भारतीय संस्कृति अक्षर को दैवीय दर्जा देती है : उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने विजयवाड़ा पुस्तक मेले का शुभारंभ किया

विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश
जनवरी 1, 2018

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वेदों में "अक्षर" को दिया गया दैवीय दर्जा यह संकेत देता है कि हम पुस्तकों और साहित्य को कितना महत्व देते हैं। वह आज विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में 29वें विजयवाड़ा पुस्तक मेले के उद्घाटन के पश्चात् जन समूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री, श्री एन. चन्द्रबाबू नायडु और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकें हमारी अच्छी मित्र होती हैं और अच्छी पुस्तकें हमारे जीवन-स्तर का उन्नयन करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम परेशानी में होते हैं तो वे हमारा मार्गदर्शन करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग सुशिक्षित होते हैं उनका समाज में बहुत सम्मान होता है और एक पुस्तक पढ़ने का अर्थ एक नये संसार से परिचित होना है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैदिक साहित्य में महिलाएं भी समान रूप से पुस्तक लेखन में भागीदारी करती थी और गार्गी, मैत्रेयी एवं अन्य महिलाओं ने अनेकों पुस्तकें लिखीं। उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध युग से लेकर तमिल संगम युग तक अनेक महिला लेखिकाएं रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैष्णव परम्परा में आलवरों में दलितों और महिलाओं ने पुस्तकें लिखीं है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिनेमा का हमारे ऊपर बहुत ज्यादा प्रभाव है तथा सिनेमा, संगीत एवं कला के अन्य स्वरूप शांति एवं अक्षोभ को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपने महान राष्ट्र के विकास के लिए सबको एकजुट रहना होगा।

उपराष्ट्रपति ने आंध्र प्रदेश सरकार को तेलुगु भाषा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि उन्हें यह जानकार प्रसन्नता हुई है कि सरकार ने वर्ष 2018 को तेलुगु भाषा के संरक्षण के लिए समर्पित किया है।

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