अंग-दान को राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाना चाहिए : उपराष्ट्रपति

चेन्नई
जनवरी 16, 2018

श्री एम. वेंकैया नायडु ने "तमिलनाडु में 1,000 लीवर प्रत्यारोपणों" के लिए चेन्नई में समारोह का उद्घाटन किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने देशवासियों से अंगदान को राष्ट्रीय स्तर के जनआंदोलन में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने बेहतर अवसरों के लिए देश को छोड़ने वाले लोगों से वापस लौटने और मातृभूमि की सेवा करने - सीखने, कमाने और लौटने - के लिए कहा।

आज चेन्नई में, तमिलनाड़ में एक हजार लीवर प्रत्यारोपणों के सफलतापूर्वक पूरे किए जाने के समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल श्री बनवारीलाल पुरोहित, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डा. सी. विजय भास्कर और स्वास्थ्य सचिव डा. जे. राधाकृष्णन भी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंगदान मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का एक उत्तम तरीका है। हमें लोगों को अंगदान के महत्व के संबंध में प्रोत्साहित करना चाहिए और ऐसे पवित्र उद्देश्य में भागीदारी करने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का यह सर्वोत्तम तरीका है।

नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) की विशेष रूप से युवाओं के बीच वृद्धि के संबंध में चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय की जीवनशैली इस समस्या का सबसे बड़ा कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि जंक फूड और अल्कोहल के उपभोग से बचना, संतुलित भोजन करना, सुस्त जीवनशैली को छोड़ना और नियमित रूप से व्यायाम या योग-आसन करना लोगों, विशेष रूप से युवाओं के लिए स्वस्थ रहने और विभिन्न रोगों का शिकार बनने से बचने के लिए अनिवार्य है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जटिल लीवर प्रत्यारोपण जैसी चिकित्सा प्रक्रियाएं जनसाधारण की पंहुच में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे अधिक वहनीय बनाने का एक तरीका सरकारी अस्पतालों में आवश्यक विशेषज्ञता और सुविधाएं सृजित करना है, जैसा तमिलनाडु कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य बीमा स्कीमों में जनसंख्या के व्यापक तबके को शामिल करना चाहिए और लीवर और हृदय प्रत्यारोपण जैसी प्रक्रियाओं को इनमें शामिल किया जाना चाहिए ताकि किसी को भी किसी अति आवश्यक चिकित्सा उपचार की पंहुच से उसके मंहगा होने के कारण मना नहीं किया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान करके जनसाधारण के लिए गुणवत्तायुक्त और वहनीय उपचार सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी हेल्थकेयर संस्थानों के बीच भागीदारी बनाए जाने की आवश्यकता है।

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