साहित्यिक लेखन से समाज में समरसता, प्रेम और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलना चाहिए: उपराष्ट्रपति "समीप्य" पुस्तक प्रथम प्रति प्राप्त हुई

नई दिल्ली
दिसम्बर 21, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने साहित्यकारों से सामाजिक मुद्दों विशेषकर समाज में समरसता, प्रेम और सामाजिक समानता बढ़ाने वाले विषयों पर लिखने का आह्वान किया। वे आज यहां भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकारी तथा वर्तमान में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य, श्री प्रेम नारायण द्वारा लिखित पुस्तक "सामीप्य" की प्रथम प्रति प्राप्त करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को भविष्य की सोच रखने वाला और चिंतनशील होना चाहिए केवल तभी वास्तविक लक्ष्य एवं वास्तविक विकास साकार हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दी लेखकों को इस प्रकार का साहित्य सृजन करना होगा जो देश के सभी हिस्सों में आसानी से समझा जा सके और स्वीकृत हो। उन्होंने यह भी कहा भारतीय आबादी में भिन्न-भिन्न भाषाओं के साहित्यों का समामेलन जिनके मूल्य मुख्य रूप से साझा हो, बहुत महत्वपूर्ण हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के युवाओं का साहित्यिक संसार के साथ संबंध और परस्पर आदान-प्रदान होना चाहिए जिससे वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहें और भारत में मौजूद सॉफ्ट पावर में शीर्ष पर बने रहे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया है और यह कभी भी आक्रांता नहीं रहा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सदैव संगीत, चिकित्सा और साहित्य के क्षेत्र में अन्यों से आगे रहा है। इस देश में पैदा होने वाले प्रत्येक भारतीय में कोई-न-कोई छिपी हुई प्रतिभा होती है जैसे बुनकर, मछुआरे और अन्य। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को कौशल विकास जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।

Is Press Release?: 
1