शिक्षा भारत का कायाकल्प करने का प्रमुख साधन है: उपराष्ट्रपति सच्ची शिक्षा हमें विनम्रता सिखाती है जिससे हमें यह ज्ञात होता है कि हमें अभी कितना अधिक सीखना है: भारत के उपराष्ट्रपति

चेन्नई
जनवरी 17, 2018

श्री एम वेंकैया नायडु ने चेन्नई में द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (टीएनआईई) द्वारा आयोजित 'थिंक-एडू कॉन्क्लेव' के छठे संस्करण में उपस्थित जन सभा को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने कहा है कि शिक्षा भारत का कायाकल्प करने का एक प्रमुख साधन है। उन्होंने आज चेन्नई में द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (टीएनआईई) द्वारा आयोजित 'थिंक-एडू कॉन्क्लेव' के छठे संस्करण में उपस्थित जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने शिक्षा प्रणाली को नया आकार प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिक्षा एक शक्तिशाली उपकरण है जो व्यक्तियों को सशक्त बनाती है और समुदायों का रूपांतरण करती है। यह गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ सकती है। यह भारत जैसे काफी अधिक युवा आबादी वाले देश को विकास करने के लिए सक्षम बना सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा केवल तभी हो सकता है यदि वह अपने जनांकिकीय लाभ का उपयोग कर सके।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्ची शिक्षा हमें विनम्रता प्रदान करती है जो हमें यह आभास कराती है कि हमें अभी कितना अधिक सीखना है। यह विनम्रता हमें आजीवन शिक्षार्थी बनाए रखती है और हम एक व्यक्ति के रूप में विकसित होते रहते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मानव संसाधन विकास की एक अच्छी कार्यनीति के बिना देश सतत् विकास नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा, अपने बच्चों, युवाओं और वयस्कों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यवहार में निपुण बनाए बिना, हम एक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकते है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वजों द्वारा हमें दी गयी मानवतावादी, समावेशी, सामंजस्यपूर्ण विचारधारा को हमारी शिक्षा प्रणाली में समेकित करना चाहिए। हमें अपने विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को शिक्षा के महान स्थल बनाने के लिए अब बुनियादी स्तर तक प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि नए उभरते हुए भारत को शिक्षा में उत्कृष्टता और समानता की बुनियाद पर बनाया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत लोगों का आह्वान किया कि वे अच्छी गुणवत्तायुक्त पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा तक पहुंच में सुधार करने पर ध्यान दें। हम इस महत्वपूर्ण आयाम की और अधिक अनदेखी नहीं कर सकते। हम एक कमजोर नींव पर एक नया भारत नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि हम निरक्षरता के उच्च स्तर का बोझ नहीं उठा सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को एक ऐसे पाठ्यक्रम की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों को ज्ञानी, कुशल और जिम्मेदार बनाता हो। हमें बच्चों को स्कूली शिक्षा के केंद्र में रखना चाहिए। हमें शिक्षा प्रणाली को युवाओं और वयस्कों की सीखने की जरूरतों के अनुसार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्रणाली को अनुसंधान और ज्ञान की सीमाओं के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में छात्रों को अच्छे इंसान बनने में मदद करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शक सिद्धांत होने चाहिए। शिक्षा रोजगार के लिए है, शिक्षा ज्ञान के लिए है, शिक्षा सशक्तीकरण के लिए है, शिक्षा एक सक्षम और जागरुक व्यक्ति के विकास के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक मानदंडों के रूपांतरण के लिए है।

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