चिकित्सा स्नातकों को अपने चिकित्सा व्यवसाय को नैतिक कार्य में रूपांतरित करना चाहिए: उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में संबोधन

देहरादून, उत्तराखंड
दिसम्बर 5, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि चिकित्सा स्नातकों को मरीजों के कल्याण और सुख को ध्यान में रखते हुए अपने चिकित्सा व्यवसाय को नैतिक कार्य में रूपांतरित करना चाहिए। वह आज देहरादून, उत्तराखंड में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल श्री कृष्णकांत पॉल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तराखंड के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री धन सिंह रावत जी, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय धस्माना जी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने स्वामी राम के एक कथन को उद्धृत किया "अगर मैं आपके भीतर के ईश्वर की सेवा नहीं कर सका तो मंदिरों, गिरजाघरों और मस्जिदों में जाना सब पाखंड है।" उन्होंने आगे कहा कि इस दृढ़ निश्चय को ग्रहण करके उन्होंने "प्यार, सेवा, अभिवादन" को विश्वविद्यालय का आदर्श वाक्य बनाया जो छात्रों, संकाय सदस्यों और स्टाफ को अपने साथियों की नि:स्वार्थ और सप्रेम सेवा करने के लिए प्रेरित करता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिमालयन इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एचआईएमएस) स्वास्थ्य परिचर्या के लिए एकीकृत और किफायती पहुंच विकसित कर रहा है जो न केवल स्थानीय जनता की आवश्यकताओं को पूरा करती है, बल्कि समग्र रूप से पूरे देश के लिए एक आदर्श बन सकती है। उन्होंने आगे कहा कि एचआईएमएस उत्तराखंड और उसके आसपास के राज्यों की ग्रामीण जनता को सस्ती कीमतों पर बहु-विशिष्ट और सामान्य स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जानना अत्यंत हर्ष का विषय है कि स्माइल ट्रेन परियोजना के अंतर्गत यहां 9000 से भी अधिक कटे होंठ और तालू वाले बच्चों की नि:शुल्क प्लास्टिक सर्जरी की गई है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का कैंसर अनुसंधान संस्थान कैंसर नियंत्रण के सभी पक्षों पर ध्यान दे रहा है और यह इस क्षेत्र में प्रमुख कैंसर केन्द्र बनने तथा कैंसर के मरीजों को रेफर किए जाने हेतु नोडल केन्द्र बनने के लिए पूर्ण रूप से सुसज्जित है। उन्होंने आगे कहा कि नर्सें मरीजों को अत्यावश्यक करूणामयी स्पर्श देकर उनकी देखभाल तथा उपचार में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं और उन्हें यह जानकार प्रसन्नता हुई कि हिमालयन नर्सिंग कॉलेज (एचसीएन) नर्सिंग में भी डिप्लोमा, स्नातक एवं स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी प्रदान कर रहा है।

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों को स्मरण कराया कि प्रभावी संवाद, स्व-प्रबंधन, नवोन्मेष, भावनात्मक सूझ-बूझ, आत्म-ज्ञान जैसे व्यक्तिगत गुण उन्हें उचित जीवन-प्रयोजनों के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार की भारत को एक अधिकांशत: कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को एक विनिर्माण और सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था में विविधीकृत करके एक प्रतिस्पर्धी, उच्च-विकास, उच्च उत्पादकता वाला मध्यम आय वाला देश बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है। उन्होंने स्नातकों को सलाह दी कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, अपितु रोजगार सर्जक बनने का भी प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि वे रचनात्मक, अभिनव, गैर-पारम्परिक बनें और नए क्षेत्रों का पता लगाने का प्रयास करें और समर्पण, जोश, प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत, अनुशासन और अध्यवसाय से वे अपने सपनों को साकार कर सकेंगे और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे।

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