बहुधा दृष्टिकोण शांति और सद्भावना की खोज में हमारा मार्गदर्शन कर सकती है : उपराष्ट्रपति "द ट्वेन्टी फर्स्ट सेंचुरी जियोपॉलिटिक्स, डेमोक्रेसी एंड पीस" पुस्तक का विमोचन

नई दिल्ली
अक्टूबर 30, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि बहुधा दृष्टिकोण एक और चमकता सितारा है जो शांति और सौहार्द्र की हमारी खोज में हमें रास्ता दिखा सकता है। वे सिक्किम के पूर्व राज्यपाल, श्री बी.पी. सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक "दि ट्वेन्टी फर्स्ट सेंचुरी जियोपॉलिटिक्स, डेमोक्रेसी एंड पीस" का विमोचन करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल, श्री एन.एन. वोहरा और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने श्री सिंह को इस पुस्तक को लिखने के लिए बधाई दी, जो बढ़ते वैश्वीकरण, बढ़ते आतंकवाद और अभूतपूर्व तकनीकी प्रगति के संदर्भ में बेहद प्रासंगिक है। उन्होंने आगे कहा कि यह वास्तव में ऐसे अनेक मुद्दों पर विचार करती है जो तेजी से एक दूसरे पर निर्भर होती हुई भूमंडलीकृत दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं और इस बात का पुरजोर समर्थन करती है कि यदि हम बहुधा दृष्टिकोण को अपनाते हैं जो सौहार्द्रपूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए संवाद की आवश्यकता पर बल देता है, तो यह आदर्श स्थिति होगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तक में विचार किए गए मुद्दों में शैक्षिक संस्थाओं, प्रगतिशील धार्मिक और सामाजिक समूहों, अंतर-धार्मिक संवाद मंचों और संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इसमें नैतिक मूल्यों, सहानुभूति और करुणा को बढ़ावा देने तथा शांति और विकास की दिशा में ऊर्जा का उपयोग करने का पुरजोर समर्थन किया गया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अन्य रोचक अध्याय 'डेमोक्रेसी एंड इट्स कंसिक्वेनसिस' और 'गुड गवर्नेंस: ए नरेटिव फ्राम डेमोक्रेटिक इंडिया' हैं। उन्होंने आगे कहा कि ' द इमर्जिंग वर्ल्ड: चैलेंजेज एंड पॉसिबिलिटीज', अध्याय में श्री सिंह ने बिल्कुल सही कहा है कि 21 वीं सदी में शांति और सद्भाव के भविष्य का सीधा संबंध (i) पारिस्थितिकी, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन; (ii) परमाणु हथियार, युद्ध की उभरती हुई तकनीक और राष्ट्र-राज्यों के बीच निरंतर हथियारों की दौड़; (iii) भू-राजनीति और राष्ट्रवाद; (iv) धार्मिक उग्रवाद और (v) गरीबी और असमानता से होगा।

Is Press Release?: 
1