भारत की भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्धता है: उपराष्ट्रपति की भूटान नरेश से भेंट

नई दिल्ली
नवम्बर 2, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि भारत भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में भागीदार बनने और उसकी 12वीं पंचवर्षीय योजना में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। आज उन्होंने यहां भूटान नरेश महामहिम जिग्मे खेसर नामग्येल वांग्चुक के साथ बातचीत की। इस अवसर पर भारत और भूटान दोनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और भूटान के बीच अनुकरणीय द्विपक्षीय संबंध हैं और ये संबंध अनूठे और खास हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हमें स्वाभाविक मित्र और भागीदार बनाते हैं। उन्होंने इस वर्ष पूर्व में भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करने पर नरेश द्वारा सहृदय भेजे गए बधाई पत्र के लिए उन्हें धन्यवाद किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत भूटान द्वारा अपनी विशिष्ट संस्कृति को बचाए रखने तथा पर्यावरण का संरक्षण करने के साथ ही तीव्र गति से किए गए विकास को देखकर अत्यंत प्रसन्न है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सरकार तथा जनता ड्रुक ग्यालपो (नरेश) के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हैं, जिन्होंने हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भूटान के राजाओं और भारतीय नेतृत्व की समझ और दूरदृष्टि से भारत-भूटान संबंध मजबूत होते गए हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत भूटान के साथ अपना ज्ञान, अनुभव तथा संसाधन साझा करके प्रसन्न है और इस तरह से वह भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान प्रदान कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा विकासात्मक सहयोग भूटान की सरकार तथा जनता द्वारा तय की गई प्राथमिकताओं द्वारा निर्देशित रहा है। भारत भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में भागीदार होने तथा उसकी 12वीं पंचवर्षीय योजना में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उपराष्ट्रपति ने कहा भारत भूटान के साथ मौजूदा जल-विद्युत सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध बना हुआ है। अनवरत जल-विद्युत परियोजनाओं का न्यूनतम लागत वृद्धि से नियत समयावधि में कार्यान्वयन किया जाना दोनों सरकारों के लिए महत्वपूर्ण है। यह हमारे द्विपक्षीय सहयोग का अग्रणी क्षेत्र है और बहुत ध्यान देने योग्य है। हमें इसे द्विपक्षीय सहयोग का प्रतिरूप बनाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए, जिस पर हमारे पड़ोस में अन्य लोगों द्वारा ध्यान दिया जाएगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और भूटान के सुरक्षा संबंधी सरोकार अविभाज्य और आपस में गुंथे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम भूटान के साथ पारस्परिक सुरक्षा सरोकारों के मुद्दों पर लगातार घनिष्ठ सहयोग के प्रति आशावान हैं।

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