छात्रों को स्पष्ट विजन, शुद्ध हृदय और मजबूत कंधों के साथ सेवा करने के लिए सीखते रहना, उपार्जन करते रहना और उत्सुक बने रहना चाहिए: उपराष्ट्रपति हमें ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो अपने दावों पर खरे उतरें और अनजान मार्गों पर आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त रूप से नि

हैदराबाद
नवम्बर 18, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि छात्रों को स्पष्ट विजन, शुद्ध हृदय और मजबूत कंधों के साथ सेवा करने के लिए सीखते रहना, उपार्जन करते रहना और उत्सुक बने रहना चाहिए। वह आज हैदराबाद में गांधी प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (जीआईटीएएम) के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सिंचाई, विपणन और विधायी कार्य मंत्री श्री. टी. हरीश राव, जीआईटीएएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, प्रो. के. रामाकृष्ण राव और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने इच्छित उपाधियां पुरस्कार और पदक प्राप्त करने के लिए छात्रों को बधाई दी और विभिन्न विधाओं में युवाओं को ढालने के लिए अनमोल ज्ञान को साझा करने और उसमें शिक्षित करने के लिए शिक्षकों को भी मुबारकबाद दिया।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर अपनी प्रसन्नता प्रकट की है कि इस विश्वविद्यालय में प्रमुख महत्व वाले क्षेत्रों जैसे कि जल गुणवत्ता, नैनो-प्रौद्योगिकी, चिकित्सा जैव-प्रौद्योगिकी और विकसित सामग्री और प्रसंस्करण में केन्द्रीकृत अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने केंसर, शहरी और सतत विकास, एकीकृत ग्रामीण विकास, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन क्षेत्रों में अनुसंधान केंद्रों की स्थापना करने की भी प्रशंसा की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने की दहलीज पर खड़ा है और हमारी सभ्यता पुरानी है और आबादी युवा है जो देश के लिए एक बहुत बड़ी जनसांख्यिकी संबंधी लाभदायक स्थिति है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें आने वाले नाटकीय परिवर्तनों से निबटने के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए और हमें प्रतिक्रियाशील होने के बजाय गति सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें स्फूर्तिवान होना चाहिए और परिवर्तन की लहरों का आनन्द लेना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार बदलते हुए वातावरण के प्रति पूर्णत: परिचित है और स्वयं को नवाचार की ओर बड़ी दृढ़ता से प्रवृत्त कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने देश को डिजिटल रूप से सशक्त ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में परिवर्तित करने के लिए कई उपाय किए हैं और इनमें कई प्रमुख योजनाएं और कार्यक्रम जैसे कि 'मेक इन इंडिया' 'स्टार्ट अप इंडिया' और 'स्टेन्ड अप इंडिया' शामिल हैं ताकि विनिर्माण और उद्यमशीलता को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि 'डिजिटल इंडिया' कार्यक्रम का लक्ष्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में परिवर्तित करना है।

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