जाति, संप्रदाय और धर्म की परवाह न करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को एक साथ जोड़ना ही राष्ट्रीयता है : उपराष्ट्रपति

नेल्लोर
जनवरी 12, 2018

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि जाति, संप्रदाय और धर्म की परवाह न करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को एक साथ जोड़ना ही राष्ट्रीयता है। वह आज नेल्लोर, आंध्र प्रदेश में स्वर्ण भारत ट्रस्ट में संक्रांति समारोह के दौरान एकत्रित सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल, श्री बनवारीलाल पुरोहित और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

आज स्वामी विवेकानन्द के जन्म वार्षिकोत्सव के अवसर पर उनको उद्धरित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से उनकी शिक्षा से प्रेरणा लेने और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए और वर्तमान समय की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आगे आना चाहिए - "जागो, उठो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की पूर्ति न हो जाए।"

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विवेकानंद ने जरूरतमंद लोगों की सहायता करके हमें सच्ची सेवा करना सिखाया। उन्होंने कहा," उनके शब्द शाश्वत हैं; वे किसी भी समय पर प्रासंगिक रहेंगे।"

श्री श्री और गुराजदा जैसी तेलगू साहित्य की महान हस्तियों को उद्धरित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मानवता की सेवा करना ईश्वर की सेवा करने जैसा है। उन्होंने कहा कि, "वंचितों तक पहुंचने, उपेक्षितों की सेवा करने से हमें अपेक्षाकृत अधिक खुशी और संतुष्टि मिलेगी।"

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कला धर्म, क्षेत्रीयता की सीमाओं से परे है और हमें जाति, संप्रदाय अथवा धर्म की परवाह न करते हुए प्रतिभा का सम्मान करना चाहिए और उसकी सराहना करनी चाहिए तथा देश की सेवा करनी चाहिए।

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