जब हम पर्यावरण की ओर ध्यान देंगे तो मानव जाति के भविष्य के बारे में कोई चिंता नहीं रहेगी -उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति द्वारा अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन-2017 का उद्घाटन

नई दिल्ली
नवम्बर 3, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि जब हम पर्यावरण की ओर ध्यान देंगे तो मानव जाति के भविष्य के बारे में कोई चिंता नहीं रहेगी। वह आज यहां राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन-2017 का उद्घाटन करने पर संबोधित कर रहे थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री, डा. हर्ष वर्धन, राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष, श्री स्वतंत्र कुमार, नेशनल हाई कोर्ट ऑफ ब्राजील के न्यायाधीश और संयुक्त राष्ट्र संघ पर्यावरणीय न्याय की अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद के महासचिव, न्यायाधीश एंटोनियो हरमन बेंजामिन, भारत के महान्यायवादी, श्री के.के. वेणुगोपाल और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद महत्वपूर्ण है, परंतु मानव जीवन में सुधार लाना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे यह कहा कि जीवन की गुणवत्ता हमारे विकास संबंधी समस्त प्रयासों की अंतिम कसौटी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विकास से स्वास्थ्य, खुशहाली और सामंजस्य की भावना का विकास नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने इस प्रश्न का प्राय: सामना किया है कि किसे प्राथमिकता दी जाए- पर्यावरण संरक्षण या विकास को। उन्होंने आगे यह कहा कि वह विश्वास के साथ यह कह सकते हैं कि इन दोनों में कोई आंतरिक विरोधाभास नहीं है; केवल अति दोहन को रोके जाने की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी राजनीति का प्रत्येक स्कंध विशिष्ट भूमिका निभाता है। उन्होंने आगे कहा कि विधायिका जनता के मुद्दे के समाधान के लिए कानून बनाती है, कार्यकारिणी उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करती है और उसे जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि कानूनों की व्याख्या और क्रियान्वयन अक्षरश: हो।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीव्र आर्थिक विकास और अन्धाधुंध औद्योगिकीकरण ने हमें अस्वास्थ्यकर, प्रदूषणयुक्त और कार्बनप्रभावी जीवनशैली की दिशा में तेजी से आगे की ओर उन्मुख किया है। उन्होंने आगे कहा कि हमें विकास का आकलन करने के लिए ऐसे बेहतर रास्ते अपनाने होंगे, जो ज्यादा संपूर्ण हों और जो केवल आर्थिक विकास ही नदीं, वरन विकास और जीवन की गुणवत्ता की वास्तविक तस्वीर पेश करते हों। उन्होंने यह भी कहा कि हमें पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आर्थिक विकास बनाए रखने और सर्वांगीण संपन्नता जाने के तरीकों की खोज और उनमें सुधार लाने होंगे।

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