कृषि और उद्योग को हमारी अर्थव्यवस्था की दो आंखों के रूप में देखा जाएगा : उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने इकोनॉमिक टाइम्स अवार्ड्स प्रदान किए

मुंबई
अक्टूबर 28, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि कृषि और उद्योग को हमारी अर्थव्यवस्था की दो आंखों के रूप में देखा जाएगा। वे मुंबई में आज कॉर्पोरेट जगत में उत्कृष्टता के लिए इकोनॉमिक टाइम्स अवार्ड्स प्रदान करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री सी. विद्यासागर राव, केंद्रीय वित्त और कारपोरेट कार्य मंत्री श्री अरुण जेटली, केंद्रीय रेल तथा कोयला मंत्री श्री पीयूष गोयल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, नागर विमानन राज्य मंत्री श्री जयंत सिन्हा और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 130 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं पर निर्मित भारत का सपना केवल तभी पूरा किया जा सकता है यदि प्रत्येक भारतीय और प्रत्येक व्यवसाय या कॉर्पोरेट इकाई अपनी अधिकतम संभावनाओं का दोहन करने में सक्षम हों। उन्होंने आगे कहा कि द इकोनॉमिक टाइम्स अवार्ड्स के विजेता अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में अग्रणी हैं। उन्होंने आगे कहा कि सभी विजेता और आर्थिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना को बढ़ावा देने के लिए द इकोनॉमिक टाइम्स बधाई के पात्र हैं।

उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से इस वर्ष के पुरस्कार विजेता अपने दोस्त और लंबे समय तक सहयोगी रहे श्री अरुण जेटली को बधाई दी। उन्होंने कहा कि श्री अरुण जी पिछले साढ़े तीन वर्षों से आर्थिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूर्ण रूप से प्रतिपादन सक्षम बनाने के प्रयासों से पूरे मनोभाव से जुड़े हुए हैं और वे इस सम्मान के पूर्ण रूप से हकदार हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार और व्यवसाय-जगत को आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सहभागियों के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को निवेश-अनुकूल उपायों को अपनाकर एक सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करना चाहिए और साथ ही, व्यवसाय-जगत की भी कुछ ज़िम्मेदारियां होती हैं और उसे नैतिक कॉर्पोरेट प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत के कॉरपोरेट जगत और भारत राष्ट्र को सामूहिक रूप से कुशल पूंजी प्रबंधन की दिशा में काम करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी प्रत्येक संपत्ति एक अर्जक परिसंपत्ति बन जाए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्पष्ट दृष्टि और उद्देश्य के साथ-साथ निर्भीक सुधारों को मिशनरी उत्साह के साथ कार्यान्वित किया जाना चाहिए और अस्थायी असफलताओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि समय की मांग है कि सुधार किए जाएं, लेकिन हमें समावेशी विकास और असमानताओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र का विकास किया जाना आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

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