रांड इंडिया, जिसे विदेशों में उतारा गया है, वह हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक पुनरुत्थान के सही मिश्रण के तौर पर हो।

मैंने पूर्व में कहा था विश्व को भारत की आवश्यकता है। अब मैं इसमें यह जोड़ना चाहता हूं कि भारत को भी विश्व की आवश्यकता है। हमें विश्व भर की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं से सीखने और उनका लाभ उठाने की आवश्यकता है।

भारत एक शक्तिशाली देश है और इसकी ताकत बढ़ती जा रही है क्योंकि हम विश्व भर के श्रेष्ठ विचारों को अपनाने के लिए तैयार हैं। हमारे प्राचीन ऋषियों ने भी यही कहा था जब उन्होंने कहा: "आ नो भद्रह क्रतावो यंतु विश्वथाहा" "हमें दुनिया भर से महान विचारों की प्राप्ति हो।" हम महान विचारों का स्वागत करते हैं, ऐसे विचार जो शांति, कल्याण और विकास के अनुरूपी हो, ऐसे विचार जो घृणा, हिंसा और असमानता को कम करते हैं।

चूंकि आप अन्य देशों के साथ वार्तालाप की कला में सम्पूर्ण तौर पर अभ्यस्त हो जाते हैं और आप सावधानीपूर्वक 'अपरक्राम्य' को 'परक्राम्य' में परिवर्तित करने का प्रयास करते है, तो मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप अपने प्रत्येक वक्तव्य और आपके द्वारा विभिन्न मंचों पर अपनाए गए दृष्टिकोण को दो महत्वपूर्ण सिद्धान्तों के आलोक में परखें। "क्या इससे विश्व शांति और समृद्धि को बढ़ावा मिलता है?" और इससे हमारे राष्ट्रीय हितों का संरक्षण होता है?"

गत चार वर्षों के दौरान, प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की छवि और स्थिति में उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण सुधार किया है।

मुझे अत्यधिक खुशी है कि हमारी सक्रिय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी और दो राज्य मंत्रियों श्री एम.जे. अकबर जी और श्री बी.के. सिंह जी ने आप सभी के लिए उत्कृष्टता के मानक स्थापित किए हैं और गत चार वर्षों में लगभग सम्पूर्ण विश्व को कवर करते हुए असाधारण सहभागिता रणनीति सुनिश्चित की है। मुझे खुशी है कि इस अभूतपूर्व पहुंच के अतुलीन परिणाम मिल हैं।

मैं आप सभी को आपके नियत कार्यों में सफलता की शुभकामनाएं देता हूं।

जय हिन्द!