पूरे विश्व ने आतंकवाद के बुरे परिणामों को भुगता है: उपराष्ट्रपति। उपराष्ट्रपति ने सीमा सुरक्षा बल के 52वें स्थापना दिवस में संबोधित किया

नई दिल्ली
दिसम्बर 1, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु, ने कहा है कि पूरा विश्व आतंकवाद के बारे में जानता है और उसने आतंकवाद के बुरे परिणामों को भुगता है। वह आज यहां सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 52वें स्थापना दिवस समारोह में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर बीएसएफ के महानिदेशक, श्री के.के. शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी बीएसएफ जवानों ने चपल परेड के साथ अनुशासन और शारीरिक स्वस्थता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने आगे कहा कि सभी जवानों ने अपनी ताकत और तैयारियों का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सेवा अनुकरणीय है और देश को उन पर गर्व है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे राजस्थान के मरूस्थलों, कश्मीर की बर्फीली चोटियों और गुजरात के रण के फिसलन वाले क्षेत्रों जैसी सर्वाधिक कठिन परिस्थितियों में भी सीमाओं पर डटे रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में उनकी भूमिका, खेलों में उनकी सफलता और विस्तृत सामाजिक कल्याण कार्यक्रम उन्हें दूसरों से अलग करते हैं। यह कहना उचित होगा कि हम तभी सो सकते हैं जब वे जाग रहे हों।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'भारत की पहली रक्षा पंक्ति' के रूप में काम करते हुए, 1856 बीएसएफ कार्मिकों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने आगे कहा कि इस बल के खाते में 2000 से अधिक वीरता पदक दर्ज किए गए हैं और यह बलिदान और यह सम्मान हमारे देश की विरासत है जिस पर देश को गर्व है। उन्होंने यह भी कहा कि हम उन बलों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी संस्कृति एक प्राचीन संस्कृति है और हमने कभी भी किसी भी देश पर हमला नहीं किया। भारत की सांस्कृतिक विरासत बहुत सुदृढ़ है और सभी मनुष्यों का कल्याण इसका आदर्श सिद्धांत है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहता है, लेकिन इसके पड़ोसियों में से एक हमारी भूमि में घुसपैठ सहित अनेक समस्याएं पैदा करना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि यह पड़ोसी आतंकवाद से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है अपितु वह आतंकवाद का वित्तपोषण कर रहा है, उसे प्रोत्साहित कर रहा है और बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे विश्व ने आतंक के खतरे का अनुभव किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद की कोई जाति नहीं है, कोई धर्म नहीं है और अच्छा आतंकवादी या बुरा आतंकवादी जैसा कुछ नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि आतंकवादी मानव जाति का दुश्मन है। उन्होंने आगे कहा कि पूरे विश्व को यह समझना होगा और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से कड़ी कार्रवाई करके हल करने का प्रयास करना होगा।

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