उपराष्ट्रपति ने कृषि को व्यवहार्य और लाभप्रद बनाने के लिए 12 पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उपराष्ट्रपति ने इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज में 14वां डॉ. वी.के.आर.वी. राव स्मारक व्याख्यान दिया।

बंगलुरू
जनवरी 19, 2018

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडु ने कहा है कि कृषि अधिकांश भारतीयों का मुख्य पेशा होने के बावजूद निम्न और स्थिर आय और उत्पादकता के कारण यह पेशा किसानों के लिए अनाकर्षक बना हुआ है। उन्होंने आज बेंगलुरु में इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज में 14वां डॉ. वी.के.आर.वी. राव स्मारक व्याख्यान देते हुए यह बात कही। कर्णाटक के गवर्नर श्री वजुभाई रुदाभाई वाला और केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री अनंत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसानों को पेश आ रही समस्याओं का समाधान तीव्र, समावेशी और सतत विकास संबंधी कार्यनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), ई- राष्ट्रीय कृषि बाज़ार और सॉयल हेल्थ कार्ड्स जैसी पहलों से किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और बेहतर लाभ प्राप्त करने में मदद मिल रही है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पशुधन क्षेत्र के जोखिम को दूर करने के लिए प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना जैसी पहल किए जाने की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे पास अपने किसानों की उपलब्धियों पर गर्व करने के तर्कसंगत कारण हैं। हमने खाद्यान्न की कमी पर सफलतापूर्वक विजय पाई है। हम खाद्यान्न आयात की स्थिति से निकलकर खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म-निर्भरता और निर्यात की दिशा में उन्मुख हुए हैं। हमने निर्वाह खेती से निकलकर गहन और प्रौद्योगिकी-उन्मुख कृषि की ओर कदम बढ़ाया है। वर्तमान में भारत अनेक फसलों के उत्पादन में शीर्ष स्थान पर काबिज है। उन्होंने कहा कि यहाँ विश्व का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन होता है और यहां पर हरित, श्वेत, नील और पीत क्रान्ति का संचालन करके अनेक परिवर्तनकारी बदलाव देखे गए हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में संवर्धित निवेश किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को पुनरुज्जीवित करने के लिए हमें दीर्घकालिक और मध्यकालिक ऐसी कार्य योजना बनाने की आवश्यकता है, जिसमे विस्तार से इस बात का उल्लेख हो कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र किस तरीके से वाहक होंगे और हमें कौन सी कार्यनीति अपनानी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने ऐसे 12 पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की जिनसे किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और पर्याप्त लाभ सृजित करने में मदद मिल सकती है।

  • पहला, अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग करना जिनसे 15 से 20% तक उत्पादकता बढ़ सकती है।
  • दूसरा, कृषि उत्पादकता बढाने के लिए उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना आवश्यक है।
  • तीसरा, संस्थाओं द्वारा समय पर ऋण मुहैया करवाया जाना सीमांत और छोटे किसानों द्वारा नवाचार अपनाने में प्रमुख भूमिका अदा करता है।
  • • चौथा, कृषि की दुग्ध-उत्पादन, मत्स्य-पालन और कुक्कुट-पालन जैसे संबद्ध कार्यकलापों से अनुपूरक कृषि कार्य द्वारा विविधता लाकर किसानों की आय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण रूप से योगदान कर सकती है।
  • पांचवा, भारत में कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ाया जाना चाहिए।
  • छठा, कृषि में सघनता और कृषि को बागवानी से जोड़कर तथा पहाड़ी क्षेत्र में कृषि का यांत्रिकीकरण करके किसानों की आय को बढ़ा सकते हैं।
  • सातवाँ, हमें पारिस्थितिकी तंत्र को इस तरह से सुदृढ़ करना चाहिए, जिसमें कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिल सके।
  • आठवाँ, हमारे पास जल के उपयोग के संबंध में अपेक्षाकृत बेहतर समझबूझ होनी चाहिए।
  • नौवाँ, किसानों को उपभोक्ता कीमत का बड़ा हिस्सा दिए जाने की आवश्यकता है। दसवां, हमें भूमि-नीति में मूलभूत सुधार किए जाने के बारे में विचार करना चाहिए।
  • ग्यारहवाँ, हमें जलवायु-परिवर्तन संवेदी कृषि पद्धतियों को विकसित करने की आवश्यकता है।
  • बारहवाँ, जानकारी साझा किए जाने संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाना चाहिए।
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