भारत के माननीय उपराष्ट्रपति ने मकर संक्रांति और पोंगल के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी

चेन्नई, तमिलनाडु
जनवरी 13, 2019

“पोंगल नाल वाल्थुक्कल

मैं मकर संक्रांति और फसल उत्सव पोंगल , जो उत्तरायण के आरंभ का प्रतीक है और सूर्य देवता को समर्पित है, के शुभ अवसर पर हमारे सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं । यह एक कृतज्ञता ज्ञापन करने वाला त्योहार है और पूरे तमिलनाडु में लोगों द्वारा पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। एक खुशहाल और समृद्ध वर्ष के लिए मेरी शुभकामनाएं।

• पूरे भारत में लोग इस त्योहार को अति उत्साह के साथ मनाते हैं। यह देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे 'पोंगल' और 'मकर संक्रांति', केरल में विशु, पंजाब और हरियाणा में 'लोहड़ी', असम में 'बिहू' और बिहार में 'खिचड़ी उत्सव 'कहा जाता है।

इस महत्वपूर्ण त्योहार का महान ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है क्योंकि सूर्य देव को अक्सर देवत्व और ज्ञान के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

आइए इस शुभ अवसर पर हम अपनी जड़ों की ओर लौटने और अपनी गौरवशाली संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों, कलाओं और त्योहारों की रक्षा करने का संकल्प लें।

त्योहार नवीकरण, कायाकल्प और पुनरुद्धार के उत्सव का प्रतीक हैं। वे आज के अत्यंत गतिशील और व्यस्त दुनिया में एकजुटता, एकता, प्रेम और भाईचारे की भावना लाते हैं। हम परिवारों और समुदायों के एक साथ आने के साक्षी बनते हैं। वे सामाजिक बंधन के लिए बहुत बड़े अवसर होते हैं।

आइए हम समय के परीक्षण पर खरी उतरी भारत की परंपराओं और रीति-रिवाजों का प्रचार और पालन करके देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण लाने का संकल्प लें।

समय आ गया है कि सभी भारतीय अपनी जीवन शैली में बदलाव लाएँ और स्वस्थ जीवन जीने के पुराने परंपरागत तरीकों की ओर वापस लौटें। हमें अपने पूर्वजों के रीति-रिवाजों और प्रथाओं का पालन करने और पश्चिमी-उन्मुख जीवन शैली को त्यागने की आवश्यकता है।

हमारे पारंपरिक भोजन की आदतें, स्वाद और रीति-रिवाज न केवल समय के परीक्षण पर खरी उतरी हैं बल्कि स्वास्थ्यकर भी हैं क्योंकि वे प्रत्येक मौसम और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप बने हैं।

• हमें अपने सरल लेकिन जीवन जीने के प्रभावी तरीकों की ओर वापस लौट कर आहार संबंधी स्वस्थ आदतों और जीवन शैली को अपनाने संबंधी जागरूकता का प्रसार करने और इस संबंध में युवाओं को शिक्षित करने की आवश्यकता है। इसी प्रकार, योग की प्राचीन भारतीय कला स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर का संयोजन करती है।

मैं युवाओं से कृषि पर नए सिरे से ध्यान देने का आह्वान करता हूं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। समय की मांग है कि प्राकृतिक कृषि को अधिक बढ़ावा दिया जाए और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम किया जाए।

• सभी को अपनी मातृभाषा की रक्षा, प्रचार और प्रसार के लिए प्रयास करना चाहिए।

• पारंपरिक परिवार प्रणाली भारत का गौरव थी। पारिवारिक मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता है। हमारी परंपराएं और रीति-रिवाज न केवल सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते हैं, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच जुड़ाव भी पैदा करते हैं।

• भारतीयों ने हमेशा साझा करने, देखभाल करने और प्रकृति की पूजा करने के दर्शन में विश्वास किया है। इस संक्रांति त्योहार पर, हम सभी स्वस्थ, मजबूत, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए स्वयं को फिर से समर्पित करें।”

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