हमें मातृभाषाओं का सम्मान, संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना चाहिए: उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने असम साहित्य सभा के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया

नई दिल्ली
नवम्बर 30, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि हमें मातृभाषाओं, अपनी मूल भाषा और स्वदेशी भाषाओं का सम्मान, संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना चाहिए। वह आज यहाँ असम साहित्य सभा के शताब्दी समारोह का उद्घाटन करने के उपरांत सभा को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने महात्मा गाँधी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा, "राष्ट्र की संस्कृति राष्ट्र के लोगों के हृदय और आत्मा में बसती है।" उन्होंने यह भी कहा कि इसी प्रकार साहित्य न केवल लेखकों और कवियों की सृजनात्मक कल्पना को समाहित करता है, अपितु समाज की वास्तविकताओं को भी प्रतिबिम्बित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य सामाजिक रीति-रिवाजों, संस्कृति और समाज की सभी अच्छाईयों और बुराईयों को प्रतिबिंबित करता है।

उपराष्ट्रपति ने असम साहित्य सभा के गठन के बाद 10,000 से अधिक पुस्तकों को प्रकाशित करने और असमिया शब्दकोश 'चन्द्रकांता अभिदान' के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी सभा की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की की असम साहित्य सभा ने भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक विशेषताओं का अध्ययन करने के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में असम सांस्कृतिक विश्वविद्यालय स्थापित करने की पहल की है। उन्होंने 'असम के लेखकों का विश्वकोष' और 'असम के चाय और चाय कार्मिकों का विश्वकोष' पर कार्य करने हेतु सभा की सराहना की।

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