हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतांत्रिक शासन के लाभ हमारे देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे : उपराष्ट्रपति उन्होंने सर्तकता जागरूकता सप्ताह का उद्घाटन किया

नई दिल्ली
अक्टूबर 30, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतांत्रिक शासन के लाभ हमारे देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने यह बात केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा आज यहाँ आयोजित 'मेरा लक्ष्य - भ्रष्टाचार मुक्त भारत" विषयवस्तु सहित 'सतर्कता जागरूकता सप्ताह' का उद्घाटन करने के पश्चात सभा को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधान मंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह; मंत्रिमण्डल सचिव, श्री पी. के. सिन्हा, केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त, श्री के. वी. चौधरी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुँच कर उस पर प्रहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए हमें निरंतर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है कि हमारे इस विशाल सुंदर वृक्ष रूपी देश को खरपतवार और हानिकारक जीव अपना शिकार न बना सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सम्पूर्ण प्रणालियों का कायाकल्प करके इस वृक्ष रूपी देश को लगातार सुरक्षित, संरक्षित और पुष्ट बनाए रखा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि जहां तक शासन का संबंध है सरदार पटेल ने भारतीय परंपरा के बेहतरीन मूल्यों का प्रतिनिधित्व किया, उन्होंने देश को एकीकृत किया और सार्वजनिक जीवन में वे सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दीप्तिमान उदाहरण थे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सरदार वल्लभभाई पटेल के संदेशों और उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उपराष्ट्रपति जी ने यह भी कहा कि यथार्थवाद के प्रति उनकी समझ-बूझ और मुद्दों के प्रति उनके व्यावहारिक रूख के कारण ही वह चुनौतियों का सामना कर सके और अपने सफल नेतृत्व के गुणों को प्रदर्शित कर सके।

उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि ईमानदारी और सत्यनिष्ठा सामाजिक पूंजी के अनिवार्य घटक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये घटक किसी भी समाज तथा देश की आर्थिक पूंजी तथा बौद्धिक पूंजी के मूल्य को बढ़ाने में योगदान देते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कानून की प्रक्रियाएं और उनका कार्यान्वयन इस प्रकार का हो कि वह अपेक्षाकृत अधिक नागरिक-केन्द्रित बन सके। उन्होंने कहा कि किसी परेशानी, अनावश्यक विलम्ब और भ्रष्ट प्रणालियों के बिना ही गुणवत्तायुक्त सेवाओं तक प्रत्येक नागरिक की पहुंच होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ठोस मूल्यों, नैतिक आचरण और व्यापक रूप से समाज के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता की भावना उत्पन्न करने के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्रीय सतर्कता आयोग विद्यालयों और महाविद्यालयों में 'इंटेग्रिटी (सत्यनिष्ठा) क्लब' का संवर्धन करने का प्रयास कर रहा है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस पहल से भविष्य में बेहतरीन परिणाम मिलेंगे। उन्होंने भ्रष्टाचार के अभिशाप का सामना करने के लिए आयोग के संगठित प्रयासों की सराहना की।

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