आजकल के पत्रकारों को सटीकता, निष्पक्षता, वस्तु-निष्ठता, समाचारों की उपयुक्तता और स्वतंत्रता के बुनियादी मूल्यों का पालन करना चाहिए: उपराष्ट्रपति भारतीय प्रेस परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह में विदाई भाषण

नई दिल्ली
नवम्बर 16, 2017

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि आजकल के पत्रकारों को सटीकता, निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, समाचारों की उपयुक्तता और स्वतंत्रता के बुनियादी मूल्यों का अनुपालन करना चाहिए। वह आज यहाँ राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर भारतीय प्रेस परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह का विदाई भाषण दे रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय वस्त्र मंत्री तथा सूचना और प्रसारण मंत्री श्रीमति स्मृति ईरानी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब ब्रिटिश सत्ता से स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष में तेजी आनी शुरू हुई तो प्रेस लोगों को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण साधन और उनकी आकांक्षाओं की आवाज बन गई। उन्होंने यह भी कहा कि अनेक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं, विशेषकर स्वदेशी भाषाओं के पत्र-पत्रिकाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में धर्मयुद्ध जैसी भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि ब्रिटिश शासकों ने हर संभव अवसर पर प्रेस का दमन करने का प्रयास किया किंतु प्रेस स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रचार-प्रसार का प्रमुख साधन थी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं द्वारा निभाई गई राष्ट्रवादी भूमिका ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकमत को प्रभावित करने और उसे दिशा देने में कोई कम योगदान नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत में प्रेस प्रहरी की भूमिका निभाती रही तथा जनता की समस्याओं और उनकी आकांक्षाओं का दर्पण बनी रही। उनका यह भी कहना था कि यह देश में लोकतंत्र को बचाने और इसे सुदृढ़ बनाने के प्रमुख स्तंभों में से एक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारिता का स्वरूप बदल गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमरिका का वाटरगेट कांड स्मरणीय उदाहरण है कि किस प्रकार निष्पक्ष और निर्भीक प्रेस एक शक्तिशाली राष्ट्रपति के भी पतन का कारण बन सकती है। उनका यह भी कहना था कि भारत में भी, इस प्रकार का दृष्टांत है जिसमें प्रेस द्वारा सीमेंट उद्योग से जुड़े कांड का पर्दाफाश होने के बाद एक मुख्यमंत्री को त्याग-पत्र देना पड़ा था।

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