शिक्षा सर्वाधिक शक्तिशाली शस्त्र है, जो विश्व का कायाकल्प कर सकती है: उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान के आंध्र प्रदेश कैंपस का उद्घाटन किया।

अमरावती, आंध्र प्रदेश
नवम्बर 28, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु, ने कहा है कि शिक्षा सर्वाधिक शक्तिशाली शस्त्र है, जो विश्व का कायाकल्प कर सकती है। वह आज वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान, अमरावती, आंध्र प्रदेश के आंध्र प्रदेश कैंपस का उद्घाटन करने के पश्चात जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री एन. चन्द्रबाबू नायडु, स्वास्थ्य और आयुर्विज्ञान शिक्षा मंत्री, डा. कामिनेनी श्रीनिवास और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षिक संस्थाएं शिक्षा की मंदिर होती हैं और उस प्रत्येक विद्यार्थी को, जो इनमें प्रवेश लेता है, न केवल अपने गुरूओं के प्रति श्रद्धा भाव रखना चाहिए, वरन् उसे शिक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया के प्रति पूर्ण समर्पण और अनुशासन का भाव भी रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमारी प्राचीन गुरू-शिष्य पंरपरा के अनुसार, शिक्षक अपने शिष्य के लिए अति आदरणीय व्यक्ति होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि आधुनिक युग के विद्यार्थी गूगल पर जाकर माउस क्लिक करके समस्त अपेक्षित सूचना प्राप्त कर सकते हैं तथापि इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि गूगल कभी भी गुरू को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा का प्रयोजन मोक्ष, ज्ञानोदीप्ति, सशक्तिकरण, रोजगार और समानुभूति प्राप्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा को देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूपांतरण के एक सशक्त औजार के रूप में विकसित करना होगा और यह रूपांतरण सशक्त नैतिक और नीतिपरक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी इतनी तेजी से बदल रही है कि विद्यार्थियों को केवल भावी आवश्यकताओं के संबंध में ही अनुमान लगाने की आवश्यकता नहीं है, वरन् उन्हें भविष्य की प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में भी सक्षम बनाना होगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब भारत भी लाभप्रद स्थिति में है, क्योंकि इसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। उन्होंने यह भी कहा कि जनसांख्यिकीय लाभ प्राप्त करने और युवा वर्ग की ऊर्जा को दिशा प्रदान करने में उच्च शैक्षिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा संबंधी यूनेस्को आयोग द्वारा वर्ष 1996 में यथा प्रतिपादित शिक्षा के चार स्तंभों पर जोर दिया:

  1. जानने के लिए सीखना (ज्ञान)
  2. कुछ करने के लिए सीखना (कौशल)
  3. कुछ बनने के लिए सीखना (व्यक्तित्व)
  4. मिल जुल कर रहना सीखना (सहभागिता)

उपराष्ट्रपति ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि वी.आई.टी. से तात्पर्य, वेल्लोर इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नोलॉजी है, परंतु वह चाहते हैं कि वीआईटी के आन्ध्र प्रदेश कैंपस का अर्थ निम्नानुसार हो:-

  • परिकल्पना (विजन)
  • नवाचार (इन्नोवेशन)
  • • इस संस्थान में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का रूपांतरण (ट्रांसफॉर्मेशन)।
Is Press Release?: 
1