प्रो. स्वामीनाथन एक क्रांतिकारी नेता हैं जिन्होंने अनेक वैज्ञानिकों को प्रेरित किया: उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन को येररिंगन सम्मान प्रदान किया।

चेन्नई
दिसम्बर 10, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन क्रांतिकारी नेता हैं जिन्होंने अनेक वैज्ञानिकों को भारतीय कृषि की समस्या पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए प्रेरित किया है। आज वह चेन्नई में प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन को 'येररिंगन' सम्मान से सम्मानित करने के पश्चात् उपस्थित सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल श्री बनवारीलाल पुरोहित और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रो. स्वामीनाथन जीते-जागते युगपुरुष हैं जिन्होंने भारत को अपनी असाधारण दृष्टि, समर्पण और व्यावहारिकता से गौरवान्वित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सचमुच एक महान व्यक्ति हैं जिन्होंने पूरे विश्व को यह दिखाया कि शोध के फायदों को खेतों तक पहुंचाया जा सकता है और किसानों के जीवन में परिवर्तन लाया जा सकता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि श्री स्वामीनाथन अपने देश के विकास के प्रति पूरी तरह से कटिबद्ध व्यक्ति हैं।

उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि 1947 में प्रो. स्वामीनाथन आनुवांशिकी और पादप प्रजनन विषय में स्नातकोत्तर के छात्र के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान (आईएआरआई, पूसा) आए। उन्होंने यह भी कहा कि श्री स्वामीनाथन ने भारतीय पुलिस सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की परंतु कैरियर के लिए अलग ही राह चुनी। जन सुरक्षा और संरक्षा के क्षेत्र में नेतृत्वकारी पदों पर आसीन होने के बजाय उन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक नया मार्ग निर्मित किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत द्वारा नई कृषि नीति अपनाये जाने और उच्च उत्पादक बीज और रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के परिणामस्वरूप 1960 में कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम अत्यधिक सफल रहा और यह भारत के कृषि विकास के इतिहास में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। उस समय प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन कृषि मंत्री के सलाहकार थे और उन्होंने डा. नार्मन बॉर्लाग को भारत में आमंत्रित किया और गेहूँ की उच्च उत्पादकता वाली किस्मों को विकसित करने के लिए उनके साथ काम किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रो. स्वामीनाथन की दृष्टि, दूरदृष्टि, बौद्धिक दृढ़ता और शोध के निष्कर्षों को किसानों की समस्याओं से जोड़ने की क्षमताओं के कारण उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह रॉयल सोसाइटी ऑफ लंडन और यू.एस. नेशनल एकेडमी ऑफ साइन्सेज समेत भारत और विश्व की कई अग्रणी वैज्ञानिक अकादमियों के फेलो रहे।

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