राजनीतिज्ञों के लिए चरित्र, सामर्थ्य, क्षमता और आचरण महत्वपूर्ण हैं: उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने श्री बनारसी दास गुप्ता पर स्मारक डाक टिकट जारी किया

नई दिल्ली
दिसम्बर 18, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि राजनेताओं के लिए चरित्र, सामर्थ्य, क्षमता और आचरण महत्वपूर्ण हैं; राजनीति में दर्शन, सिद्धांत, नीतियां और निष्पादन होने चाहिएं और हमें राजनीति में समुदाय, जाति और नकदी से बचना चाहिए। वह आज यहां स्वतंत्रता सेनानी और सांसद बनारसी दास गुप्ता की जन्म शताब्दी के अवसर पर बनारसी दास गुप्ता फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह में श्री बनारसी दास गुप्ता पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती मेनका संजय गांधी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री बनारसी दास एक सच्चे गांधीवादी, एक महान स्वतंत्रता सेनानी, एक दूरदृष्टा और जन नेता थे और वह अपनी पढ़ाई छोड़ कर गांधीजी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने जिंद राज्य में एक जिम्मेदार सरकार की स्थापना के लिए आंदोलन की शुरुआत की और उन्हें कई बार जेल भेजा गया। उन्होंने आगे कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वह तत्कालीन जिंद राज्य में एक शीर्ष नेता बन गए थे और उन्होंने इसके भारतीय संघ के विलय के लिए रास्ता तैयार करने में सहायता की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शवाद और एक स्वतंत्र और पुनरुत्थान वाले भारत के सपने के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री बनारसी दास जी एक दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने आगे कहा कि वह एक ओजस्वी समाज-सुधारक थे जिन्होंने भारत को सामाजिक बुराइयों, सामाजिक उत्पीड़न, जाति और महिला-पुरूष असमानताओं के चंगुल से मुक्त करने के लिए निरंतर काम किया था। उन्होंने कहा कि वह अस्पृश्यता, बाल विवाह और दहेज प्रणाली के विरुद्ध सघर्ष करने वाले व्यक्ति थे और अस्पृश्यता की प्रथा के खिलाफ अविरत संघर्ष करते हुए उन्होंने दलितों को मंदिरों में प्रवेश करने और सार्वजनिक कुओं का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त करने में सहायता की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा के लोगों के बीच श्री बनारसी दास की लोकप्रियता अद्वितीय थी, जिन्होंने उन्हें तीन बार हरियाणा विधानसभा के लिए चुना। उन्होंने आगे कहा कि वह विधानसभा के अध्यक्ष के पद पर भी रहे और वह दो बार हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री बने। हमारी संसद के साथ उनका सम्बन्ध अप्रैल 1996 में शुरू हुआ जब उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में चुना गया था, और उन्होंने कई संसदीय समितियों के सदस्य के रूप में कार्य किया और हरियाणा राज्य और वहां की जनता की चिंताओं को सदन में स्पष्ट करने के अपने मिशन को जारी रखा।

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