कार्य, ज्ञान और समर्पण से असाधारण परिणाम मिलते हैं: उपराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ने योग संस्थान, मुंबई के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया

मुंबई
दिसम्बर 24, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि कार्य, ज्ञान और समर्पण का संयोजन असाधारण परिणाम देता है और योग दर्शन में आधुनिक युग की जीवन शैली की समस्याओं से निपटने के सभी गुण हैं। वह आज मुंबई में योग संस्थान के शताब्दी समारोह के उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री चेनानामानी विद्यासागर राव और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग का स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण है और इसमें शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक आयाम शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि योग शब्द दो मूल शब्दों से प्राप्त किया गया है - एक "संपर्क" का द्योतक है और दूसरा "एकाग्रता" का। उन्होंने कहा कि यह शारीरिक स्वास्थ्य को मानसिक संतुलन और भावनात्मक शांति के साथ जोड़ता है और यह एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने को बढ़ावा देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग विज्ञान के समर्थकों ने मानव जीवन के पारस्परिक जुड़ाव का गहराई से चिंतन किया है और 'एकाग्रता' तथा हमारे चारों ओर होने वाली घटनाओं के बारे में सोचने, चिंतन करने और शांतिपूर्वक मनन करने के गुणों के महत्व पर बल दिया है। उन्होंने आगे कहा कि उनका मानना था कि उन शांत क्षणों में हम सभी अच्छे नैतिक निर्णय ले सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस वैश्विक दृष्टिकोण में 'नैतिकता' एक सामंजस्यपूर्ण, टिकाऊ जीवनशैली का अंतर्निहित आधार है। उन्होंने आगे कहा कि इस योग दर्शन के घटक ऐसे नैतिक सिद्धांतों का निर्माण करते हैं जो सार्वभौमिक हैं, जैसे: अहिंसा, सच्चाई, चोरी न करना, अपने साथी के प्रति निष्ठा बरतना और लालच न करना।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग दर्शन मन, भाषण और देह की शुद्धता, संतोष, दूसरों की स्वीकृति, अध्यवसाय, स्वाध्याय, आत्मचिंतन, परमात्मा का ध्यान करने का समर्थन करता है। उन्होंने आगे कहा कि इसके अन्य पहलुओं में आसन, श्वास व्यायाम, अमूर्तता, एकाग्रता, ध्यान और मुक्ति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप से योग दर्शन के इन पहलुओं में भौतिक के साथ ही तात्त्विक और आध्यात्मिक पहलू शामिल हैं और यह दृष्टि विशिष्टत: व्यापक और उत्कृष्ट रूप से व्यावहारिक है।

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