श्री अशोक सिंघल एक अनुकरणीय व्यक्ति थे, जिन्होंने समाज की निस्वार्थ सेवा की : उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने अशोक सिंघल : स्टॉन्च एण्ड पर्सिवियरेन्ट एक्सपोनेन्ट ऑफ हिंदुत्वा पुस्तक का विमोचन किया

नई दिल्ली
दिसम्बर 7, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि श्री अशोक सिंघल एक अनुकरणीय व्यक्ति थे, जिन्होंने स्वयं को प्रचारक के रूप में निस्वार्थ रूप से समर्पित किया और छह दशकों से अधिक तक समाज की निस्वार्थ सेवा की। वह आज यहां श्री महेश भागचंदका द्वारा लिखी गई पुस्तक 'अशोक सिंघल: स्टॉन्च एण्ड पर्सिवियरेन्ट एक्सपोनेन्ट ऑफ हिंदुत्वा' के विमोचन के पश्चात एक जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत माता मंदिर, हरिद्वार के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अशोक सिंघल हिंदु धर्म के सर्वोत्कृष्ट पैरोकार थे और उन्होंने भावी पीढ़ियों के हित के लिए अपने जीवन के 75 वर्ष न्यौछावर कर दिए। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान और अभियांत्रिकी का छात्र होने के बावजूद उन्होंने गंगा के तट पर बैठकर धर्म, समाज और संस्कृति पर चिंतन करना अधिक पसंद किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कांग्रेस के कई लोगों द्वारा उनसे महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी के आंदोलन से जुड़ने का आग्रह किए जाने के बावजूद श्री सिंघल ने डॉ. के. बी. हेडगेवार के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़ना पसंद किया और अपना संपूर्ण जीवन संघ को समर्पित कर दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक हिंदू धर्म के आदर्शों के लिए समर्पित भारत के शीर्षतम नेता श्री सिंघल के जीवन, दर्शन, दृष्टि एवं विचारों पर प्रकाश डालती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पुस्तक में कहा गया है 'हमारा लक्ष्य इस देश के हर कोने के साथ-साथ विदेशों तक पहुंचना है ताकि विश्व के सभी महत्वपूर्ण लोग हिंदू धर्म और हिंदू जीवन पद्धति की झलक देख सकें।'

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह इतने सौभाग्यशाली हैं कि उन्होंने सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गौरव की पुनर्स्थापना की दिशा में श्री सिंहल के समर्पण को करीब से देखा है और उनकी सराहना तथा प्रशंसा कर पाए हैं और उन्होंने यह आशा भी व्यक्त की कि भावी पीढ़ियां देश के प्रति उनके योगदान को सराहेंगी और राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए कर्तव्यपालन की भावना से प्रेरित होंगी।

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